नेहरा ओपी क्षेत्र से बरामद गोली ,पिस्टल और शराब के बरामदगी के मामले मे पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान ,मिथिला क्षेत्र के डीआईजी को लिखा पत्र,दस्तक 7के खबर का असर।

दरभंगा /संजय कुमार राय

मनीगाछी थाना क्षेत्र के नेहरा ओपी अंतर्गत रामनगर गांव मे परवेज के गैरेज के छत से पिस्टल ,गोली और शराब बरामदगी के मामले मे बिहार पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले मे मिथिला क्षेत्र के डीआईजी को पत्र के माध्यम से कहा है कि अपने स्तर से इसकी जांचकर कारवाई करें एवं कारवाई से संबंधित जानकारी पुलिस मुख्यालय को दे।

इस मामले मे दस्तक 7ने खबर छापी थी ,जिसे पुलिस मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है।

दरअसल मनीगाछी थाना क्षेत्र के नेहरा ओपी अंतर्गत रामनगर गांव मे एक छत से कुछ दिन पहले बरामद पिस्टल ,गोली शराब की बरामदगी दरभंगा पुलिस ने की थी।
इस बाबत रामनगर गांव के स्व मों मुख्तार के पुत्र मों परवेज आलम ने एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी को आवेदन देकर न्याय के लिये गुहार लगाया था । मों परवेज ने एसएसपी को दिये आवेदन मे कहा था कि एक वकील के अलावे अब्बु मोहम्मद ,चक्का गांव के कौशलेंद्र यादव ,रामनगर गांव के ही अब्दुल कादिर के पुत्र मों राजू ,शत्रुघ्न साव एवं मों मेराज यें सभी शराब माफिया है जिनके ताल्लुक तात्कालीन थानाध्यक्ष सत्य नारायण पाण्डेय है। परवेज का आरोप यह भी है कि जब नेहरा ओपी के ओपी अध्यक्ष सत्य नारायण पांडेय थे तो उस वक्त अब्बु मोहम्मद से चार चक्का गाड़ी किराए पर लेकर थाना मे गाड़ी चलवा रहें थे। परवेज का आरोप है कि तात्कालीन ओपी प्रभारी के तालमेल से नेहरा ओपी मे शराब का धंधा फल -फूल रहा था जिसमें चालक अब्बु मोहम्मद समेत अन्य की संलिप्ता थी।परवेज का कहना है कि तात्कालीन थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय के वहां से बदली होने पर नये ओपी अध्यक्ष सुमन कुमार को जब इस बात की जानकारी मिली तो अब्बु मोहम्मद को गाड़ी समेत थाना उसे थाना से हटा दिया। मों परवेज ने कहा कि इसके बाद उक्त ओपी अध्यक्ष श्री सुमन ने उसकी गाड़ी को ओपी मे भाड़े पर लिया और ओपी अध्यक्ष ने शराब माफियाओं के विरुद्ध अभियान चला दिया। इस कारण सभी लोग उसे दुश्मन समझने लगे। परवेज का आरोप है कि इस कारण सबो का धंधा बंद हुआ लेकिन उसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। परवेज ने कहा कि एक साजिश के तहत यें सभी मिलकर मेरे गेरेज़ के छत पर एक बोरे मे पिस्टल गोली और शराब रख दिया और नेहरा पुलिस को खबर नहीं देकर सीधे दरभंगा के टेक्निकल सेल को खबर कर दिया।उसके घर नेहरा ओपी की पुलिस नहीं बल्कि दरभंगा की पुलिस टीम सीधे पहुंची और घर की तालाशी नहीं लेकर सीधे छत के ऊपर से बोरा उतारा। उक्त बोरे मे पिस्टल गोली समेत शराब था। जिस वक्त पुलिस पहुंची उस वक्त परवेज ने कहा कि पूरा दिन वह ओपी अध्यक्ष के साथ था।उसने दिये आवेदन मे कहा है कि एक साजिश के तहत सभी मिलकर उसे फंसा दिया है। परवेज ने कहा कि इस कारण मेरे माँ का ब्रेन हेमरेज हुआ और 15दिनों के बाद ही उसकी माँ मर गई। परवेज ने कहा है कि उसकी माँ का हत्यारा वास्तव मे ये लोग है। उसने कहा ना साजिश के तहत उसे फंसाया जाता ना उसकी माँ मरती।
परवेज ने इस मामले मे निष्पक्ष जांच कर कारवाई के लिये एसएसपी से अनुरोध किया है  ,लेकिन एसएसपी के स्तर से अब तक जांच की कारवाई नहीं हुई है ?
दरभंगा पुलिस के टेक्निकल सेल की पुलिस जब पिस्तौल ,गोली और शराब उस छत से बरामद की तो टेक्निकल सेल के पुलिसकर्मियों को भी यह महसूस हुआ कि परवेज के छत पर इन सामानो को रखकर उसे फंसाने की साजिश की गई है। इस कारण जो प्राथमिकी ओपी मे दर्ज हुई उसमें कोई नामजद नहीं हुआ नहीं तो अक्सर ऐसे मामलों मे घर के मालिक और सदस्यों को आरोपित कर देती है। इस मामले मे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर टेक्निकल सेल के पुलिस कर्मियों को
परवेज के घर पर शराब पिस्टल और गोली रखने की पहली सूचना किसने दी थी। सूचना देने वाला ही इस मामले का साजिशकर्ता है। एसएसपी को इस मामले मे टेक्निकल सेल के कर्मियों से पूछताछ करनी होगी ?उन्हें पता करना होगा कि फोन करने वाला शक्स कौन था। हालांकि परवेज स्पष्ट रूप से दावा ठोंककर कहता है कि यह फोन करने वाला कोई और नहीं नेहरा ओपी के तात्कालीन थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय ही है ?परवेज का कहना है कि उनके द्वारा ही साजिश रची गई और टेक्निकल सेल को फोन किया गया ?लेकिन जांचों उपरांत ही यह कहा जा सकता है कि इस मामले मे आखिर दोषी कौन है ?