पैसों की चाहत हो और पैसा जब बोलने लगे तों गलत राह पकड़ने में लोंगों को देर नहीं लगता ,वह चाहे अपराधकर्मी हो या पुलिस ,मोरों थाना पर उठ रहें हें कई प्रश्न ,आखिर कब रुकेगा इन इलाकों से शराब की तस्करी ?पुलिस की भूमिका संदिग्ध।
पैसों की चाहत हो और पैसा जब बोलने लगे तों गलत राह पकड़ने में लोंगों को देर नहीं लगता ,वह चाहे अपराधकर्मी हो या पुलिस ,मोरों थाना पर उठ रहें हें कई प्रश्न ,आखिर कब रुकेगा इन इलाकों से शराब की तस्करी ?पुलिस की भूमिका संदिग्ध।
पैसों की चाहत हो और पैसा जब बोलने लगे तों गलत राह पकड़ने में लोंगों को देर नहीं लगता ,वह चाहे अपराधकर्मी हो या पुलिस ,मोरों थाना पर उठ रहें हें कई प्रश्न ,आखिर कब रुकेगा इन इलाकों से शराब की तस्करी ?पुलिस की भूमिका संदिग्ध।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
आप अक्सर हिन्दी फिल्म देखते होंगे ,एक ऐसा भी फिल्म हें जिसका नाम हें “काला बाजार “।इसी फिल्म का एक गाना हें कि पैसा बोलता हें जिसे नितिन मुकेश ने गाया हें।
हकीकत में भी देखें तों पैसा बोलता हें। जी हाँ जब अच्छे अच्छे परिवार के बच्चे इन पैसों कि खातिर और गलत संगत के कारण आपराधिक वारदात /शराब तस्कर /गांजा तस्कर या अन्य तस्करी में शामिल होकर गलत कार्यों को अंजाम देता हें तों समाज में उसके परिवार का प्रतिष्ठा खत्म हो जाती हें।
इसी तरह पुलिस के भेष में पुलिस पदाधिकारी ऐसे ऐसे गलत लोंगों को संरक्षण देने लगता हें तों पूरा पुलिस महकमा बदनाम होता हें और फिर वर्दी पहनने का कोई मतलब नहीं होता हें।जबकि विभाग में ईमानदार भी पुलिस पदाधिकारी हें।
ऐसा ही सवाल इन दिनों मोरों थाना पुलिस पर सटीक बैठता हें। महज चार पंचायत का यह थाना हें लेकिन शराब बंदी के बाद यहां पदस्थापित थानेदारों की बल्ले बल्ले हें। वजह साफ हें कि इस थाना क्षेत्र की सीमा तीन जिलों से गुजरती हें और कोई मामला होने पर या सीमावर्ती होने के कारण एक दूसरे पर पुलिस फेंकने का प्रयास करती हें या यू भी कह सकते हें कि इन थानेदारों की आपसी तालमेल खूब गुल खिलाती हें। मुजफ्फरपुर जिला की और से आनेवाली एन एच 27की सड़क अतरबेल चौक से मोरों ,पटोरी होते हुये बिशनपुर में दरभंगा समस्तीपुर सड़क को जोड़ती हें, वहीं नदी के उसपार चक मेहसी थाना हें जो समस्तीपुर जिला हें। इस सीमावर्ती जिला का मोरों ,पटोरी ,गोदइपट्टी आदि गांव सेफ जोन हें जिसे शराब तस्कर भरपूर उपयोग करते हें और इन थाना क्षेत्रों में जाल बिछाकर अवैध शराब का कारोबार तस्कर धड़ल्ले से करते आ रहें हें।
गलत संगत के कारण ही प्रभात चौधरी शराब तस्कर बन गया जबकि वह एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखता हें ,प्रभात चौधरी की मां शांत और अच्छे स्वभाव के कारण उनकी चर्चा अक्सर इलाके में होती हें और वे शिक्षिका भी थी जो हाल के दिनों में सेवानिवृत हो गई ,इनके पिता संजय चौधरी भी शांत प्रिय हें और बालू गिट्टी का कारोबार दरभंगा जिला में ही करते हें और कहा जा रहा हें कि एक राजनीति पार्टी से जुड़े हुये भी हें।
शराब तस्कर प्रभात को पैसों की लत ने उसे अपराधी बना दिया और शराब धंधे में मस्त हो गया और इसी का नतीजा हें कि शराब तस्करी को लेकर इसके विरुद्ध कल्याणपुर ,विशनपुर ,चकमेहसी थाना में कई मामले दर्ज हें। कई मामलों में जमानत पर हें और जेल भी जा चुका हें।और इसके एक दो नहीं कई गुर्गे हें जो इस गलत कार्यों को अंजाम दे रहें हें और स्थानीय लोग बताते हें कि मोरों थाना पुलिस को इसकी जानकारी भी हें।
इसी पैसों की आवाज मोरों थाने के पुलिस के कानों में गूंज रही हें। स्थानीय लोग कहते हें कि इस थाना में पुरुष थानेदार होना चाहिये ताकि ऐसे ऐसे चर्चित तस्करो का जवाब पुलिस सही ढंग से दे सके और अपराधियों का हौसला तोड़ सके।
ग्रामीण बताते हें कि अंग्रेजी शराब के अलावे इस थाना क्षेत्र में देशी गुरकी शराब भी खूब बनाया जाता हें। लोग बताते हें कि प्रत्येक दिन दरभंगा शहर से कई क्विंटल में यंहा गुर आता हें जिसका इस्तेमाल गुरकी बनाने में होता हें और ऐसे गुरकी बनाने वाले लोंगों को भी थाना का संरक्षण प्राप्त हें वजह हें पैसा।
इस इलाके के कई लोग दबे जुबान में बताते हें कि शराब तस्कर प्रभात की दबंगई इतनी हें कि होली /होलिका दहन के दिन इतनी गोलिया इसके गुर्गों के द्वारा हवा में चलाई गई कि पूरा गांव सन्न रह गया ,इससे पूर्व भी गोलिया चली थी लेकिन यह गोलिया सिर्फ दहशत फैलाने के लिये अब तक चली हें।ग्रामीण कहते हें कि इन गोलियों की आवाज थाने तक गई लेकिन कोई भी थाने की पुलिसकर्मी वहां तक नहीं पहुंची ,अगर पुलिस वहां पहुंच जाती तों दर्जनों गोली के खोखे पुलिस को हाथ लगती।आसपास के लोंगों ने खोखे को बटोरा और बहा बगल के जल कुम्भी में फेंक दिया और कुछ खोखे अभी भी ग्रामीणों के पास हें लेकिन पुलिस के डर से खोखे को छुपाकर रखे हुये हें।पटोरी एक ऐसा गांव हें जहां हर परिवार में एक सरकारी नौकरी में हें और कोई भी व्यक्ति पुलिसिया दांव पेंच में फंसना नहीं चाहता हें और कहता भी पुलिस का सरंक्षण उसे प्राप्त हें ऐसे में कौन पुलिस को मदद करेगा।
लेकिन थानाध्यक्ष पायल इन सभी आरोपों से इनकार करती हें।
वरीय पुलिस अधीक्षक के विश्वास को यातायात थाना की पुलिस ने किया चकनाचूर ,यातायात थानाध्यक्ष और अनुसंधानक यातायात थाना कांड संख्या (32/25)को लेकर दिन भर रहें परेशान ,कई बार वादी/सगे संबंधियों को किया फोन।
वरीय पुलिस अधीक्षक के विश्वास को यातायात थाना की पुलिस ने किया चकनाचूर ,यातायात थानाध्यक्ष और अनुसंधानक यातायात थाना कांड संख्या (32/25)को लेकर दिन भर रहें परेशान ,कई बार वादी/सगे संबंधियों को किया फोन।