“नमक प्रकरण” में दरभंगा स्थित मद्य निषेध विभाग के कर्मियों /पदाधिकारियों पर गिर सकती हैं गाज, इस पूरे प्रकरण की कर सकते हैं विभाग के आलाधिकारी जांच ,दे दिये हैं संकेत।

दरभंगा /संजय कुमार राय 

नमक के बोरी की हेराफेरी के प्रयास मामले में दरभंगा स्थित मद्य निषेध विभाग के कर्मियों /पदाधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा हैं।सूचना मिल रही हैं कि विभाग के कर्मियों /पदाधिकारी की इस हरकत के कारण विभाग के आलाधिकारी, मामले की जांच करने दरभंगा आ सकते हैं।विभाग के आलाधिकारियों ने इसके संकेत दे दिये हैं।

हालांकि इस मामले में संलिप्त अधिकारी और कर्मी इस मामले को दबाने का भरसक प्रयास कर रहें थे,कहा जाय तो जब्त नमक को बेचने की जिन कर्मियों /पदाधिकारियों द्वारा कोशिश की जा रही थी ऐसे कर्मी /पदाधिकारियों के संदिग्ध आचरण से इंकार नहीं किया जा सकता।इस मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी को गौर से देखें तो प्राथमिकी में भी झोल दिखाई पड़ता हैं।

अवर निरीक्षक मद्य निषेध विश्व मोहन पासवान के ब्यान पर जो प्राथमिकी( 491/24)दर्ज करायी गई हैं उस प्राथमिकी में 12चक्का ट्रक ,पीक अप एवं कार से विदेशी शराब की बरामदगी दिखाई गई हैं चर्चा भी की गई हैं कि ट्रक पर खराब लदे नमक के पीछे शराब के बोतल को बरामद किया गया हैं लेकिन नमक के बारे में यह चर्चा नहीं की गई कि कितने बोरे नमक को जब्त किया गया हैं।

ट्रक जब्त ,कार जब्त पीक अप जब्त हुआ लेकिन इस प्राथमिकी में नमक के बोरे को जब्त करने की चर्चा क्यू नहीं की गई ? हजारों बोरे नमक को भी जब्त किया गया हैं,प्राथमिकी में बस चर्चा हैं कि खराब नमक के बोरे के पीछे शराब की बोतल बरामद की गई हैं जब्कि  नमक के बोरे को देखने से पता चलता हैं कि बोरा फ्रेश हैं।

अगर विभाग के अधिकारियों की ही बात मान लें कि वह नमक के बोरे को नहीं बेचना चाहते थे ,पत्रकारों का आरोप झूठा हैं, तो ऐसे में सवाल उठता हैं कि 12चक्के के ट्रक से नमक उतारकर पीक अप पर क्यों लादा गया। ट्रक से बोरा खाली ही करना था तो उस बोरे को सीधे गोदाम में रखकर खाली कर दिया जाता। उसे दूसरे गाड़ी में लादने की क्या जरूरत थी। उस पीक अप के अलावे पुलिस लिखा स्कार्पियो में भी बोरा रखा था। यही नहीं कई स्थानीय लोग जब्त नमक के बोरे को लेकर भी  भाग गये और मद्य निषेध विभाग की पुलिस देखती रह गई।अगर नमक के बोरे की संख्या प्राथमिकी में दर्शायी जाती तो पता चल सकता था कि नमक की बोरियां कितनी हैं।इस प्राथमिकी के बाद जब्ती सूची में क्या जब्त नमक की संख्या दिखाई गई हैं ?अगर नहीं तो प्राथमिकी दर्ज करने से पहले नमक बेचने की मंशा स्पष्ट दिखाई पर रही हैं ?हाँ यह अलग बात हैं कि मामले को रफा -दफा करने में सभी पदाधिकारी मंशा बना लें ,कागजों की हेरा फेरी कर दे तो यह अलग बात हैं।


बताया जा रहा हैं कि 12चक्के ट्रक में 15सौ बोरे से ज्यादा नमक था जिसे सभी मिलकर बाड़ा -न्यारा करना चाह रहें थे लेकिन एन वक्त पर पत्रकारों की टीम वहां पहुंची और मामला जस का तस रह गया।


मद्य निषेध विभाग के कर्मी /अधिकारियों के इस घाल मेल को लेकर अब तो यह भी शक किया जा सकता हैं कि कागजी खेल खेलकर पकड़े गये शराब को विनष्ट कर दिया जाता होगा और शराब को बेच दिया जाता होगा ?लेकिन इस बात को हम दावे से इसीलिये नहीं कह सकते कि मेरे पास इसके प्रमाण नहीं हैं लेकिन मद्य निषेध विभाग के कर्मियों /पदाधिकारियों की  यह कार्यशैली तो यही बता रही हैं।

चर्चा हैं कि यहां तैनात कुछ कर्मियों ने तो बहूत कम दिनों में जमीन मकान भी खरीद लिया हैं ,खैर यह अलग मामला हैं इसका भी परत -दर -परत खोलेंगे।


अब इतना तो तय हैं कि नमक के बोरे को गलत नीयत से बेचने की मंशा रखने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों पर जांच तय हैं और जांच में दोषी पाये जानें वाले कर्मियों का गाज भी गिरना तय माना जा रहा हैं।