दरभंगा। सिन्धी मातृभाषा दिवस के अवसर पर दरभंगा के पूज्य सिन्धी पंचायत द्वारा “व्यक्तित्व के विकास में मातृभाषा का योगदान” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन झूलेलाल मंदिर, कटहलबाड़ी, दरभंगा में किया गया। इस मौके पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा कि मानव की विकास प्रक्रिया में मातृभाषा का सर्वाधिक योगदान होता है। यह मानवीय भावनाओं को सहजता एवं पूर्णता से व्यक्त करने का एक बेहतरीन माध्यम है। इसका हमारे जीवन में सर्वाधिक महत्व होता है। उन्होंने बताया कि भारत में 19,500 से अधिक भाषाएं एवं बोलियां मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं, जिनमें करीब 2,900 मातृभाषाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं। वहीं पूरे विश्व में हर 14 दिन में कोई न कोई एक भाषा विलुप्त हो रही है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक रवि शंकर ने कहा कि मातृभाषा सहजता से ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ज्ञान को हस्तांतरित कर देती है। अध्यक्षीय संबोधन में सिन्धी समाज के वरीय सदस्य जयकिशन लाल ने कहा कि सिन्धी मातृभाषा की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से भी लड़ाइयां लड़ी थीं। जब सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई हुई तो अंग्रेजों को भी आश्चर्य हुआ कि यह 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता पूरी तरह आधुनिक शहरी रूप में थी। इस मौके पर दिनेश गंगनानी, जगत लाल जुमनानी, डॉ. अंजू कुमारी, राजकुमारी मारीवाला, हर्ष कुमार, विजय कुमार, महेश कुमार अटवाणी, कमल मेलवानी, प्रणव नारायण, सिद्धूमल बजाज, किशन कुमार बजाज, जयराम दास, जीवन दास लखमानी, रमेश लाल, नानक होईयानी, अशोक कुमार लखमानी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पवन कुमार टेकचंदानी और धन्यवाद ज्ञापन राजकुमार मारीवाल ने किया।