तिलकामांझी भागलपुर विवि के 2595 पेंशनधारियों में नाराजगी है। पेंशनर संघर्ष मंच के अनुसार, समय पर पेंशन का भुगतान नहीं होने से पेंशनधारियों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई पेंशनधारी।

बोले भागलपुर: पेंशनरों को नियमित और समय पर पेंशन की राशि का भुगतान हो
शिक्षा के क्षेत्र में तिलकामांझी भागलपुर विवि का गौरवशाली इतिहास रहा है। समय के साथ इसका क्षेत्र भले ही सिकुड़ता गया। लेकिन विवि की गरिमा में कमी नहीं आई है। विवि की व्यवस्था से शिक्षा के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेंशनधारियों में नाराजगी है। पेंशनर संघर्ष मंच का कहना है कि विवि में 2595 पेंशनधारी हैं। उसमें से 281 मंच से जुड़े हैं। शायद ही कोई पेंशनधारी होगा जिसका बकाया विवि के पास नहीं है। जिन्दगी के अंतिम पड़ाव पर पेंशन की बहुत जरूरत होती है। कई लोग बीमार हैं। उन्हें दवा और इलाज के लिए पैसे चाहिए। समय पर पेंशन नहीं मिलने से इलाज में परेशानी होती है। हालत यह है कि अपने हक के लिए पेंशनधारियों को धरना-प्रदर्शन करना पड़ता है।

तिलकामांझी भागलपुर विवि में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेंशनधारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि उनकी समस्याओं का विवि प्रशासन समाधान नहीं कर रहा है। जिसके चलते रिटायर्ड होने के बाद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय से पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। शायद ही कोई पेंशनधारी होगा जिसका कुछ न कुछ विवि में बकाया नहीं है। पेंशनधारी इसके लिए विवि प्रशासन को जिम्मेदार मान रहे हैं।

तिलकामांझी भागलपुर विवि में 2595 पेंशनधारी हैं। पेंशनरों की समस्या के समाधान के लिए 16 नवम्बर 2022 को पेंशनर संघर्ष मंच का गठन हुआ। हालांकि इससे 281 सदस्य ही जुड़े हुए हैं। पेंशनरों की शिकायत है कि उन्हें विवि से नियमित रूप से पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है। पांचवां, छठा और सातवें वेतनमान का एरियर नहीं मिल पाया है। कई पेंशनधारियों का एरियर बकाया है। बहुत से पेंशनधारियों को पेंशन का 90 प्रतिशत ही भुगतान हो रहा है। विवि प्रशासन से बार-बार आग्रह करने के बावजूद उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जा रहा है। मृत कर्मियों के पारिवारिक पेंशन की शुरुआत में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रेच्युटी के एरियर का भुगतान नहीं हो रहा है। परीक्षा आदि के अग्रिम के समायोजन में परेशानी हो रही है। मनमाने तरीके से कटौती की जा रही है। कई लोगों के अवकाश ग्रहण करने के साल भर बाद भी पेंशन शुरू नहीं की गई। अर्जित अवकाश का नकदीकरण भी नहीं हो रहा है। समूह बीमा का भी पेंशनधारियों का बकाया है। विवि प्रशासन को समस्याओं का समाधान करने के लिए आगे आना चाहिए।

पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने बताया कि तिलकामांझी भागलपुर विवि में कुल 2595 पेंशनधारी हैं। सभी पेंशनधारियों की कुछ न कुछ समस्या है। शायद ही कोई पेंशनधारी होगा जिसका कुछ बकाया विवि के पास नहीं है। उम्र के अंतिम पड़ाव पर पेंशन और बकाया का भुगतान नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है। रुपये के अभाव में सही तरह से अपना इलाज भी नहीं करा पाते हैं। मृत कर्मियों के बकाया राशि और पारिवारिक पेंशन के लिए परिजनों को भटकना पड़ रहा है। पेंशनधारियों के बकाये राशि को फिक्सड डिपॉजिट करके विवि ब्याज कमाता है। सरकार कहती है कि पेंशनरों के लिए राशि विवि में जमा है। उसी से पेंशनधारियों को भुगतान किया जाए। विवि प्रशासन कहता है कि राशि सरकार से प्राप्त होगी तो भुगतान किया जाएगा। सरकार को पूरे मामले की जांच करते हुए पेंशनधारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

पेंशनरों को विवि में सम्मान नहीं मिलता है। काम के लिए हर टेबल पर दौड़ना पड़ता है। बैठने के लिए भी नहीं कहा जाता है। इससे पेंशनधारी अपमानित महसूस करते हैं। उनकी संचिकाएं दबा दी जाती हैं। अभी भी पेंशनधारियों की कई संचिकाएं विभिन्न विभागों में लंबित हैं। पूछने पर बताया जाता है कि संचिकाएं नहीं मिल रही है। पूर्व में यहां सक्षम पेंशन सेल था। जिसमें उनलोगों के मामलों को निपटाया जाता था। पेंशनरों से कोई संवाद नहीं करता है।

रिटायर्ड प्रोफेसर अमिता मोईत्रा ने बताया कि पेंशनधारियों का पेंशन सीधे खाता में आना चाहिए। वर्तमान में अन्य माध्यमों से पेंशन भेजने की व्यवस्था है। इसमें सुधार करने की जरूरत है। पेंशन का भुगतान समय से और नियमित करना चाहिए। पेंशन देकर सरकार कोई मेहरबानी नहीं कर रही है। उनलोगों का पैसा पेंशन के माध्यम से मिल रहा है। बहुत पेंशनधारियों के एरियर का बकाया है। विभिन्न मद में पेंशनधारियों की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। उम्र के अंतिम पड़ाव में पेंशनधारी बीमार पड़ रहे हैं। उनके इलाज, दवा आदि के लिए पैसे की जरूरत होती है। पेंशन एक इज्जत है। इसका आदर करना चाहिए। अन्य सेवाओं में अवकाश ग्रहण करने के दिन कर्मियों को सभी सुविधाएं प्रदान कर दी जाती हैं। लेकिन तिलकामांझी भागलपुर विवि में ऐसे मामलों को लटका कर रखा जा रहा है। वह 2018 में अवकाश ग्रहण कर चुकी है। लेकिन अभी तक सातवें वेतनमान का एरियर नहीं मिल पाया है।

पेंशनधारियों के बकाया राशि का भुगतान हो

भागलपुर। पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने बताया कि तिलकामांझी भागलपुर विवि में शायद ही कोई पेंशनर होगा जिसकी किसी प्रकार की राशि बकाया नहीं है। कई ऐसे लोग है जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज के अभाव में परलोक सिधार गए। बहुत बीमार पड़ने पर अपना इलाज तक नहीं करा पाते हैं। दिवंगत हो चुके विश्वविद्यालय कर्मियों की बकाया राशि और पारिवारिक पेंशन के लिए उनके परिजनों को दर-दर भटकना पड़ता है। पेंशन कर्मियों की बकाया राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट करके विश्वविद्यालय ब्याज कमाता है। सरकार कहती है कि पेंशनरों को भुगतान के लिए राशि टीएमबीयू के कोष में जमा है और उसी से पेंशनरों को भुगतान किया जाना है। फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि जबतक खर्च नहीं हो जाती तबतक कोई नया आवंटन नहीं किया जाएगा।

पेंशन का नियमित भुगतान करना विवि की जिम्मेदारी

भागलपुर। पेंशनर संघर्ष मंच के सह संयोजक अमरेन्द्र कुमार झा ने बताया कि पेंशन ग्रांड से फिक्स डिपॉजिट किया जाना एक तरह का आपराधिक मामला है। कुलपति तत्काल इस मामले में संलिप्त पदाधिकारी और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई सुनिश्चित करें। पेंशन ग्रांड की राशि से 2600 पेंशनर को जनवरी एवं फरवरी 2025 के पेंशन का तत्काल भुगतान किया जाय। विश्वविद्यालय द्वारा हाईकोर्ट के एमजेसी आदेश का उल्लंघन करना उच्च न्यायालय की अवमानना है। विवि प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेंशनरों के समक्ष आर्थिक संकट परेशानी का कारण बन गई है। पेंशन का नियमित भुगतान करना विवि की जिम्मेदारी है।

बकाया राशि नहीं मिलने से पेंशनर परेशान

भागलपुर। मारवाड़ी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सेवानिवृत्त डॉ. गुरुदेव पोद्दार ने बताया कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पेंशनरों को सम्मान नहीं मिल रहा है। कार्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं है। यहां हर कार्य के लिए टेबल का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे पेंशनरों को काफी परेशानी हो रही है। पेंशन से जुड़ी समस्या के कारण सारे सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारियों की हालत खराब है। कई शिक्षक और कर्मी तो ऐसे भी हैं जो दिवंगत हो चुके हैं। विवि प्रशासन को पेंशनरों के बकाये राशि का तत्काल भुगतान करना चाहिए। पेंशन की राशि का भी भुगतान नियमित होनी चाहिए। ताकि पेंशनर बीमारी का इलाज करा सकें। कुलपति को पेंशनरों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

काम के लिए विवि का चक्कर लगाना पड़ता है

भागलपुर। पेंशनर संघर्ष मंच के संरक्षक डॉ. सत्यव्रत सिंह ने बताया कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पेंशनरों के सामने जो समस्याएं आ रही हैं उसे शब्दों में व्यक्त किया जाना उचित प्रतीत नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय में कोई भी काम कराने के लिए टेबल-टेबल चक्कर लगाना पड़ता है। लेकिन इसपर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुलपति पद की अपनी अलग गरिमा और विशेष मर्यादा होती है। कुलपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह भी पेंशनर बनेंगे। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कुलपित की सकारात्मक पहल से पेंशनरों के साथ अन्य कर्मियों और उनके परिवार वालों को बड़ी राहत मिल सकती है।

इनकी भी सुनिए

नियमित रूप से पेंशन नहीं मिल रहा है। जिससे काफी परेशानी होती है। विवि द्वारा कहा जाता है कि सरकार द्वारा पेंशन की राशि स्वीकृत नहीं हो रही है, जिसके कारण समय पर पेंशन भुगतान में परेशानी होती है। इस समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी विवि प्रशासन की है।

-प्रो. अमिता मोइत्रा, पेंशनर

हाईकोर्ट और राज्य सरकार के आदेश के बावजूद वर्ष 1995 से 1998 तक का पीएफ राशि विश्वविद्यालय द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। जो उच्च न्यायालय की अवमानना है। विवि के कुलपति पेंशनरों से संवाद स्थापित नहीं करते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ रही है।

-कुमार आशुतोष, पेंशनर

विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने के बाद रिटायर हुए वरिष्ठ नगारिकों को धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर कर दिया गया है। यह अत्यंत शर्मनाक स्थिति हो गई है। पेंशनर शिक्षकों और कर्मियों द्वारा अपने हक के लिए संघर्ष करना विश्वविद्यालय के लिए कलंक की बात है। समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

-प्रो. किरण सिंह, पेंशनर

पेंशनरों के मामले में विश्वविद्यालय संवेदनहीन बना हुआ है। सरकार से प्राप्त राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट करना आपराधिक कृत्य है। नियमित पेंशन भुगतान और सेवांत लाभ से वंचित पेंशनरों को विश्वविद्यालय में धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करना पड़ता है, जो काफी दुखद एवं निंदनीय है।

-प्रो. मिथिलेश सिन्हा, पेंशनर

बिना किसी कारण के पेंशनरों के भुगतान में कटौती कर ली जाती है। 90% पेंशन का भुगतान किया जाता है और शेष 10% की कटौती का कुछ भी पता नहीं चलता है। विश्वविद्यालय का कहना है कि सरकार से आवंटन मिलने पर ही पेंशन भुगतान हो पाएगा।

-प्रो. जयप्रकाश झा, पेंशनर

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा रिटायर शिक्षक और कर्मचारियों को प्रताड़ना और आर्थिक शोषण के कुचक्र में फंसाकर छोड़ दिया गया है। कई बार अपनी मांगों के लिए प्रयास करने के बाद भी प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है, जो काफी निंदनीय है।

-प्रो. चन्द्र भानु सिंह, पेंशनर

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा राजभवन के आदेशों, न्यायादेशों और राज्यादेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। गलत सूचनाएं देकर राजभवन और सरकार को टीएमबीयू भ्रमित कर रहा है। सरकार से प्राप्त राशि की उपयोगिता प्रमाणपत्र सरकार को नहीं दिया जाता है, जिसके कारण सरकार अनुदान रोक लेती है।

-डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता, पेंशनर

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पेंशनरों को उनका हक नहीं देना बहुत निंदनीय कुकृत्य है। सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मियों को पेंशन नहीं देकर स्वयं वेतन लेने वाले पदाधिकारी को पद पर रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। पेंशनरों को उनका अधिकार नहीं मिलना विवि प्रशासन की असफलता है।

-प्रो. नवल किशोर कुमार, पेंशनर

विवि में पेंशनरों को सम्मान नहीं मिलता है। काम कराने के लिए पेंशनरों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। पेंशनरों ने अपनी पूरी जिन्दगी शिक्षा के क्षेत्र में दी है। इसके बाद इतना परेशान करना शोभा नहीं देता है। वरिष्ठ नगारिकों को पैसे के लिए मोहताज कर देना अमानवीयता की पराकाष्ठा है।

-प्रो. डीएन सिंह, पेंशनर

कुलपति को संघ और स्टेट होल्डर के साथ संवाद करना चाहिए। उन्हें विश्वविद्यालय के अभिभावक होने के कर्तव्य का पालन करना चाहिए। राजभवन या सरकार को भ्रमित करना गलत है, इसके लिए संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मियों पर इरादतन अपराध का मुकदमा दायर किया जाना चाहिए।

-प्रो. विभूति नारायण सिंह, पूर्व कुलपति मगध विवि

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पेंशनर अपनी सेवांत लाभ, बकाया एरियर और पारिवारिक पेंशन राशि के लिए चक्कर लगा रहे हैं। यह विवि प्रशासन के लिए शर्मनाक है। इसके कारण पेंशनरों को सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ा है।

-प्रो. कामेश्वर बागवे, पेंशनर

सैकड़ों पेंशनरों की राशि विवि के पास बकाया है। उन लोगों की समस्याओं को कोई सुनने वाला नहीं है। कार्यालयों में सही जानकारी नहीं दी जाती है। पेंशनरों की समस्या का समाधान करने के लिए विवि में विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। पेंशनरों का सम्मान होना चाहिए।

-प्रो. चंद्रेश, पेंशनर

समस्याएं

1. पेंशन का नियमित भुगतान नहीं हो रहा है, जिसके चलते काफी परेशानी हो रही है।

2. बकाया राशि के भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।

3. पेंशन की राशि में कटौती की जा रही है। जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं दिया जाता है।

4. दिवंगत हो चुके सेवानिवृत्त कर्मियों के पारिवारिक पेंशन मिलने में काफी परेशानी।

5. रिटायर्ड होने के बाद कई महीने तक पेंशन शुरू नहीं होता है।

सुझाव

1. पेंशन का भुगतान सीधे पेंशनर के खाते में हो। जिससे पेंशनरों के समक्ष कोई समस्या नहीं होगी।

2. हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे विवि प्रशासन।

3.पेंशन ग्रांड से फिक्स डिपॉजिट करने वालों पर कार्रवाई हो

4. पेंशनरों की समस्याओं का समाधान के लिए अलग विंग बनाने की जरूरत।

5. विवि में पेंशनरों के बैठने की व्यवस्था हो।

पेंशनरों के हिस्से की राशि को फिक्स्ड डिपोजिट करने वालों पर कार्रवाई हो

भागलपुर। पेंशनर संघर्ष मंच के सह संयोजक अमरेन्द्र झा ने कहा कि तीन दशकों में सरकार द्वारा पेंशन मद में भेजे गये ग्रांट से फिक्स्ड डिपोजिट करना एक आपराधिक कृत्य है। बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के पेंशनरों के हिस्से की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट करने में संलिप्त कर्मी और पदाधिकारी के विरुद्ध कुलपति तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराएं। यह फंड के विचलन का मामला है।

 

हाईकोर्ट ने एमएससी में पेंशनधारियों को 100 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के बावजूद बहुत से पेंशनधारियों को 90 प्रतिशत राशि का भुगतान किया गया है। यह हाईकोर्ट की अवमानना है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार विवि के चंगुल से पेंशनरों को मुक्त करके सीधे उनके पेंशन और सेवांत लाभ का भुगतान उनके खाते में करे, ताकि उन्हें आर्थिक शोषण और प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।

बीएन कॉलेज से अवकाश ग्रहण कर चुके प्रो. सुखदेव चौधरी ने कहा कि सातवां वेतनमान लागू किया गया है। लेकिन उसके एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। पेंशन का समय से भुगतान नहीं होने से बहुत परेशानी हो रही है। वह बीमार हैं। जिन्दगी दवा पर निर्भर है। पेंशन का भुगतान समय पर नहीं होने से इलाज कराने में भी परेशानी होती है। विवि प्रशासन को पेंशनधारियों के बकाए राशि का भुगतान तत्काल कर देना चाहिए। कुमार आशुतोष राजेश ने बताया कि उनकी पेंशन की गणना गलत की गयी है। इसके चलते हर महीने आठ हजार रुपये कम मिल रहा है। उनके एरियर का भुगतान 2021 से नहीं हुआ है। पीएफ की राशि का भुगतान 1995 से 1998 तक का नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है।

 

लेकिन अभी तक राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उनकी बहन डॉ. अंजना झा अवकाश ग्रहण कर चुकी हैं। इलाज कोलकाता में हो रहा है। उसके ग्रेच्युटी का 10 लाख रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। सरकार और विवि प्रशासन को पेंशनधारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना चाहिए। पेंशनधारी पूरी जिन्दगी शिक्षा के क्षेत्र में दे देते हैं। लेकिन अवकाश ग्रहण करने के बाद अपने कामों को कराने के लिए विवि में भटकना पड़ता है।

पेंशनर संघर्ष मंच के संरक्षक डॉ. सत्यव्रत ने बताया कि पेंशनरों के सामने कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। विवि प्रशासन समय पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रहा है। शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती है। कुलपति को पेंशनरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। प्रो. नवल किशोर कुमार ने बताया कि पेंशनधारियों को उनका हक नहीं देना निंदनीय है। कुलपति को समस्याओं के समाधान के लिए पहल करनी चाहिए।