एसएसपी साहब ,मेरी फरियाद भी सुनिये ,आपके आदेशों का नहीं हो रहा हैं पालन ,आखिर मै मालखाना का प्रभार किसको दूँ ?दर -दर भटक रहा हुं।सवाल यही कि क्या एसएसपी के आदेशों को भी थानेदार उड़ा रहें हैं धज्जिया।
एसएसपी साहब ,मेरी फरियाद भी सुनिये ,आपके आदेशों का नहीं हो रहा हैं पालन ,आखिर मै मालखाना का प्रभार किसको दूँ ?दर -दर भटक रहा हुं।सवाल यही कि क्या एसएसपी के आदेशों को भी थानेदार उड़ा रहें हैं धज्जिया।
एसएसपी साहब ,मेरी फरियाद भी सुनिये ,आपके आदेशों का नहीं हो रहा हैं पालन ,आखिर मै मालखाना का प्रभार किसको दूँ ?दर -दर भटक रहा हुं।सवाल यही कि क्या एसएसपी के आदेशों को भी थानेदार उड़ा रहें हैं धज्जिया।
दस्तक 7 मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
सर ,मै किसके पास जाऊ ,कहां जाऊ ,नौकरी के महज दो साल से भी कम बचे हैं ,अगर एलपीसी नहीं मिला तों मेरा वेतन बंद हो जाएगा ,मै किसके पास जाऊं।एसएसपी साहब के आदेश के बावजूद मै दर -दर भटक रहा हुं। यह कहते हुये एसआई जय गोविन्द प्रसाद फुट -फुट कर रों पड़े।
पुलिस विभाग मे रहते हुये ऐसा लग रहा था कि उन्होंने कौन सा जुर्म कर दिया हैं।
मामला बिरौल थाने का हैं।एसआई जय गोविन्द प्रसाद कई महीनों से मालखाना का प्रभार देने बिरौल थाना आ रहें हैं लेकिन उनका प्रभार बिरौल थानाध्यक्ष नहीं लें रहें हैं।यह आरोप एसआई जय गोविन्द प्रसाद ,थानाध्यक्ष पर लगा रहें हैं।
यहां बता दे कि दो माह पुर्व वरीय पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट शब्दों मे कहा था कि हर हालत मे मालखाना का प्रभार थानाध्यक्ष को लें लेना हैं वरना कारवाई की जाएगी। इसके बावजूद एसआई जय गोविन्द प्रसाद दर -दर की ठोकरें खा रहा हैं और थानाध्यक्ष उनसे प्रभार नहीं लें रहें हैंजब्कि एसआई जय गोविन्द प्रसाद लगातार बिरौल थानाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी से मिलकर माल खाना का प्रभार सौंपने थाना आ रहे हैं। मालूम हो कि वर्ष 2022 में एस आई जय गोविन्द प्रसाद को माल खाना का प्रभार सौंपा गया था। उसके बाद इनका तबादला बड़गांव थाना हो गया। इनके द्वारा कई बार आग्रह करने पर भी वर्तमान थानाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी प्रभार नहीं ले रहे हैं। इनका सेवा अवधि दो वर्ष से कम रह गया है। बताया जाता है कि एसआई जय गोविन्द प्रसाद का तबादला जल्द ही गृह जिला बक्सर होने वाला है और अगर बिना एलपीसी लिये गृह जिला गये तों उनको उनका वेतन तब तक नहीं मिलेगा जब तक उनका प्रभार नहीं लिया जाता हैं।
ऐसे मे उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई हैं।
अब सवाल यही उठता हैं कि एसएसपी के निर्देश /आदेश का पालन क्या थानाध्यक्ष नहीं करते हैं। एसआई का कहना हैं कि जिस तरह मालखाना का प्रभार उनके द्वारा लिया गया था उसी तरह थानाध्यक्ष को थाना का प्रभार दे रहें हैं ,प्रभार देने मे कोई कमी या अधिक नहीं हैं,सभी दुरुस्त हैं।यहां बता देना जरूरी हैं कि ऐसे मामलों मे न्यायालय का भी गंभीर रुख हैं और पुलिस मुख्यालय का भी स्पष्ट निर्देश हैं।एसएसपी के निर्देश के बाद भी मालखाना का प्रभार थानाध्यक्ष द्वारा नहीं लिया जाना कहां तक उचित हैं जब्कि दरभंगा एसएसपी का भी स्पष्ट निर्देश हैं।