जन कवि के रूप में विश्व विख्यात बाबा नागार्जुन को पद्म पुरस्कारों से अद्यतन वंचित रखे जाने पर निराशा जताते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग– विद्या भूषण राय।

बिरौल/दरभंगा

प्रखंड के महमुदा गांव में बाबा बैद्यनाथ मिश्र यात्री ‘नागार्जुन’ के जयंती के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन मो कलाम के नेतृत्व में किया गया। जिस गोष्ठी के माध्यम से स्थानीय युवाओं से वार्तालाप हुई और बाबा के आदर्श से सम्बंधित वक्ताओं ने अपना विचार रखा और उनके द्वारा मुख्य बातों को राजनीति में अमल करने की बात कहीं।
इस अवसर पर मिथिलवादी नेता विद्या भूषण राय, जिप सदस्य धीरज कुमार झा एवं नवीन साहनी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार बैद्यनाथ मिश्र की आज जयंती है ।हिंदी में लोग इन्हें नागार्जुन और मैथिली में यात्री के उपनाम से जानते हैं।मैथिली कविता की समकालीन परिपेक्ष में यात्री जी की सृजनता की रोशनी के बिना सुबह नहीं हो सकती है। विद्यापति कालीन मैथिली की जो स्थापित शैली थी उसमें एक बड़े बदलाव का समावेश कर मैथिली कविता को नये शिखर पर ले जाने का श्रेय यात्री को ही जाता है। मैथिली कविता में आधुनिकता का प्रसार, प्रगतिवाद का स्वर, यथार्थवाद का विस्तार इनकी लेखनी की ही देन है। इनकी कविताएं समाज को नयी दृष्टि प्रदान करने में सक्षम रही है।मिथिला की शिथिलता को करारा प्रहार करते हुए कहा कि जिप सदस्य धीरज कुमार झा ने कहा कि मिथिला के सामाजिक,आर्थिक,सांस्कृतिक, राजनैतिक,शैक्षणिक, साहित्यिक और भाषा के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए मिथिला सूखा और बाढ़ का निरंतर शिकार होता आ रहा है।जहां एक और खेती चौपट हो गई है, वहीं मिथिला के मजदूर पलायन करने को विवश हो रहे हैं। चीनी मिल, पेपर मिल, जूट मिल व अन्य उद्योग – धंधे आदि यहां कबाड़ का ढेर मात्र बने हुए हैं। कृषि, उद्योग-धंधा , पर्यटन , शिक्षा एवं संस्कृति के विकास से ही इस क्षेत्र की दुर्दशा तथा बेरोजगारी का अंत हो सकता है। संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित विश्व की सबसे मधुर एकमात्र भाषा मैथिली को राज-काज की भाषा,प्राथमिक शिक्षा में अनिवार्यता।भौगौलिक,आर्थिक,ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से मिथिला के पास एक राज्य की सारी योग्यताएं हैं ।इस अवसर पर मुकुंद राय,सोनू झा ,मो.कलाम,रंजन झा,महादेब झा,सचिन कुमार, अजय कुमार, मो. मुमताज,कुंदन कुमार,शमशाद, सौरभ कुमार मौजूद थे।