भागलपुर का नंदू दांतों से 30 किलो का साइकिल उठाता है, तो वहीं कंधों से 100 किलो के बिजली के खंभे को खींचता है.
भागलपुर का नंदू
भागलपुर:बिहार के भागलपुर के लोदीपुर क्षेत्र के रहने वाले नंदू कुमार अपनी ताकत से सभी को चौंका रहे है. नंदू दांतों से न केवल साइकिल बल्कि 30 किलो तक वजन उठा लेता है. यही नहीं वो 100 किलो से अधिक के बिजली के खंभे को अपने कंधे के बल खींचता है. बॉडी बनाने के लिए नंदू ट्रक के टायर से पुश अप करता है.
अपने बचपन से ही नंदू ने ये कौशल विकसित किया है.नंदू को है दांतों से वजन उठाने का शौक:नंदू कुमार बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही दांतों से वजन उठाने का शौक रहा है. जब वह 5वीं कक्षा में थे, तब से उन्होंने इसकी प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी. आठवीं कक्षा तक पहुंचने के बाद उनका यह शौक और बढ़ गया. इसके साथ उनकी कुश्ती में भी रुचि बढ़ गई. समय के साथ उनके वजन उठाने के कारनामे भी चलता रहा. नंदू अब तक वह 30 किलो तक वजन अपने दांतों से उठा चुके हैं.
भागलपुर के नंदू का दम “यदि सरकारी मदद और संसाधन मिले तो मैं राज्य के लिए कुश्ती खेलना चाहता हूं. इसके बाद मैं नेशनल में भी मेडल जीतने का कुवत रखता हूं. मैं 50 किलो के टायर से वो पुशअप करता हूं.”-नंदू कुमार, पहलवानवजन उठाने के लिए घर पर बनाया देसी जिम:आर्थिक तंगी के कारण नंदू कुमार जिम नहीं जा सकता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी.
नंदू ने अपने घर के खाली जगह पर एक देसी जिम तैयार कर लिया है. सीमेंट, लकड़ी और पाइप के सहारे उसने जिम के सभी उपकरण बनाए हैं. इस देसी जिम में नंदू वजन उठाने के साथ ही दांतों से साइकिल उठाने की भी प्रैक्टिस करता है. इसके अलावा वो अपने भाई के साथ कुश्ती की प्रैक्टिस करता है.
कंधों के बल खींचता है 100 किलो वजन
नंदू का कुश्ती में करियर बनाने का सपना:नंदू का सपना है कि सरकार की मदद से असे संसाधन मिलें, जिससे वह राज्य स्तर पर कुश्ती खेल सके. उसका कहना है कि अगर उसे उचित अवसर मिलेगा तो वो नेशनल लेवल पर भी मेडल जीतने का पूरी प्रयास करेगा. उसने यह भी बताया कि वह 50 किलो के टायर से पुशअप करता है.
दांतों से वेट लिफ्टिंग करने का कारनामा नंदू का भाई चंदन भी करता है कुश्ती:नंदू का छोटा भाई चंदन कुमार ने भी कुश्ती में अपना करियर बनाने का इरादा बना लिया है. उसका कहना है कि वह जिले में आयोजित होने वाली कुश्ती प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेता रहता है. वहीं वो इस खेल में अपना भविष्य देखता है. चंदन ने बताया कि उसे मिट्टी में खेलने का काफी शौक है और कुश्ती के दौरान जब उसके ऊपर मिट्टी लगती है तो उसे सुकून मिलता है. उनका भी सपना है कि उन्हें ओलंपिक में मेडल जीतने का मौका मिले.
नंदू का दम देखो
पारिवार से मिला पूरा समर्थन:नंदू और चंदन के पिता उनके अभ्यास में पूरी तरह से समर्थन करते हैं. वहीं वो इस क्षेत्र में अपने बेटों के लिए एक बेहतर भविष्य को देखते हैं. हालांकि नंदू की मां को यह सब देखकर चिंता होती है कि कहीं उनके बेटे घायल न हो जाएं. बता दें किनंदू ने अपनी मेहनत और संघर्ष से यह साबित किया है कि अगर इंसान में लगन हो और उसको सही मौका मिले तो वो किसी मुकाम तक पहुंच सकता है.
