दरभंगा स्थित गुदड़ी बाजार में चल रहा एक नंबरी लॉटरी का अवैध कारोबार ,धंधेबाज हो रहें हैं मालामाल ,गरीबों का उजड़ रहा हैं घर ?नदी किनारे बनी झोपड़ी से बिकते हैं अवैध शराब ,स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहें सवाल ?

दरभंगा /संजय कुमार राय

दरभंगा जिला के नगर थाना क्षेत्र का गुदड़ी बाजार ,खुले आम खेला जा रहा हैं एक नंबरी लॉटरी का खेल ,कोई मालामाल ,तो कोई कंगाल ,पैसों की चाहत में कई गरीब लोगों का घर उजड़ रहा हैं  ,पर इसे देखने वाला कोई नहीं हैं ,जब्कि यह खेल प्रतिबंधित हैं और नगर थाना के ठीक सौ मीटर की दूरी पड़ हैं।
जी हाँ ,दरभंगा जिला के नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत गुदड़ी बाजार इलाके में खुलेआम एक नंबरी लॉटरी का धंधा फल फूल रहा हैं ,इसे देखने वाला कोई नहीं हैं। प्रत्येक दिन यहां लॉटरी के नाम पर लाखों का बाड़ा -न्यारा होता हैं ,कई लोग हारते भी हैं ,कई लोग जीतते भी हैं। इस खेल में कई गरीब तो अपना आशियाना ही उजाड़ लिये ?गुदड़ी बाजार स्थित चल रहें इस खेल में जानकारी मिल रही हैं कि करीब सात दुकानें प्रत्येक दिन सुबह सात बजे खुलती हैं और शाम के पांच छः बजे तक बंद हो जाती हैं,और यह खेल सरे आम दिन भर होता रहता हैं।
एक नंबर लॉटरी को संचालित कराने वाले बड़े बड़े और सफेद पोस हैं। गुदड़ी में नाजायज ढंग से खेला रहें व्यक्ति तो सिर्फ एक मोहरा हैं जिसे पांच सौ से एक हजार रुपया मजदूरी के रूप में दिया जाता हैं यह व्यक्ति काउंटर पर बैठकर ऑन लाइन नंबर जारी करता हैं या पर्ची देता हैं और बदले में पैसा लेता हैं ।इस खेल में गरीब लोग ज्यादा शिकार होते हैं। बताया जा रहा हैं कि दिन भर में कई बार लाटरी का नंबर निकलता हैं और बंद होता हैं। जानकार बताते हैं कि हर घंटे लॉटरी का नंबर ऑनलाइन प्रकाशित किया जाता हैं इस कारण घर बैठे कई लोग यह समझ जाते हैं कि उनके लॉटरी का नंबर फंसा हैं अथवा नहीं ?जो पढ़े लिखे लोग नहीं हैं वैसे लोग दुकान में जाकर अपनी पर्ची के नंबर को मिलाते हैं। हर एक घंटे में नंबर बदलता हैं और लोग नंबर खरीदने दुकान पर पहुंचते हैं। एक नंबर लॉटरी के असली धंधेबाज लाखों रुपये साप्ताहिक कमाते हैं और ऐश करते हैं।
जब्कि यह धंधा प्रतिबंधित हैं। करीब एक दशक पहले कई धंधेबाजों को पुलिस जेल भेंज चुकी हैं लेकिन इन वर्षों में पुलिस की और से कोइ कारवाई नहीं हुई हैं और मजे से यह धंधा खुले आम फल फूल रहा हैं। बताया जा रहा कि इस खेल के एवज में नगर थाना पुलिस की भारी भरकम वसूली होती हैं।यह वसूली प्रत्येक माह होती हैं ,क्यूंकि रकम फिक्स हैं। कई सफेद पोस इस धंधे का मास्टरमाइंड हैं जो प्रत्येक दिन या दो -तीन बार दिन भर में थाना जाता और आता हैं। इस खेल के मास्टरमाइंड को अगर पुलिस पकड़ लेती हैं तो कई घर उजड़ने से बच जाएगा।

 

यही नहीं इसके पीछे नदी किनारे बने झोपड़ी से शराब बेचने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा हैं। इसके अलावे आस पास के होटलों में चोरी -छिपे शराब की बिक्री की जाती हैं जिसपर भी पुलिस का नियंत्रण नहीं हैं।