परिजनों का आरोप : मोरों थाना पुलिस ने डेढ़ लाख रुपये मांगे थे बतौर घुस ,घुस की रकम नहीं देने पर दर्ज की गई प्राथमिकी  ? पुलिस की भूमिका पर उठ रहें हें सवाल ? निष्पक्ष जांच की मांग 

रतनपुरा पुल पर महिला सिपाही को अनजाने में लगी टक्कर, दो युवक गिरफ्तार; 60–70 घंटे हाजत में रखने पर उठे सवाल

दस्तक 7 मीडिया ,दरभंगा / संजय कुमार राय

 रतनपुरा पुल पर वाहन जांच के दौरान महिला सिपाही के घायल होने के मामले में दो युवकों की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई और कथित अवैध वसूली के आरोपों को लेकर स्थानीय पुलिस कई  सवालों के घेरे में है। परिजनों का आरोप है कि मामूली  दुर्घटना के बाद दोनों युवकों को करीब 60 से 70 घंटे तक थाना हाजत में रखा गया। इतना ही नहीं, उनसे डेढ़ लाख रुपये की मांग भी की गई। परिजनों का दावा है कि जब वे कथित रकम देने में असमर्थ रहे, तब प्राथमिकी दर्ज कर दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इन सवालों ने पुलिस के कार्यशैली पर एक बड़ा दाग लगा दिया हें ,जो जांच के बाद ही खुलासा होंगा।

क्या है पुलिस का पक्ष?

पुलिस के अनुसार, घटना 18 अक्टूबर 2026 की रात करीब 8:30 बजे मोरो थाना क्षेत्र के रतनपुरा पुल पर हुई। वाहन जांच के दौरान एक मोटरसाइकिल को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि बाइक की हेडलाइट बंद थी और चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। इसी दौरान बाइक सवारों ने भागने की कोशिश की और मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर एक महिला सिपाही से टकरा गई, जिससे वह घायल हो गईं।

इस मामले में मोरो थाना कांड संख्या 113/26 दर्ज किया गया। प्राथमिकी में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने समेत अन्य आरोपों का उल्लेख है। गिरफ्तार युवकों की पहचान आशीष कुमार (19) और अखिलेश कुमार के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं मिला, जिससे घटना के दृश्य साक्ष्य मिलने की संभावना सीमित हो गई है।

परिजनों की कहानी पुलिस के दावे से अलग

दूसरी ओर, गिरफ्तार युवकों के परिजनों ने घटना का अलग ही विवरण दिया है। उनका कहना है कि वाहन जांच के दौरान पुलिस की टॉर्च की रोशनी चालक की आंखों पर पड़ी, जिससे कुछ क्षणों के लिए उसे सामने देखने में परेशानी हुई। इसी कारण उसने अचानक ब्रेक लगाया और मोटरसाइकिल असंतुलित होकर गिर गई। गिरने के दौरान बाइक महिला सिपाही से टकराते हुये बच गई,हाँ गिरने के बाद चालक की पीठ से महिला सिपाही के टांग में लगी ,जिस कारण वह भी गिर गई !परिजनों का दावा है कि चालक ने घटना के बाद अपनी गलती के लिए बार-बार माफी भी मांगी। इसके बावजूद पुलिस दोनों युवकों और मोटरसाइकिल को थाने ले गई तथा उन्हें हाजत में बंद कर दिया। परिजनों के इन दावों की पुष्टि भी  जांच के बाद ही हो सकेगी।

डेढ़ लाख रुपये की मांग का आरोप, जांच से खुलेगा राज

मामले का सबसे गंभीर पहलू परिजनों की ओर से लगाया गया डेढ़ लाख रुपये मांगने का आरोप है। उनका कहना है कि 18 अक्टूबर की रात दोनों युवकों को थाने लाया गया और अगले दिन भी उन्हें हाजत में रखा गया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उनसे पैसे की मांग की जाती रही। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे कथित रकम देने में असमर्थ थे।

परिजनों के मुताबिक, 19 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई और 20 अक्टूबर की देर शाम दोनों युवकों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसी घटनाक्रम के आधार पर वे हिरासत में रखने की अवधि और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल-हाजत में रखने की जरूरत और अवधि क्या थी?

इस पूरे मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि दोनों युवकों को किस कानूनी आधार पर इतने लंबे समय तक  हिरासत में रखा गया, गिरफ्तारी का समय क्या दर्ज किया गया और उन्हें न्यायालय के समक्ष कब प्रस्तुत किया गया। प्राथमिकी, गिरफ्तारी मेमो, थाना डायरी, जब्ती सूची और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के मिलान से घटनाक्रम की वास्तविक समय-रेखा स्पष्ट हो सकती है।हालांकि थाने में दर्ज प्राथमिकी ,जब्ती सूची को देखने से यह स्पष्ट हें कि 18अक्टूबर 26के शाम का समय दर्शाया गया हें तो स्वाभाविक हें कि मोटरसाईकिल के साथ दोनों युवक को भी हिरासत में लिया गया होंगा और अगले दिन प्राथमिकी दर्ज की गई ,और उसके अगले दिन यानि 20 अक्टूबर को दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया,यह भी खुलासा तब होंगा जब मामले की जांच होगी।यदि  परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

वरीय अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग

अब जरूरत है कि दरभंगा के वरीय पुलिस अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में कथित रुपये की मांग, गिरफ्तारी और प्राथमिकी के समय, हाजत में रखने की अवधि तथा न्यायालय में पेशी से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल होनी चाहिए। महिला सिपाही को लगी चोट की मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्यों की भी समीक्षा की जानी चाहिए।हालांकि पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही हें।