वरीय पुलिस अधीक्षक के विश्वास को यातायात थाना की पुलिस ने किया चकनाचूर ,यातायात थानाध्यक्ष और अनुसंधानक यातायात थाना कांड संख्या  (32/25)को लेकर दिन भर रहें परेशान ,कई बार वादी/सगे संबंधियों को किया फोन।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

एक तरफ वरीय पुलिस अधीक्षक जीरो टॉलरेंस पर जिला चलाने के लिये भरसक प्रयास कर रहें हें ,दिन रात लगातार थानों का निरीक्षण ,कांडों के निष्पादन समेत कई कार्यों को एड़ी -चोटी एक कर अंजाम दे रहें हें ,वहीं दूसरी तरफ कुछ पुलिस पदाधिकारियों की गलत कार्यशैली उनके लिये सरदर्द बन जाता हें।वरीय पुलिस अधीक्षक ईमानदारी से जिला के पुलिसिया व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे हें लेकिन कुछ थानाध्यक्षों की गलत करतूत उन्हें परेशान कर देती हें।वरीय पुलिस अधीक्षक की तत्परता से आप सभी भलीभांति परिचित हो गये होंगे ,आम जनता का फोन 24घंटा उठाते हें चाहे दिन हो या रात ,अगर आप भूल से भी रात में भी मेसेज कर दिये तों महज चंद मिनटों में उनका जवाब आ जाता हें।ऐसे पुलिस कप्तान की मेहनत पर पानी फेर देता हें कुछ पुलिस पदाधिकारी।

कितने विश्वास से यातायात व्यवस्था को सुधार में लाने के लिये वरीय पुलिस अधीक्षक ने यातायात थानाध्यक्ष कुमार गौरव को थानाध्यक्ष की कुर्सी को सौंपा था ,लेकिन कुमार गौरव ने वरीय पुलिस अधीक्षक के मंसूबे पर पानी फेर दिया हें।महज चंद पैसों के लिये यातायात थानाध्यक्ष ने अपनी सारी हदें पार कर दी हें ,ऐसा हम नहीं पूरे जिला के लोंगों के जुबान पर हें।
अभी हाल के दिनों की बात करें तों ट्रक की ठोकर से एक व्यक्ति की मौत हो जाती हें।गाड़ी के साथ ट्रक चालक पकड़ा जाता हें।बहेड़ी और पतोड़ थाना की पुलिस ने खदेड़कर ट्रक के साथ जिस चालक को पकड़कर यातायात पुलिस के हवाले करता हें , उस चालक को यातायात पुलिस  छोड़ देता हें ।यही नहीं फर्जी चालक को लेकर यातायात पुलिस ने  न्यायालय में गवाही भी दे देता हें कि ट्रक का चालक यही हें और न्यायालय से उसे  जमानत मिल जाता हें। बहेड़ी /पतोर पुलिस ने जिस चालक को पकड़कर यातायात पुलिस को सौंपा था उसे खलासी करार दे दिया जाता हें जबकि चालक वहीं बताया जा रहा हें ।जाहिर सी बात हें कि कुछ पैसों के खातिर ही यातायात पुलिस ऐसा किया होगा। ऐसे में या तों बहेड़ी /पतोंड़ के थानाध्यक्ष झूठ बोल रहें हें या फिर यातायात के थानाध्यक्ष सत्यवादी हरिश्चंद हें।दस्तक 7मीडिया में खबर छपने के बाद यातायात थानाध्यक्ष और अनुसंधानक ने पीड़ित पक्ष यानि वादी को मेनेज करने के लिये काफी प्रयास किया और यह प्रयास अभी भी जारी हें।वादी ने इस पत्रकार को फोन कर सूचना दिया हें कि यातायात  थानाध्यक्ष और अनुसंधानक उनपर दबाव बना रहें हें कि कोई वरीय पुलिस पदाधिकारी अगर तुमसे पूछे तों कहना कि चालक फरार हो गया था और जो पुलिस के पकड़ में आया वह खलासी था।
वरीय पुलिस अधीक्षक ने कुमार गौरव को जब यातायात थाने की थानेदारी दी थी तों थानाध्यक्ष कुमार गौरव ने दिन रात मेहनत कर दरभंगा जेसे शहरों को जाम की समस्या से बहुत हद तक निजात दिला दिया था और आम शहरी काफी खुश थे ,और इसमें कोई शक की गुंजाईश भी नहीं हें। कुछ महीने बीतने के बाद इनके कार्यशैली पर लोग प्रश्न उठाना शुरू कर दिये।शहर के जितने भी चौक चौराहे को इन्होंने अतिक्रमण मुक्त कराया था ,वह सभी जस के तस हो गये और बदले में वसूली शुरू हो गई।आप जितने भी सड़क किनारे लगे ठेले ,दुकानों को देखेंगे आप खुद समझ जाएंगे।इन दिनों महिला थाना के केम्पस में आप जाएंगे तों माँस के बदबू से नाक फट जाएगी ।गेट पर ही तीन तीन मांस के दुकान सज गये ,जिस मांस के दुकान को थानाध्यक्ष ने हटाया था ,लोहिया चौक से बस स्टेंड ,दरभंगा टावर ,दोनार आदि सभी जगहें अतिक्रमणकारी दुकानों को सजाकर बैठ गये।आप खुद समझदार हें और समझ सकते हें।अब इन दुकानदारों से यातायात पुलिस को प्रत्येक दिन भारी भरकम रकम वसूल होती हें। मतलब साफ हें कि अवैध रूप से पैसे की उगाही को लेकर यातायात थाना की पुलिस क्या क्या करती हें यह बताने की जरूरत नहीं हें समझने की जरूरत हें।इसीलिये यहां बताना आवश्यक हें कि ट्रक की ठोकर के बाद हुई मौत के बाद अगर आम पब्लिक चालक को पकड़कर यातायात थाना पुलिस को देती तों चालक को खलासी और खलासी को चालक बनाया जा सकता था लेकिन इस चालक यानि लाल बाबू यादव को ट्रक चलाते बहेड़ी /पतौड़ की पुलिस पकड़कर अपने हाजत में बंद किया था फिर यातायात पुलिस के सुपुर्द किया था जिसे यातायात पुलिस ने छोड़ दिया।क्यूंकि चालक लालबाबू के पास ड्राईविंग लाईसेंस नहीं था।
यही लालबाबू यादव हें जो ट्रक का चालक हें जिसे बहेड़ी /पतौड़ की पुलिस पकड़ी थी और थाना हाजत में रखा गया था।बाद में यातायात थाने को सुपुर्द किया गया।