झारखंड राज्य मे हाल मे हुये चिकित्सकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की गड़बड़ी को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ हैं। चर्चा हैं कि सरकार अपने ही बनाए नियमों को कैसे धज्जियां उड़ाते हुये उन चिकित्सकों को उसी स्थान पर बैठा दिया हैं जहां वे वर्षों से जमे हुये हैं। अगर ऐसा ही होता रहा तो सरकार जो प्रत्येक साल पदाधिकारियों और कर्मियों का स्थानांतरण करती हैं उसका क्या औचित्य हैं। ऐसे मे सवाल उठना लाजमी हैं ?स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव प्रभु नाथ शर्मा का पत्र 31जुलाई 23को जो जारी किया गया हैं वह कई सवाल उत्पन्न करते हैं।

सरकार के सचिव श्री शर्मा का पत्र ज्ञापांक 3/स्थाo डी 01-47/2023,1153(3)के अवलोकन से तो यही पता चलता हैं और इस पत्र की सूचना उन्होंने विभाग के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक दी हैं जो सवालों से घिरे हैं। एक इस उदाहरण को देखने से पता चलता हैं कि इसमें और भी कई चिकित्सक ऐसे होंगे जो वर्षों से एक स्थान पर जमे हैं।

अब हजारीबाग के बरही स्वास्थ्य केन्द्र की चर्चा करें तो यहां के अनुमंडलीय अस्पताल मे दो दशक से ज्यादा दिनों से डॉ॰ प्रकाश सिंह ज्ञानी जमे हैं। सरकार के अवर सचिव का नोटिफिकेशन कहता हैं कि डॉ॰ ज्ञानी को फिर से बरही अस्पताल मे तैनात कर दिया गया हैं। यह जांच का विषय हैं ?
हजारीबाग जिले के बरही स्वास्थ्य केन्द्र मे करीब दो दशक से डॉ॰प्रकाश सिंह ज्ञानी जमे हैं।अनुमंडलीय चिकित्सा प्रभारी डॉ॰ प्रकाश सिंह ज्ञानी को सरकार द्वारा फिर से बरही स्वास्थ्य केन्द्र मे पदस्थापन किये जानें पर पूरे अनुमंडल क्षेत्र मे चर्चा का विषय बन गया हैं। स्थानीय लोग सदमे मे हैं कि आखिर सरकार ने फिर से डॉ॰ ज्ञानी को बरही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मे कैसे पदस्थापन कर दिया हैं।सरकार के मंत्री या प्रधान सचिव कैसे अपने ही बनाए नियमों की धज्जियां उड़ाकर सरकार को कटघरे मे खड़ा कर दिया हैं इसका उदाहरण डॉ॰ प्रकाश सिंह ज्ञानी से ज्यादा क्या हो सकता हैं।

इससे पता चलता हैं कि 31जुलाई को सरकार के अपर सचिव प्रभुनाथ शर्मा द्वारा जीतने भी चिकित्सकों का स्थानांतरण और पदस्थापन किया गया हैं उसमें कहीं और चिकित्सक तो नहीं जो वर्षों से जमे हैं ?हालांकि करीब तीन सो चिकित्सक का स्थानांतरण और पदस्थापन सरकार ने किया हैं।अब सवाल यही हैं कि वर्षों से एक ही केन्द्र पर जमे चिकित्सक का नाम सरकार के नोटिफिकेशन मे हैं जिसका पूर्व के जगहों पर ही पदस्थापन हुआ हैं ,तो यह पदस्थापन आखिर कैसे हुआ ?सरकार के नियम के विरुद्ध यह कैसे हो सकता हैं कि वर्षों से जमे चिकित्सक को फिर से उसी स्थान पर योगदान करने का पत्र मिल जाए ?