पाग शोभा यात्रा में दिखी मिथिला के सांस्कृतिक परिधान की झलक , सेमिनार में मिथिला विभूति एवं बिरौल जिला की मांग पर हुई चर्चा – परिचर्चा ।

बिरौल/दरभंगा

प्रखंड के श्रीकृष्णा आईडियल पब्लिक स्कूल परिसर में मिथिला विभूति पर्व समारोह का आयोजन किया गया। मां सती सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुरुआत मिथिला के सांस्कृतिक परिधान के साथ पाग शोभा यात्रा से की गई।

जिसका नेतृत्व सरपंच शंभु चौधरी ने किया। शोभायात्रा में मौजूद गणमान्य लोगों ने सुपौल बाजार शहीद भगत सिंह स्मारक चौक पर पहुंच कर सर्व प्रथम उनके प्रतीमा पर माल्यार्पण कर मुख्य सड़क मार्ग से गुजरते हुए डुमरी बजरंग वली मंदिर पर पहुंच कर मिथिला के सांस्कृतिक पर विस्तार से चर्चा किया गया। कार्यक्रम के दुसरी कड़ी पड़री पंचायत के सरपंच अच्युतानंद ठाकुर की अध्यक्षता में शुरू हुई।

जिसमें मिथिला विभूति एवं बिरौल जिला की मांग पर चर्चा-परिचर्चा की गई। उपस्थित गणमान्य लोगों ने मिथिला के विभूति पर बौद्धिक चर्चा किया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बिरौल जिला निर्माण को लेकर सरकार की ओर से निर्धारित सभी मापदंड बिरौल अनुमंडल पुरा कर रही है। बावजूद इतनी बड़ी आबादी की मांग को सरकार की हरी झंडी नहीं मिलना दुर्भाग्य पूर्ण है।

वक्ताओं ने कहा कि 6 प्रखंड और 83 पंचायत से बना बिरौल अनुमंडल का क्षेत्र जिसमें 303 राजस्व ग्राम. तीन थाना और एक आदर्श थाना है।दरभंगा के बाद सबसे बड़ा बाजार कहे जाने वाले सुपौल बाजार के स्थानीय लोगों की ओर से विगत 20 वर्षों से मांग की जा रही है। वैसे भी भौगोलिक दृष्टिकोण से बिरौल,सहरसा, सुपौल, खगड़िया, समस्तीपुर, मधुबनी व दरभंगा जिला से लगभग 50 किमी के मध्य में अवस्थित है। क्षेत्रफल के मुताबिक अनुमंडल की जनसंख्या बारह लाख है।

राजनीतिक चेतना व नागरिक जागरूकता के कारण बिरौल पिछड़ा हुआ है। परिणाम स्वरूप अनुमंडल के बने 26 वर्ष के बाद भी अनुमंडलवासी सर्वांगीण लाभ लेने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं।

बावजूद बिहार सरकार बिरौल अनुमंडल को जिला बनाने के दिशा उदासीन बनी हुई है। वक्ताओं ने बिहार सरकार की दोहरी नीति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि शेखपुरा, लखीसराय, शिवहर , अरवल जैसी कम आबादी एवं कम क्षेत्रफल वाले को जिला बनने का सौभाग्य मिल सकता है तो बिरौल को क्यों नहीं जो भौगोलिक दृष्टि से पूर्णतः विकसित है। विचार विमर्श कार्यक्रम का संचालन अभिषेक झा ने किया। इस अवसर पर विद्या भूषण राय , प्रियेश सिंह,आशीष भारद्वाज, सुमित पाठक, नीलेश सोनी,नवीन साहनी समेत ने संबोधित किया। पर्व समारोह के तीसरी कड़ी देर शाम कवि गोष्ठी से शुरू हुआ। जिसमें क्षेत्र के नामचीन कवि डॉ.राकेश रौशन, डॉ.बंशीधर मिश्रा, कमलेश प्रमेन्द्र, उज्जवल झा, उदय शंकर चौधरी, ऋषि रोही एवं माही झा सहित कई गणमान्य उपस्थित हुए। खबर लिखे जाने तक पर्व समारोह जारी था।