माँ के त्याग और तपस्या का ऋण चुकाया नहीं जा सकता ,माँ की भूमिका समाज मे अहम ,

महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान मे हर्षोल्लास से मनाया गया मातृ दिवस।

दरभंगा /शिक्षा संवाददाता 

बहादुरपुर प्रखंड के बाजीतपुर स्थित महात्मा गांँधी शिक्षण संस्थान में “मातृ दिवस” हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ पुतुल सिंह, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, एमo आर o एम o महिला महाविद्यालय दरभंगा, विद्यालय की शैक्षणिक निदेशिका डॉ प्रभा मल्लिक, प्रबंधक संजीव कुमार, प्राचार्य अशोक राय एवं प्रशासक अजय झा के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

डॉ प्रभा मल्लिक ने मुख्य अतिथि का स्वागत मिथिला परंपरा अनुसार पाग, चादर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया। अपने स्वागत भाषण में आगत अतिथियों के स्वागत के साथ मातृ दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मांँ की भूमिका समाज में खास है। उनकी त्याग और तपस्या के ऋण को चुकाया नहीं जा सकता।

मुख्य अतिथि ने इस दिवस के महत्व को बताते हुए कहा कि मांँ और बच्चों के आपसी मिलन से बच्चे ऊर्जावान और संस्कारवान होते हैं। हम माताओं का यह दायित्व बनता है कि हम बच्चों को उतनी ही आजादी दें जितना समाज की दृष्टिकोण से सही है। हम उनको आजादी देने के साथ-साथ उन पर नजर भी रखें कि हमारे बच्चे उस आजादी का कहीं नाजायज फायदा तो नहीं उठा रहे, कहीं वह गलत दिशा की ओर तो नहीं जा रहे हैं । उन्होंने बच्चों को अपनी माता से लिपटकर *आई लव यू मांँ* कहलवाया, जिससे कि पूरा माहौल भाव विभोर हो गया। इस दिन के महत्व को उन्होंने बखूबी बच्चों को बतलाया और बच्चों का क्या उत्तरदायित्व बनता है समाज के लिए यह भी बतलाया।

इस अवसर पर विद्यालय के सभी बच्चों की माताएंँ आमंत्रित थीं। माताओंं ने इस आयोजन में अपनी उत्साहपूर्ण सहभागिता दिखाई। साथ ही कई माताओं ने भी अपनी उद्गार व्यक्त की।

इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक बिनोद कुमार झा ने भी बच्चों को मांँ से संबंधित बहुत सी बातें बतलाई। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में कुछ श्लोक के माध्यम से भी मांँ के महत्त्व को बतलाया। विद्यालय के प्रशासक अजय झा ने भी अपने भाषण में बच्चों को मांँ के महत्त्व के बारे में बहुत सी बात बातें बतलाई। इस अवसर पर बच्चों ने भी मांँ के लिए अनेक कविताएं, कहानियांँ तथा नृत्य प्रस्तुत किये, जो मांँ को ही समर्पित था।
विद्यालय के प्राचार्य अशोक राय ने अपने धन्यवाद ज्ञापन से पहले मांँ के महत्त्व को बतलाते हुए कहा कि मांँ शब्द ही अपने आप में परिपूर्ण है। मांँ के बिना इस सृष्टि में कुछ भी संभव नहीं है। मांँ हमेशा अपने बच्चों की भलाई के लिए त्याग करती हैं। वह हर हालत में अपने बच्चों को सुखी देखना चाहती हैं। मांँ की परिभाषा देना दुर्लभ है, क्योंकि सृष्टि का संपूर्ण भाग, संपूर्ण बातें मांँ में ही समाई हुई हैं। इसलिए मांँ का वर्णन कर पाना नामुमकिन है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक आशुतोष कुमार झा, मनीष कुमार, शंकर कुमार विद्यार्थी, कविता पटेल, गजेन्द्र कुमार सिंह, रोहित कुमार मिश्र, राम सुरेश मिश्र, कृष्ण कुमार, कुमारी कमला ठाकुर, तलत परवीण, इप्शिता स्नेही, अहमद हुसैन, राजीव रंजन कुमार, राम अशीष पासवान, काजल कुमारी आदि का सहयोग सराहनीय रहा।राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

 

महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमेन हीरा कुमार झा ने कहा कि माँ का दूसरा रूप साक्षात ईश्वर के बराबर हैं।उन्होंने कहा कि सृष्टि निर्माण से लेकर बच्चों के संरक्षण मे माँ की भूमिका का वर्णन नहीं किया जा सकता।उन्होंने विस्तार से माँ का चरित्र -चित्रण किया।