जब्त नमक के चमचमाते बोरे पर बुरी नजर रखने वालों की अब खैर नहीं ?मद्य निषेध विभाग के कर्मियों ने अपना लिखित ब्यान प्रमंडलीय उपायुक्त को सौंपा ?”कुछ ना कुछ तो हैं रें बाबा”

दरभंगा /संजय कुमार राय 

16जुलाई को शराब के साथ बरामद नमक के मामले में छापेमारी दल में शामिल कर्मियों /पदाधिकारियों ने प्रमंडलीय उपायुक्त को अपना लिखित जवाब दे दिया हैं। दरअसल जब्त नमक के हेराफेरी के प्रयास में प्रमंडलीय उपायुक्त ने छापेमारी दल में शामिल सदस्यों से लिखित ब्यान मांगा था।
प्रमंडलीय उपायुक्त दीनबंधु द्वारा इस प्रकरण को गंभीरता से लिया गया था अब वें इस लिखित ब्यान से संतुष्ट या असन्तुष्ट होने के बाद अपना नोटशीट तैयार कर इस जांच से संबंधित प्रतिवेदन संयुक्त आयुक्त बिहार पटना को सौंपेंगे। अगर जांच में लापरवाही भी बरती गई होगी तो इन कर्मियों /पदाधिकारियों पर कारवाई हो सकती हैं यहां तक की बर्खास्तगी भी हो सकती हैं।
इस जब्त नमक के मामले में मद्य निषेध विभाग के छापेमारी दल में शामिल कर्मियों की मंशा ठीक नहीं रहने के कारण ही नमक के बोरे को 16चक्का के ट्रक से उतारकर पीक -अप या स्कार्पियो पर लादा गया था इस कारण इन सभी की मंशा स्पष्ट हैं ,कि चोरी की नीयत से नमक को लादा गया था ?
वहीं दूसरी ओर इस मामले में जो लापरवाही हुई या जानबूझकर की गई हैं ,इसका प्रमाण  हैं इस मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी ,जिसमें खराब नमक के बोरे की बात तो बताई गई लेकिन संख्या का जिक्र नहीं किया।जब्कि बोरा भी चमचमा रहा हैं और उसके अंदर का नमक भी।
दरभंगा के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार इस बात को गंभीरता से नहीं लिये और मामले को रफा दफा करने का मन बना लिया लेकिन संयुक्त आयुक्त बिहार पटना ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुये प्रमंडलीय उपायुक्त को जांच सौंपा।
हालांकि सहायक आयुक्त भी दबे जुबान से इन कर्मियों की लापरवाही मान रहें थे इसके बावजूद उनके द्वारा कारवाई नहीं किये जानें से मामला और भी संगीन हो गया। इन्होंने शिकायत मिलने पर भी जिस अधिकारी को जांच में भेजा ,उन्होंने जांच के दौरान अपने साथ एक पिट्ठू को लें जाकर मामले को जांच करने के बजाय रफा दफा में जुट गये और इन्हीं के अनुसार सहायक आयुक्त की बातें सामने आने लगी जो विभाग के लिये चिंताजनक हैं। जब कोई समान बरामद होता हैं तो वह सरकारी सम्पति हो जाती हैं और गलत मंशा से उसके साथ छेड़ -छाड़ की जाय तो वह आपराधिक बातें हो जाती हैं जहां लापरवाही कहने के बाद भी गुंजाईश खत्म हो जाती हैं। खैर माना जा रहा हैं कि इस मामले में कारवाई तय हैं।