भारत की बेटियां किसी भी क्षेत्र मे पुरुषों से नहीं है कम ,दे रही है महिला सशक्तिकरण की मिशाल।कोई फ़ाईटर प्लेन उड़ा रही है तो कोई सीमा पर दुश्मनों को खदेड़ रही।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कई संगठनों ने मनाया महिला दिवस ,
भारत की बेटियां किसी भी क्षेत्र मे पुरुषों से नहीं है कम ,दे रही है महिला सशक्तिकरण की मिशाल।कोई फ़ाईटर प्लेन उड़ा रही है तो कोई सीमा पर दुश्मनों को खदेड़ रही।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कई संगठनों ने मनाया महिला दिवस ,
भारत की बेटियां किसी भी क्षेत्र मे पुरुषों से नहीं है कम ,दे रही है महिला सशक्तिकरण की मिशाल।कोई फ़ाईटर प्लेन उड़ा रही है तो कोई सीमा पर दुश्मनों को खदेड़ रही।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कई संगठनों ने मनाया महिला दिवस ,
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा जिला मे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कई संगठनों ने इस दिवस को बड़े धूमधाम से मनाया, इस दौरान लोंगों ने अपने अपने तरीके से महिलाओं के प्रति आभार जताते हुये महिलाओं को सम्मान बढ़ाया।
कहते है कि
हजारों बूंद चाहिये एक समुन्दर बनाने के लिये ,सेंकड़ों फूल चाहिये एक माला बनाने के लिये ,एक स्त्री ही काफी है घर को स्वर्ग बनाने के लिये।
जी हाँ एक स्त्री से ही सृष्टि का निर्माण होता है।
युग के साथ साथ महिलाएं भी अपनी भागीदारी समझ रही है और आत्मनिर्भर भी हो रही है।
महिलाएं कमजोर तब होती है जब निर्भया जैसे कांड मे आरोपी को सजा देने मे वक्त लग जाय ,जब किसी बच्ची के साथ बलात्कार हो या फिर एसिड कांड हो जाय और उसे सजा देने मे वर्षों लग जाय।
लेकिन अब महिलाएं कंधे से कंधे मिलाकर चल रही है। खुद को अब महिलाएं समझने लगी है और ताकत का एहसास भी करा रही है जब कोई महिला मिस इंडिया बनती है ,आईपीएस किरण बेदी बनती है ,वित्तमंत्री जैसे महत्वपूर्ण कुर्सियों पर बैठती है जब भावना कस्तूरी आरोही जैसे महासागर को पार कर देश के लिये झंडा फहराती है ,फ़ाईटर प्लेन उड़ाती है तब लगता है कि महिलाओ की शक्ति किसी से कम नहीं है।
इतिहास के पन्नों को याद कीजियेगा तो कभी पांच पतियों की पत्नी रहती है तो कभी उसे जुओं मे हार जाता है। सहनशक्ति की मिशाल भी बेटियां है। हर दुख ,गम को खुद मे समेट लेती है और विशाल हृदय का मिशाल देती है। जगत जननी है तो कभी काली का रूप भी है।
नारियों को जिस घर मे पूजा जाता है वहां कहते है कि भगवान का वास् होता है।
दरभंगा जिला की बात करें तो आईपीएस शोभा अहोतकर ,निर्मला कौर ,के एस अनुपम ,गरिमा मल्लिक और अब काम्या मिश्रा भी महिला सशक्तिकरण की मिशाल है। इनकी कठिन तपस्या और समाज के बीच कानून व्यवस्था कायम करने मे अहम भूमिका निभा रही है देश मे ऐसे आईपीएस और कितने आईएस है। बेटियां कमजोर नहीं होती हमारे समाज के कुछ लोग उन्हें कमजोर करने मे कोई कसर नहीं छोड़ते। फिर भी ये बेटियां कभी माँ तो कभी बेटी,पत्नी ,बहन कई रूप मे सामने आती है और दुनियां का सारा दुख समेटे हुये घर को स्वर्ग बनाने मे कोई कसर नहीं छोड़ती।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हरिबोल तालाब के पास महिलाओं हेतु पिंक शौचालय की शुरुआत की गई। नगर निगम की दर्जन भर महिला एवं सफाईकर्मी उपस्थित थी, जिन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया। वार्ड 21 की पूर्व पार्षद मधुबाला सिन्हा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उपस्थित सभी महिला सफाईकर्मियों का सम्मान किया।
शहर से लेकर गांव तक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को धूमधाम से मनाया गया। कहीं निर्धन बच्चियों को वस्त्र दिया गया।
वहीं महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार भी संकल्पित है। बच्चियों को साईकिल देकर स्कूल भेजवाया वहीं कई महिलाओं के विकास के लिये योजना मुहैया कराया ताकि महिलाएं आत्म निर्भर हो सके। यही नहीं रोजगार मे भी आरक्षण देकर 33प्रतिशत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। राज्य के सभी विभाग अंतर्गत कार्यालय मे महिलाएं भागीदारी दे रही है। दरभंगा जिला मे कई महिलाएं थानेदारी जैसी भूमिका निभा रही है। आरक्षण के हिसाब से 13थाना /ओपी मे महिलाएं थानेदार थी लेकिन वर्तमान परिस्थिति मे कई को एसएसपी द्वारा हटा दिया गया लेकिन कुछ थाने ओपी मे महिलाएं भागीदारी निभा रही है। फेंकला ओपी प्रभारी तृषा शैनी ने महिलाओं के एक कार्यक्रम मे अपनी महती भूमिका निभाते हुये यह जता दिया है कि महिला भी पुरुषों से कम नहीं है।
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