कंप्यूटर क्लास जा रही नाबालिग छात्रा का  अपहरण,आवेदन के बाद भी थानाध्यक्ष ने नहीं की प्राथमिकी ,कई घंटे बीत जानें के बाद एसडीपीओ ने लिया संज्ञान ,फिर दर्ज हुई प्राथमिकी।

सिंहवाड़ा संवाददाता दरभंगा /

दरभंगा जिला में ऐसा लग रहा हैं कि पुलिस के वरीय अधिकारियों का इकबाल खत्म हो गया हैं।कई थानेदारों द्वारा पीड़ित के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती हैं।ऐसा लगता हैं कि पीड़ित के द्वारा आवेदन देते ही थानेदार अपना रसूख दिखा देते हैं और चिल्लाकर कहते हैं कि प्राथमिकी दर्ज नहीं करेंगे ,अगर कोई पीड़ित एसएसपी से इस बाबत शिकायत कर देता हैं तो पीड़ितों के साथ कई थानाध्यक्षों का  व्यवहार और भी कड़ा हो जाता हैं ,थानेदार पीड़ित से कहता हैं कि अब तो प्राथमिकी दर्ज ही नहीं करेंगे।दरअसल ज्यादातर थाने दलालों के सहारे चलते हैं और दलाल फैसला करता हैं कि थाने में कौन सी प्राथमिकी दर्ज करना हैं अथवा नही।

फिलहाल एक मामला सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र से आ रहा हैं जहां नाबालिग लड़की के लापता /अपहरण को लेकर जब परिजन थाना गये तो उनकी एक नहीं सुनी गई और ना ही उनके  आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज हुई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को भरवाड़ा नगर पंचायत में कम्प्यूटर क्लास पढ़ने गई नाबालिग छात्रा का अपहरण का मामला प्रकाश मे आने के बाद पीड़ित परिजनों ने सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष को आवेदन दिया था ,पीड़ित परिजनों द्वारा  दिए गये आवेदन के पन्द्रह घंटे बीतने के बाद भी किसी तरह की कारवाई नही होने पर परिजन हताश और मायूस हो गये थे।थक हारकर पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार इमरजेन्सी हेल्पलाइन एशोसियेशन नई दिल्ली के प्रमंडलीय अध्यक्ष मनोहर कुमार झा को मामले से अवगत कराया यही नहीं जनसुराज के नागरिक सहायता केंद्र सिंहवाड़ा पहुंचकर वहां भी मामले से अवगत कराया।। मामले की गंभीरता को देखकर मनोहर झा ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ज्योति कुमारी से ऐसे संवेदनशील मामले से  अवगत कराया। सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष के इस कार्यशैली को लेकर चारों तरफ चर्चा होने लगी।

हालांकि एसडीपीओ ज्योति कुमारी द्वारा सिंहवाड़ा  थानाध्यक्ष को मामले की गंभीरता से लेते हुये  तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया हैं यही नहीं अपहृता के खोजबीन को लेकर भी आवश्यक निर्देश दिये हैं , साथ ही पीड़ित परिजनों को विद्यालय का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की बात उन्होंने कहीं  हैं।

यहां बता दे कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश हैं कि आवेदन मिलते ही प्राथमिकी दर्ज करें लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की धज्जियां हर दिन उर्र रही हैं।मामला गलत हैं या सही हैं यह अनुसंधान के बाद पता चलेगा लेकिन जिले में  कई ऐसे थानाध्यक्ष विराजमान हैं जो प्राथमिकी भी नहीं दर्ज करते और उनका पीड़ितों के प्रति व्यवहार भी ठीक नहीं रहता।