दरभंगा जिला का बहेड़ा रजिस्ट्री ऑफिस बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा ,यहां तैनात कर्मियों के भ्रष्ट आचरण से क्रेता हो रहें परेशान ,जमीन के केवाला में होता हैं बड़ा खेल ?
दरभंगा जिला का बहेड़ा रजिस्ट्री ऑफिस बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा ,यहां तैनात कर्मियों के भ्रष्ट आचरण से क्रेता हो रहें परेशान ,जमीन के केवाला में होता हैं बड़ा खेल ?
दरभंगा जिला का बहेड़ा रजिस्ट्री ऑफिस बना भ्रष्टाचारियों का अड्डा ,यहां तैनात कर्मियों के भ्रष्ट आचरण से क्रेता हो रहें परेशान ,जमीन के केवाला में होता हैं बड़ा खेल ?
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा जिला का बहेड़ा रजिस्ट्री ऑफिस भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन गया हैं ।यहाँ के अधिकांश कर्मी नाजायज उगाही में लगे रहते हैं । भूमि जाँच से लेकर निबंधन कराने तक में भूमि के क्रेता का आर्थिक दोहन के साथ साथ शारीरिक और मानसिक शोषण तक होता हैं ।
निबंधन के लिये प्रस्तुत अधिकांश केवला बिना फंसे निबंधित ही नहीं होता हैं. पहले बड़ा बाबू केवला फंसने की जानकारी देते हैं ,फिर दलालों के माध्यम से बातचीत होता हैं इसके बाद केवला फ्री होता हैं , तब तक अवर निबंधक भी इधर उधर घूमते रहते हैं. ज़ब तक मामले में डील फ़ाइनल नहीं होता तब तक मजाल हैं जो रजिस्ट्रार अपनी कुर्सी पर बैठ जाय।इस खेल से जहाँ इस कार्यालय के पदाधिकारी और कर्मी मालामाल हो रहे हैं, वही सरकारी राजस्व की हानि हो रही हैं.
इस बाबत बहेड़ी थाना के सिरुआ गाँव निवासी चंद्रजीत सिंह ने दरभंगा के जिला पदाधिकारी से लिखित शिकायत कर बहेड़ा रजिस्ट्री कार्यालय के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी हैं ।
बताते चले की श्री सिंह जोरजा मोजा की दो कट्ठा खेतिहर जमीन के केवला निबंधन करवाने 11जून क़ो बहेड़ा निबंधन कार्यालय पहुचे. इनके निबंधन में कातिब का काम नरेश यादव कर रहे थे. नरेश यादव ने ठीक पूर्वहन 10 बजे निबंधन हेतु इनका दस्तावेज कार्यालय में पेश कर दिया. इनके दस्तावेज का सीरियल 50के बाद का मिला. इस पर ज़ब चन्द्रजीत सिंह ने पूछा कि अभी तो कार्यालय खुला ही हैं तो पता चला कि यहाँ निबंधन का काम 8 बजे से ही जारी हो जाता हैं. तभी चंद्रजीत सिंह क़ो लग गया कि यहाँ कि कार्य संस्कृति गड़बड़ हैं । करीब दिन के एक बजे श्री सिंह क़ो कातिब ने कहा कि चलिए अब आपका इकरार होगा. जाने पर प्रधान सहायक ने बताया कि आपका निबंध दस्तावेज फस गया हैं ।श्री सिंह के पूछने पर प्रधान सहायक ने बताया कि निबंधन में जिस जमीन के उल्लेख खेतिहर हैं, उसके भूमि जाँच प्रतिवेदन में आवासीय अंकित हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहाँ कि कार्यसंस्कृति में यही होता आया हैं कि जाँच करने वाले कर्मी क़ो प्रति जाँच 2000 हज़ार रूपये चाहिए, अगर आप नहीं देंगे तो जाँच कर्मी कार्यालय के इशारे पर उल्टा पुल्टा रिपोर्ट करेंगे ही ,भूमि के गलत प्रतिवेदन पर ज़ब श्री सिंह ने चुनौती पूर्वक कहा कि भूमि चौर में हैं और खेतिहर ही हैं तो प्रधान सहायक ने उन्हें रजिस्ट्रार साहब के पास भेज दिया. रजिस्ट्रार साहब ने मोबाइल में नक्शा दिखाते हुए बोला कि यह जमीन सड़क के किनारे हैं और इसका रिपोर्ट आवासीय में किया गया हैं. चन्द्रजीत सिंह ने ज़ब इसका विरोध किया तो रजिस्ट्रार ने उनकी एक नहीं सुनी और कहा कि आपका निबंधन नही होगा. ज़ब चन्द्रजीत सिंह ने कहा की निबंधन क्यों नहीं कीजियेगा. तब रजिस्ट्रार ने कहा की आवासीय का फी जमा कीजिए, फिर निबंधन होगा. इस शर्त पर श्री सिंह ने रजिस्ट्रार से कहा कि कोई हर्ज नहीं बशर्ते आप लिखित में आवासीय शुल्क जमा करने का निर्देश दें ।इस बात पर रजिस्ट्रार भड़क गये और कहा कि लिखित में कुछ नहीं दिया जाएगा. तब क्रेता ने कहा कि तब मेरा दस्तावेज वापस किया जाय. इस पर तो रजिस्ट्रार साहब आपा खो दिए और बोले वापस नहीं दूंगा तुम्हे जहाँ जाना हो जाओ ।बात बगड़ता देख प्रधान सहायक ने क्रेता श्री सिंह से कहा शांत रहिये मैं कोई तरकीब निकाल कर आपका काम करवाता हूं. करीब दो घंटे बाद प्रधान सहायक ने कातिब क़ो बुलाकर दस्तावेज में एक पेज अलग से लगवाया और पूर्व से लगे एक पेज क़ो निकाल कर फाड़ा. बदले गये पेज में चौहाद्दी के नीचे एक लाइन प्रधान सहायक ने लिखवाया कि इस भूमि के 200 मीटर कि त्रिज्या में कोई सड़क नहीं हैं. ऐसा लिखवाना गलत हैं. क्योंकि कच्ची सड़क 200 मीटर कि त्रिज्या में हैं. इस बदले हुए पेज में फिर से विक्रेता और गवाह से जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाया. इतना ही नहीं इस निबंधन में इकरार भी रजिस्ट्रार ने नहीं प्रधान सहायक ने ही अपनी मौजूदगी में करवाया. इस दौरान क्रेता, दिव्यांग और वृद्ध विक्रेता सहित गवाह तथा पहचान कर्ता क़ो करीब 2 घंटे तक मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया. रजिस्ट्रार और प्रधान सहायक के इस भ्रष्ट आचरण से आहत होकर चन्द्रजीत सिंह ने शपथ पूर्वक जिला पदाधिकारी दरभंगा से शिकायत की हैं ।
इस दौरान श्री सिंह ने कई दस्तावेज के फंसने की बात सुनी और डील होता देखा. पर श्री सिंह ने डील करने से साफ मना किया और सरकार क़ो राजस्व देने क़ो तैयार हो गये लेकिन रजिस्ट्रार के लिखित आदेश पर, जिसके कारण उन्हें इस भीषण गर्मी में बेवजह दो घंटा तक रोक कर परेशान किया गया और उनके दस्तावेज में मजूमन तक बदल दिया. अब देखना यह हैं कि जिला पदाधिकारी इस मामले पर कोई कार्रवाई करते हैं, या फिर क्रेता क़ो इस मामले क़ो लेकर न्यायालय की शरण में जाना होगा।
स्थानीय लोंगों का कहना हैं कि इस निबंधन कार्यालय में व्यावसायिक जमीन को आवासीय और आवासीय जमीन को खेतिहर बना दिये जानें का बड़ा खेल होता हैं इसके कारण सरकार के राजस्व का नुकसान होता हैं।इसके बदले कर्मी से लेकर पदाधिकारी तक नाजायज पैसे वसूलते हैं।