अंकों के खेल मे आईजी कार्यालय के पुलिस कर्मियों को महारत हासिल ,जिसे बनाना था इंस्पेक्टर उसे अंकों मे छोड़ा पीछे ,जिसे रखना था  दारोगा उसे बना दिया इंस्पेक्टर।

दरभंगा /संजय कुमार राय की रिपोर्ट 

मिथिला क्षेत्र के आईजी कार्यालय मे वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों की कार्यशैली हद से पार हो गई हैं ,इन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं हैं इसी का नतीजा हैं कि मनचाहे पुलिसकर्मियों से अवैध उगाही कर सरकार के नियमों को ताख पर रख दिया जाता हैं और कई आईपीएस अधिकारियों को बेवकूफ बना दिया जाता हैं।

अगर ऐसा नहीं हैं तो पुअनि से पुनि के पद पर कार्यकारी प्रभार देने हेतु जो वरीयता क्रम मे जो सूची  18नवंबर 23को बनाई गई हैं इसमें वरीयता क्रम फिर से गलत अंकित किया गया हैं।

प्रोन्नति से संबंधित मुख्यालय द्वारा जो मनोनयन समिति बनाई गई हैं उसमें मिथिला क्षेत्र के आई अध्यक्ष हैं एवं सदस्य के रूप मे मुजफ्फरपुर के एसएसपी और गोपालगंज के एसपी हैं ताकि ऐसी गलती फिर से दुहराई नहीं जा सके।

इन पदाधिकारियो के संज्ञान मे वह बात सामने नहीं आई हैं जो बात उनके समक्ष आनी चाहिये थी।
दस्तक 7द्वारा आईजी कार्यालय से हुई इस गलतियों को प्रकाश मे करीब एक माह पूर्व मे लाया गया था जिसके कारण मुख्यालय ने इस समिति का गठन किया ताकि कोई भी गलती नहीं हो सके। लेकिन आईजी कार्यालय मे बैठे कर्मी बार बार गलतियों को दुहरा रहें हैं इस कारण जिसे पुअनि से उच्चतर प्रभार मिलना चाहिये उसे उसके हक से बार बार वंचित किया जा रहा हैं।

जी हाँ हम बात कर रहें हैं आईजी कार्यालय के कुछ कर्मियों के बारे मे जो जानबूझकर गलती कर रहें हैं। इस गलती करने मे उनकी मंशा क्या हैं यह वहीं बता सकते हैं। अब आईजी कार्यालय के कर्मियों का खेल देखिये कि वर्ष 2017-2018मे बहाल जिनका वरीयता क्रमांक 9879A,9937A एवं 9962A हैं इन्हें मनमानी तरीके से वरीयता क्रम कम करके यानि 9734जो पुअनि मनोरंजन चौधरी पश्चिम चंपारण का वरीयता सूची हैं।बता दे कि दूसरे के वरीयता सूची मे Aजोड़कर खेल बेल किया गया हैं।जिनका क्रमांक 9962 था उन्हें  9799A दर्शाकर कम कर दिया गया हैं और उन्हें लाभ पहुंचा दिया हैं। मजेदार पहलू यह हैं कि 9962A वाले पुअनि को पुनि मे कार्यकारी प्रभार मे शामिल कर दिया गया ,इन सभी को गलत तरीके से उच्चतर प्रभार दिया गया जब्कि 2009बैच की पुअनि जिसका वरीयता क्रमांक 9805हैं को वंचित कर दिया गया। ऐसे और भी कई हैं जिन्हें आईजी कार्यालय के कर्मियों ने जानबूझकर अनदेखी किया हैं। मजेदार बात तो यह हैं कि वरीयता क्रम से संबंधित पुलिस मुख्यालय से जारी तीनों पत्रों मे इनका नाम नहीं हैं।

यह गंभीर मामला हैं ?बताया जा रहा हैं कि अवैध लेन देंन के कारण जानबूझकर यह गलती आईजी कार्यालय के कर्मियों द्वारा की जा रही हैं।अगर इन आरोपों को दरकिनार करें तो 18नवंबर 23 को आईजी कार्यालय द्वारा जो पुलिस मुख्यालय को सूची भेजी गई हैं उस सूची मे पुअनि नीलम कुमारी का नाम क्यू नहीं शामिल किया गया ?जब्कि यह सूची मनोनयन समिति के देख रेख मे बनाई गई हैं।

पटना स्थित पुलिस मुख्यालय के कार्मिक विभाग के डीआईजी के आदेश को मिथिला क्षेत्र के आईजी कार्यालय के कर्मियों के जानबूझकर गलती के कारण 2009बैच के सब इंस्पेक्टर नीलम कुमारी पुलिस निरीक्षक पद के प्रभार से वंचित रह गई ,अगर ऐसा नहीं हैं तो एसआई नीलम से कम रेंक लाने वाले पुअनि को प्रोन्नति कैसे मिल गई। पुलिस मुख्यालय मे प्रोन्नति से संबंधित सभी कागजात तो इसी कार्यालय से भेजे गये हैं।

दरअसल पुलिस मुख्यालय के कई आदेश को आईजी कार्यालय द्वारा अनदेखी पहले भी की जा चुकी हैं। ऐसे मे सवाल उठना लाजमी हैं।

इस मामले को दस्तक7 ने 28 अक्टूबर को प्रमुखता से खबर छापी तो पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुये मिथिला क्षेत्र के आईजी को दूरभाष पर अवगत कराया। सेवानिवृत होने से एक दिन पहले इस आलोक मे आईजी ने 30अक्टूबर को पुलिस उप महानिरीक्षक (कार्मिक )को पत्र लिखते हुये कहा कि पुलिस निरीक्षक के पद पर कार्यकारी प्रभाव से पुलिस अवर निरीक्षक नीलम कुमारी वंचित रह गई हैं। उन्होंने यह भी पत्र मे लिखा कि पुअनि नीलम के आवेदन मूल मे संलग्न कर अग्रेतर कारवाई हेतु आपको भेजा जा रहा हैं। बावजूद इसके फिर से बनी सूची मे एसआई नीलम को वंचित रखा गया हैं।

दरभंगा जिला के 2009बेच के सीधी भर्ती पुअनि को कार्यकारी प्रभार से विभाग ने वंचित कर दिया जब्कि उनसे कम रेंक पाने वाले पुअनि को विभाग ने प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बना दिया। इसे लेकर पूरे महकमे मे चर्चा हैं।
दरभंगा जिला मे पदस्थापित पुअनि नीलम कुमारी की भर्ती पुलिस विभाग मे 18/2/2009को हुई। इनपर ना ही कभी कोई विभागीय कारवाई हुई और ना ही इनके विरुद्ध कोई मामला हैं। ऐसे मे इनकी प्रोन्नति का नहीं होना कई सवाल खड़ा करता हैं। बताया जाता हैं कि आईजी कार्यालय से इनसे सभी संबंधित कागजात पुलिस मुख्यालय को ससमय नहीं भेजा गया जिस कारण पहले चरण मे इनको उच्चतर प्रभार नहीं मिला जब्कि इनसे नो साल जूनियर 2018बैच के कई पुलिस अधिकारियों को उच्चतर प्रभार यानि इंस्पेक्टर मे प्रमोशन दे दिया गया।पुलिस अवर निरीक्षको की सूची मे नीलम का वरीयता क्रमांक 9805हैं। जब्कि राज्य वरीयता सूची मे भाग 4अंश क से संबंधित सूची मे क्रम संख्या 9879 A
9937 A एवं 9962 Aके पुलिस अवर निरीक्षकों का पुनि के पद पर प्रभार दे दिया गया। पुअनि नीलम कुमारी का इन सबो से पहले वरीयता क्रमांक (9805)हैं लेकिन इस प्रोन्नति से उन्हें वंचित कर दिया गया ।
यहां बता देना जरूरी हैं कि 2009बैच के पुअनि को उच्चतर प्रभार नहीं मिलना अपने आप मे बड़ा प्रश्न हैं जब्कि वे पूरी दक्षता रखते हैं और कोई भी विभागीय कार्यवाही भी इनपर नहीं हैं। इनके वरीयता क्रमांक से जो बहूत ज्यादा आगे हैं उनको उच्चतर प्रभार मिल गया हैं। सवाल यही हैं कि आखिर आईजी कार्यालय के किन कर्मियों ने पुअनि नीलम कुमारी का फ़ाइल दबाकर रख दिया ?मामला जो भी हो लेकिन एक सच्चे और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पदाधिकारी के साथ ऐसा किया जाना कतई न्याय संगत नहीं हैं ,ऐसे मे यह जांच होनी चाहिये कि इस मामले मे आई जी कार्यालय के कौन से कर्मी दोषी हैं और ऐसे दोषी कर्मियों पर जांचोपरांत कारवाई होना कानून संगत हैं।
अब जब पुलिस मुख्यालय ने मनोनयन समिति का गठन कर दिया हैं ऐसे मे इन कर्मियों का हौसला कितना बुलंद हैं कि तीन -तीन वरीय पुलिस अधिकारियों को कैसे बेवकूफ बना दिया हैं।