निस्ता के नासिरगंज मदरसा नासिरूल उलूम में जलसा-ए- दस्तराबंदी व तालीमी बेदारी कान्फ्रेंस में ओलमाओं ने रूहानी तकरीर की। कुरान की फजीलत के साथ मुकम्मल कुरान हिफ्ज करने पर मदरसा के तालीबे इल्म को धार्मिक ग्रंथ कुरान,साफा,गुलपोशी व मोमेंटो से सम्मानित होने वालों में हाफिज मोहम्मद आकीफ,व मोहम्मद अरशदुल्लाह मुजफ्फरपुर मोहम्मद सलमान वैशाली, मोहम्मद एजाज अहमद,दोघङा असरफ अली,मोहम्मद अल्ताफ,अब्दुल रहमान, मोहम्मद,हसन,मोहम्मद रूस्तम,हाफीज अब्दुल अलीम,मोहम्मद हशीन सहरसा मोहम्मद युसुफ शकरपुर,शामिल हैं। हाफीज मोहम्मद शहनवाज आलम,दरभंगा हाफिज मसलेह उद्दीन व हाफिज इमरान सुपौल हाफिज अफान सनद से नवाजा गया। इस मौके पर अपनी रूहानी तकरीर में मुख्य अतिथि अमारत ए शरीया के नायब नाजिम मौलाना मुफ्ती सनाउल होदा कासमी ने कहा मुकम्मल कुरान हिफ्ज कर तलावत करने वाला हाफिज अल्लाह के करीब होता है।इंसानियत का पैगाम देता इस्लाम धर्म में कुरान पाक रूहानी ताकत देता है। समाज का आइना हाफीजे कुरान की अहमियत दीन व दुनिया दोनों में है। सबसे अधिक माहे रमजान में होती है जब वह मस्जिदों में अल्लाह के पाक कलाम को रोजेदार को एक महीने तक लगातार तलावत(कंठस्थ)कर अमन का पैगाम देते हैं।तरबीयत व समाज के मुस्तकबील को रौशन करने को लेकर आपसी मोहब्बत रखें।आधुनिक व तकनिकी शिक्षा के इस दौर में नई नस्ल को तालीम व इस्लाह कर हर आदमी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।मदरसा के दायरे को बढ़ाकर तालीमी ठांचे को मजबूत करना होगा। दूर दूर से बच्चों ने आकर हाफिज बनने का जो मुकाम आज हासिल किया। मदरसा के बानी हाजी मौलाना अतीक अहमद के ख्वाबों की ताबीर का सिलसिला कायम रखने में मौलाना अनवार अहमद रेशादी व मुफ्ती सलीम नासरी के अहम किरदार व मेहनत का नतीजा है।जिन्हों ने नई तकनीक से मदरसा में रौशनी फैलाने का काम किया है।भरवाङा मदरसा के कारी शब्बीर अहमद ने कहा मासूम बच्चों का हाफिज बनना समाज के लिए आइना है।दुनिया की कोई नेमत हिफ्जे कुरान का मुकाबला नहीं कर सकता।इस्लामिक मिशन शैक्षणिक संस्थान के मौलाना अरशद फैजी ने कहा आसमान से नाजील कुरान पाक इंसानियत का दस्तुर-ए-हयात व नुर आला नूर का माध्यम है।प्रोफेसर शकील अहमद ने कहा कि मुल्क में दो तालीमी निजाम में लॉर्ड मैकाॅले जो हिन्दुस्तानियों को गुलाम बनाना चाहता था।दुसरी तरफ ओलमाओं ने दारूल उलूम देवंद जैसे शैक्षणिक संस्थान स्थापित की।
मौलाना अमानुल्लाह नस्तवी, मोजाहीद इस्लाम कासमी,मुफ्ती सनाउल्ल होदा कासमी
ने कहा अकलियत समाज को चाहिए की वह दीन की तालीम को फरोग देने में अपना किरदार अदा करे। हाजी मनुव्वर अली ने जो चिराग मदरसा नसिरूल उलूम में रौशन किया था वह नेक ख्वाहिश के साथ बरकरार है। शरपस्ती मौलाना हुसैन अहमद नासरी ने की। हाफिज सिबगतुल्लाह साकिबी की तलाव- ए- कुरान से आगाज दीनी प्रोग्राम में शायर इशतेयाक रहबर के नाते कलाम मै मदरसा की जान हुं,।मै हाफीजे कुरान हुं की आवाज से मरहबा मरहबा गूंजने लगा।इस दौरान डा.मुस्तफीज अहमद,प्रोफेसर डा.आमीर निशात,हाजी शमसुल होदा,मंसूर आलम,मोहम्मद सलाउद्दीन, हाजी तबरेज आलम, तनवीर आलम, मोलाना मैन्तुल्लाह, अभियंता अबू सईद, इंजीनियर मोहम्मद खालीद सहित सैकङों लोग मदरसा के कामयाबी की दुआ की।
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