नेहरा ओपी के तात्कालीन ओपी अध्यक्ष की भूमिका पर आईजी ने उठाया था सवाल ,आईजी को अब तक नहीं मिला स्पष्टीकरण का जवाब ,ऐसे पुलिस पदाधिकारी बन गये एसएसपी के गोपनीय रीडर।

दरभंगा /संजय कुमार राय 

नेहरा ओपी के तात्कालीन थानाध्यक्ष की हनक के क्या कहने ?इनके सामने तो जिला के तमाम वरीय पुलिस पदाधिकारी भी बौने दिखाई पड़ते है। इनकी पैरवी कहें या इनकी पहुंच ,नेहरा ओपी से जब इन्हें हटाया गया तो पुलिस लाइन के महत्वपूर्ण कुर्सी पर विराजमान हो गये और यहां भी यें कम नहीं थे ,इनकी रसूख इतनी थी कि जो मन हुआ सो किये।

पुलिस लाइन मे लाइन बाबू 1 के रहते इनके अनगिनत किस्से है ?इनकी गलत कार्यशैली से कई पुलिसकर्मियों को कोपभाजन बनना पड़ा है।अब तो फिर इनकी किस्मत खुल गई है और यें एसएसपी के गोपनीय रीडर बन गये। इनके क्या कहने ,इनकी तो बात ही निराली है।

जी हाँ फिलहाल हम बात कर रहें थे नेहरा ओपी मे दर्ज कांड 177/22के बारे मे ,जिस कांड मे गृह रक्षक चालक होमगार्ड के जवान तेज नारायण सिंह की हत्या भीड़ द्वारा कर दी गई थी। इस कांड मे एक कड़ी और थी और वह थी अनीता देवी।  इस कांड मे उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था ,जेल मे ही उस निर्दोष एवं प्रताड़ित महिला की मौत हो गई थी।
इस दर्ज कांड मे काफी हाय -तौबा मचा था लेकिन वह कागजों मे सिमटकर रह गया।
इस मामले की बार बार शिकायत मिलने पर बिहार पुलिस मुख्यालय से जवाब -तलब किया गया,इस आलोक मे  तात्कालीन आईजी ललन मोहन प्रसाद ने इस मामले की जांच की और जांचोपरांत तात्कालीन आईजी ने नेहरा के पूर्व थानाध्यक्ष सत्य नारायण पाण्डेय को कई निर्देश देते हुये कारवाई के लिये कहा और दिशा निर्देश लेने के बाद इस कांड मे आरोप पत्र समर्पित करने को कहा था उन्होंने कहा था कि आरोप पत्र समर्पित करने से पहले दिशा निर्देश लेकर आगे की कारवाई करें।लेकिन आनन फानन मे नेहरा के तात्कालीन थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय ने आरोप पत्र समर्पित कर दिया। जिसे लेकर तात्कालीन आईजी श्री प्रसाद ने नाराजगी व्यक्त करते हुये स्पष्टीकरण की मांग की थी। आईजी ने तात्कालीन थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय की इस कार्यशैली को लेकर एसएसपी को पत्र लिखा था ।तात्कालीन एसएसपी अवकाश कुमार ने नेहरा ओपी के तात्कालीन थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय के विरुद्ध जांच कर कारवाई का निर्देश पूर्व के सिटी एसपी सागर कुमार झा को दिया था लेकिन यह मामला आज तक मौन है।
दरअसल आईजी के पर्यवेक्षण टिप्पणी मे कहा गया था कि किसी भी आरोपी के विरुद्ध ठोस साक्ष्य आवश्यक है। आईजी ने कहा था कि ठोस साक्ष्य मिलने के बाद ही अभियुक्तिकरण के बिंदु पर निर्णय लेना श्रेयकर होगा।
लेकिन पुलिस सूत्र का कहना है कि इस बिंदु पर स्पष्टीकरण का जवाब आजतक आईजी कार्यालय को नहीं मिला और पूरा मामला ठंडे बस्ते मे चला गया।
चर्चा है कि इस मामले मे नेहरा के तात्कालीन थानाध्यक्ष की  भूमिका संदिग्ध है।