बिहार पुलिस में वेतन-भुगतान की होगी 100% जांच, गड़बड़ी मिली तो आपराधिक कार्रवाई; अधिक भुगतान की होगी वसूली,

वित्त विभाग की जांच में प्रथम दृष्टया मिलीं कई विसंगतियां, मुख्यालय से जिलों तक सभी कर्मियों के वेतन-भत्तों की जांच अनिवार्य; 23 अक्टूबर सुबह 11:30 बजे तक मांगी गई रिपोर्ट

दस्तक 7मीडिया /पटना 

बिहार पुलिस समेत गृह विभाग के अधीन आने वाले सभी कार्यालयों में पदाधिकारियों एवं कर्मियों के वेतन और भत्तों के भुगतान की शत-प्रतिशत जांच होगी। वित्त विभाग के स्तर पर वेतन भुगतान से संबंधित आंकड़ों की जांच में प्रथम दृष्टया कई विसंगतियां सामने आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। अब पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला पुलिस, विभिन्न विशेष इकाइयों और प्रशिक्षण संस्थानों तक सभी संबंधित कार्यालयों में वेतन भुगतान की जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध आपराधिक और अनुशासनिक कार्रवाई के साथ अतिरिक्त भुगतान की वसूली भी की जाएगी।

इस संबंध में वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने 9 अक्टूबर 2026 को गृह विभाग को निर्देश जारी किया था। इसके बाद गृह विभाग के संयुक्त सचिव कमल नयन ने 15 अक्टूबर को अधीनस्थ कार्यालयों में वेतन एवं भत्तों की जांच कर सत्यापित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा। बिहार पुलिस मुख्यालय के बजट, अपील एवं कल्याण प्रभाग ने भी 16 अक्टूबर को इस संबंध में पत्र जारी किया। निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर अपर पुलिस महानिदेशक ने 21 अक्टूबर को स्मार पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट भेजने का दोबारा निर्देश दिया।

वेतन भुगतान में विसंगतियां, अब तय होगी जिम्मेदारी

वित्त विभाग के पत्र के अनुसार, राज्यकर्मियों के वेतन विपत्र तैयार करने की प्रक्रिया एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होती है। वेतन भुगतान से पहले मेकर (Maker), चेकर (Checker) और एप्रूवर (Approver) के स्तर पर विपत्र की पुष्टि की जाती है। इसके बाद सीएफएमएस (CFMS) के माध्यम से भुगतान किया जाता है।

गृह विभाग के अंतर्गत पदाधिकारियों एवं कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़ों के परीक्षण में प्रथम दृष्टया कई विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, सरकारी पत्रों में इन विसंगतियों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है और न ही किसी विशेष अधिकारी, कर्मचारी या जिले के विरुद्ध अनियमितता प्रमाणित होने का उल्लेख है।

सरकार ने निर्देश दिया है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में मेकर, चेकर या एप्रूवर के स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार आपराधिक एवं अनुशासनिक कार्रवाई की जाए। यदि किसी पदाधिकारी या कर्मी को निर्धारित राशि से अधिक भुगतान हुआ है, तो अतिरिक्त राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।

अगले महीने के वेतन भुगतान से पहले जांच अनिवार्य

निर्देश के मुताबिक, जांच केवल संदिग्ध भुगतान या चुनिंदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी। गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले शत-प्रतिशत पदाधिकारियों एवं कर्मियों के वेतन और भत्तों की जांच की जाएगी। इसमें विभागीय मुख्यालय भी शामिल रहेगा।

जांच विभाग के वरीय पदाधिकारियों के निर्देशन में कराई जानी है और इसे अगले महीने के वेतन भुगतान से पहले पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य वेतन भुगतान से संबंधित विसंगतियों की पहचान करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना और भविष्य में संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाना है।

वित्त विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि वेतन विपत्र तैयार करने, उसकी जांच करने और भुगतान की मंजूरी देने से संबंधित मेकर, चेकर एवं एप्रूवर की जिम्मेदारी प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को ही दी जाए।

पुलिस मुख्यालय से जिलों और विशेष इकाइयों तक निर्देश

बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से पुलिस महानिदेशक, प्रशिक्षण, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, अभियान, विशेष शाखा, बिहार पुलिस अकादमी, रेल पुलिस, अपराध अनुसंधान विभाग, आर्थिक अपराध इकाई, एटीएस, यातायात, सुरक्षा सहित विभिन्न इकाइयों के प्रमुखों को निर्देश भेजा गया है। इसके अलावा सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस उपमहानिरीक्षकों, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों, समादेष्टाओं और संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों एवं विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं को भी इसके दायरे में रखा गया है।

अपर पुलिस महानिदेशक (बजट, अपील एवं कल्याण) ने सभी संबंधित कार्यालयों से जांच कर प्रतिवेदन बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना को 23 अक्टूबर 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे तक उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि उसे गृह विभाग को भेजा जा सके।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

सरकार के निर्देश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शत-प्रतिशत जांच में किस प्रकार की विसंगतियां सामने आती हैं और कितने मामलों में अनियमित भुगतान की पुष्टि होती है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय करने, अतिरिक्त भुगतान की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

फिलहाल, सरकारी पत्रों में वेतन भुगतान से संबंधित विसंगतियों का उल्लेख करते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं। किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है। वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और प्रतिवेदन सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।