बिरौल में प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों को दिया गया दो दिवसीय प्रशिक्षण।डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा की ओर से दिया गया प्रशिक्षण।

बिरौल/दरभंगा

कृषि विज्ञान केंद्र जाले की ओर से बुधवार को बिरौल के कृषि अनुसंधान केंद्र में प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. पवन कुमार शर्मा ने उपस्थित किसानों को मुख्य रूप बिजामृत,जीवामृत,आग्नेयास्त्र,ब्रह्मास्त्र एवं नीमस्त्र बनाने की विधि एवं इसके फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दिये। प्रशिक्षक ने किसानों से कहा कि प्राकृतिक खेती का इस्तेमाल कर हम अपने भूमि को बंजर होने से भी बचा सकते हैं। स्थानीय अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. साजिद हुसैन ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि आने वाले समय में रासायनिक खाद के उपयोग से खेती करने पर होने वाले शारीरिक समस्या को प्राकृतिक खेती से उसे रोका जा सकता है। प्रशिक्षक ने बताया कि पुरे जिले में 400 किसानो को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा की ओर से प्रशिक्षण दिया जाना है।जिसमें बिरौल में 40 किसानों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देकर अपने क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की प्रचार प्रसार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मौके पर स्थानीय अनुशंधन संस्थान के कई कर्मी मौजूद थे।