पुलिस मुख्यालय के आदेश के बावजूद जिला /इकाई के एसपी ने पुलिसकर्मियों के पत्र की कर दी अनदेखी ,

कोई यहां तो कोई वहां ?नौकरी के बचे दो साल वाले पुलिसकर्मियों /को भी नहीं मिला उनका गृह /ऐच्छिक जिला ?

दरभंगा /संजय कुमार राय 

स्थानांतरण /पदस्थापन को लेकर पुलिस मुख्यालय के आदेश के बावजूद पुलिस मुख्यालय के निर्देशों को बिहार के सभी जिला /इकाई मे पदस्थापित एसपी ने अनदेखी कर दिया है ­इस कारण पुलिस पदाधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई है।

वेसे पुलिसकर्मी /पदाधिकारी भी प्रताड़ित है जो सेवानिवृति के कगार पर है और उन्हें कही दूर पदस्थापित कर दिया गया है। सभी जिला के एसपी /रेल एसपी एवं अन्य इकाई मे ऐसा देखने को मिल रहा है। रेल मे तैनात कई पुलिसकर्मी /पदाधिकारियो ने एसपी को पत्र देकर अनुरोध किया कि उनकी सेवा विभाग मे दो वर्ष या उससे कम है ऐसे मे उन्हें गृह जिला या ऐच्छिक जिला मे पदस्थापित किया जाय लेकिन कोई भी एसपी ने दिये गये पत्र को पुलिस मुख्यालय को अग्रसारित नहीं किया इस कारण ऐसे पुलिसकर्मी /पदाधिकारियों की मुश्किल बढ़ी हुई है। पुलिस मुख्यालय के पुलिस महानिरीक्षक ने अपने पत्र मे स्पष्ट रूप से इस बाबत पत्र के माध्यम से सभी एसपी /एसएसपी /डीआईजी /आईजी को पत्र से अवगत कराया था कि यदि किसी कर्मी को किसी प्रकार की कठिनाई एवं स्थानांतरण के संबंध मे अनुरोध करना है तो नव पदस्थापन जिला मे योगदान करने के बाद संबंधित पुलिस अधीक्षक /डीआईजी /आईजी के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को पत्र 15दिनों के भीतर समर्पित करें।
नवपदस्थापन जगहों पर योगदान के बाद जीतने भी ऐसे पुलिसकर्मी थे उन्होंने संबंधित एसपी को पत्र दिया लेकिन इनका पत्र जिला /इकाई मे धूल फांकते रह गया इस कारण ऐसे पुलिसकर्मी बैचेन हों गये है।
डीजीपी आरएस भट्टी का संस्मरण दिवस पर दिये गये ब्यान के बाद पुलिसकर्मियों /पदाधिकारियों के बीच खुशी का माहोल था लेकिन यह बातें जमीन पर नहीं उतर पायी। डीजीपी आर एस भट्टी ने कहा था कि आवासन योजना के तहत अब पति -पत्नी अपने परिवार और बच्चों के साथ एक स्थान पर रह सकेंगे साथ ही ट्रांसफर और पोस्टिंग की नीति मे बदलाव किया जा रहा हें। लेकिन पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर भी हों गया और पोस्टिंग भी हों गई लेकिन पति -पत्नी एक दूसरे से अलग हों गये, कोई राज्य के एक छोर मे तो दूसरा दूसरे छोर मे योगदान देकर सरकारी आदेश का पालन तो कर लिया लेकिन इनके बच्चे कहाँ जाय ?
अभी भी कई पुलिसकर्मियों के बच्चे पूर्व के जिला मे हें और माँ बाप नदारत हें।
बिहार पुलिस मुख्यालय ने यह भी आदेश दिया था कि ऐसे पति -पत्नी को अगर अलग अलग जिला मे पोस्टिंग हों गई हें तो 16फरवरी तक अपना आवेदन एसपी के माध्यम से पुलिस मुख्यालय भेजे ऐसे आवेदनों पर सरकार विचार करेगी।
बिहार का कोई ही जिला बचा हें जहां ऐसे पीड़ित पुलिसकर्मी /पदाधिकारी एसपी को आवेदन नहीं दिया हों ?लेकिन ऐसे आवेदनों को एसपी द्वारा पुलिस मुख्यालय को अग्रसारित नहीं किया गया हें ऐसे मे स्थानांतरित /पदस्थापित पुलिसकर्मियों के आवेदन पर आखिर कौन विचार करेगा ?पत्नी मोतिहारी तो पति गोपालगंज मे हें। किसी का पति समस्तीपुर मे हें तो पत्नी पटना मे। ऐसे मे इन पुलिसकर्मियों /पदाधिकारियों से बेहतर पुलिसिंग का सोच रखना भी बेईमानी हें। यही नहीं इन्हें अपने अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर समस्या उत्पन्न हों गयी हें। अपने परिवार के साथ रहना इन्हें मुश्किल हों गया हें। पुलिस मुख्यालय को ऐसे पुलिस पदाधिकारियों की कठनाईयों पर विचार करना चाहिये ?