“वोट बहिष्कार “का मन बना चुका हैं पूरा गांव,चुनाव के दौरान नेताजी आकर बड़का -बड़का भाषण दिये ,लेकिन आजादी के वर्षों बाद भी अब तक नहीं बन सका गांव मे एक विद्यालय भवन।
“वोट बहिष्कार “का मन बना चुका हैं पूरा गांव,चुनाव के दौरान नेताजी आकर बड़का -बड़का भाषण दिये ,लेकिन आजादी के वर्षों बाद भी अब तक नहीं बन सका गांव मे एक विद्यालय भवन।
“वोट बहिष्कार “का मन बना चुका हैं पूरा गांव,चुनाव के दौरान नेताजी आकर बड़का -बड़का भाषण दिये ,लेकिन आजादी के वर्षों बाद भी अब तक नहीं बन सका गांव मे एक विद्यालय भवन।
प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान।
एक गांव ऐसा भी जहां आजादी के बाद से अब तक नही बन सका हैं एक विद्यालय भवन ।इस कारण तपती धूप और बारिश मे खुले आसमान के नीचे बच्चे पढ़ने के लिये विवश हैं।चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधि आयें ,आश्वासन दिये लेकिन यह सपना ही रह गया ?
दशकों बाद भरडीहा गांव ऐसा ही ?
जी हां हम बात कर रहैं हैं कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड मुख्यालय से सटे केवटगामा पंचायत के भरडीहा गांव का। इस गांव की आबादी करीब लगभग पांच हजार हैं लेकिन यहां के लोग आजादी के बाद से अब तक सिर्फ समस्याओं को ही झेल रहें हैं।इसमे एक बड़ी समस्या गांव में विद्यालय भवन का होना नहीं है। खुले आसमान के नीचे इस चिलचिलाती धूप में बच्चे पढ़ने जाते है। ग्रामीण एवं शिक्षक के सहयोग से एक झोपड़ी का विद्यालय बनाया गया। विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर कई बार प्रधानाध्यापक द्वारा विभाग को पत्र लिखा गया साथ ही ग्रामीणों ने भी सामुहिक आवेदन दिया पर विभाग इस तरह सोया हुआ है कि उसके कान में जूं तक नही रेंगा।ग्रामीणों का कहना हैं कि ऐसे मे सरकार के द्वारा विकास की बात करना पूरी तरह से बेईमानी हैं।
चार शिक्षकों के माथे पर 203छात्र
प्राथमिक विद्यालय भरडीहा में कुल 203 छात्र नामांकित है और चार शिक्षक इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्यरत है। लेकिन विद्यालय का अपना कोई भवन ही नही है। जानकर बताते है कि दर्जनों बार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला मुख्यालय तक पत्र लिखा गया इसके बाबजूद आज तक भवन नही बन पाया है। स्थानीय ग्रामीण बताते है कि जब तक मौसम ठंढा रहता है तब तक बच्चे विद्यालय में रहते है जैसे ही धूप बढ़ती है बच्चे विद्यालय छोड़कर चले जाते है। क्योंकि जो झोपड़ी बनी है उसमें तो मिड डे मील बनता है तो छात्र कहां बैठकर पढेंगे।
विकास की बात करना बेईमानी
ग्रामीण बताते है कि तत्कालीन सांसद प्रिंस राज से लेकर शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को पत्र के माध्यम से विद्यालय भवन को लेकर अवगत कराया गया। कोई भी यहां की समस्याओं को समझने के लिए तैयार नही है। आज भी हमारे गांव के बच्चे धूप में बैठकर पढ़ते है। जिस सुशासन के राज में विद्यालय का भवन ही ना हो और छात्र बोड़ा बिछाकर धूप में बैठकर पढ़ रहा हो उस राज्य में विकास का दावा करने वाली सरकार की मंशा को समझा जा सकता है।
वोट का कर सकते हैं बहिष्कार
बता दें कि यहां सिर्फ विद्यालय का भवन नही होना ही समस्या नही है। इस गांव की पांच हजार आबादी कई समस्याओं को झेल रही है। अब इस गांव के लोग वोट वहिष्कार करने की बात कर रहे है।
वोट वहिष्कार की बात जानने के लिए दस्तक7 की अगली कड़ी।
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