बेहतर पुलिसिंग के लिये कई चालकों की कार्यशैली पर उठ रहें है प्रश्न ,सरकारी चालक की कमी का बोझ ढो रहें है कई थानाध्यक्ष ?सूचनाओं के आदान प्रदान करने मे कई चालक की भूमिका संदिग्ध।
बेहतर पुलिसिंग के लिये कई चालकों की कार्यशैली पर उठ रहें है प्रश्न ,सरकारी चालक की कमी का बोझ ढो रहें है कई थानाध्यक्ष ?सूचनाओं के आदान प्रदान करने मे कई चालक की भूमिका संदिग्ध।
बेहतर पुलिसिंग के लिये कई चालकों की कार्यशैली पर उठ रहें है प्रश्न ,सरकारी चालक की कमी का बोझ ढो रहें है कई थानाध्यक्ष ?सूचनाओं के आदान प्रदान करने मे कई चालक की भूमिका संदिग्ध।
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा जिला के थानों मे काम कर रहें गाड़ी चालकों को लेकर सवाल खड़े हो रहें है ,सवाल यही कि कई चालक एक ही थाने मे कई वर्षों से पदस्थापित है इस कारण थाना क्षेत्र के इलाकों मे सभी तरह के अवेध रूप से काम कर रहें लोंगों के बारे मे इन्हें जानकारी है और उनसे सांठ -गांठ भी ,इस कारण पुलिसिया कामों मे कई अड़चन ये पैदा करते है। सूत्रों की माने तो ये चालक थाना पुलिस की सूचना भी लीक करता है इस कारण काम करने वाले कई थानाध्यक्षों को दिक्कत हो रही है।सूत्र यह भी बताते है कि कई ऐसे थानाध्यक्ष ऐसे भी है जो इन चालकों का इस्तेमाल दलाली के रूप मे उपयोग करते है।
मजेदार बात यह है कि कई थानों मे चालकों के कमी रहने के कारण प्राईवेट चालक थाने की गाड़िया चला रहें है और इसका वेतन सरकार नहीं बल्कि थानेदार दे रहें है। अब यहां सवाल यही है कि क्या थानेदार इन चालकों का वेतन क्या अपने वेतन से दे रहें है ?चुकी सरकार कई मामलों मे अब भी पुलिस को पर्याप्त संसाधन नहीं दे रही है ?राज्य के सभी जिलों मे चालकों की कमी है और प्राईवेट चालकों के सहारे थाना चल रहा है। ऐसे मे कई प्राईवेट चालक थानेदार से कम खुद को नहीं आंकता है और इसके आड़ मे चलता है दलाली का विशाल रूप ?
अगर हम दरभंगा जिले की बात करें तो कुल थाना और ओपी मिलाकर 38थाने /ओपी है। कई थाना मे तो तीन तीन पुलिस गाड़िया है वहीं ओपी मे ज्यादातर दो गाड़िया है। इन थानों /ओपी एवं जिला के तमाम पुलिस पदाधिकारियों के लिये जिले को 254चालकों की आवश्यकता है इसमें 207सिपाही चालक का पद स्वीकृत है इसमें तकरीबन 88ही सरकारी सिपाही चालक है वहीं हवलदार चालक का 47पद स्वीकृत है जब्कि मात्र एक चालक है।
सरकार द्वारा दिये गये चालकों मे कई चालक ऐसे भी है जो अपने कार्य को पुलिसिया कार्यशैली मे ईमानदारी से निभाते है वहीं कई चालक ऐसे है जो थाना क्षेत्र मे हो रहें गलत कार्यों मे संलिप्त हो जाते है और मासिक वसूली अवैध रूप से करते है। थानों की मजबूरी है कि चालक के स्वीकृत पद के अनुरूप एक या दो ड्राईवर सरकारी मिल जाते है पर चालकों के कमी के कारण उन्हें निजी चालकों से काम चलाना पड़ता है इनमें से कई ऐसे भी है जो शराब माफियाओं से ताल्लुक रखते है और नियम विरुद्ध इलाकों मे चल रहें कार्यों मे संलिप्त रहते है और इसके कारण उनकी तो बल्ले -बल्ले। ऐसे मे इन चालकों को भी समय समय पर स्थानांतरण करना वरीय पुलिस पदाधिकारियों की जवाबदेही है ताकि थाना पर दलाली प्रथा हावी नहीं हो ?