न वर्दी,न राइफल, यह कैसी ड्यूटी? होमगार्ड सिपाही सिविल कपड़ों में करते हैं ड्यूटी,उत्पाद विभाग की हाजत की व्यवस्था पर उठे सवाल

दस्तक 7मीडिया /गुड्डू राज 

दरभंगा के मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की हाजत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाजत में बंद कैदियों की निगरानी की जिम्मेदारी जिन कर्मियों के कंधों पर है,उनकी ड्यूटी करने के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाजत में सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं,इस पर ध्यान देना जरूरी है। मामला उस समय सामने आया,जब उत्पाद विभाग की हाजत पर एक व्यक्ति कुर्सी पर , पैर पर पैर रखकर बैठा हुआ दिखाई दिया। जब उनसे उनकी पहचान और ड्यूटी के बारे में पूछा गया,तो उन्होंने अपना नाम नूर मोहम्मद बताया और खुद को हाजत में ड्यूटी करने वाला होमगार्ड जवान बताया। जब उनसे पूछा कि वे बिना वर्दी के ड्यूटी क्यों कर रहे हैं और उनकी राइफल कहां है,तो उन्होंने जवाब दिया कि वे सिविल कपड़ों में ही ड्यूटी करते हैं और उन्हें वर्दी की जरूरत नहीं है। उनके इस जवाब के बाद हाजत में ड्यूटी की व्यवस्था और सुरक्षा के नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बिना वर्दी के ड्यूटी,आखिर क्या हैं नियम?

हाजत एक संवेदनशील स्थान होता है। यहां बंद कैदियों की निगरानी करना और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में ड्यूटी पर तैनात जवान की वर्दी बेहद ही जरूरी हे और ऐसा नहीं दिखने पर  उसके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
होमगार्ड सिपाही नूर मोहम्मद ने बताया कि वे सिविल कपड़ों में ड्यूटी करते हैं।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों को इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। क्या ,जवान को सिविल कपड़ों में ड्यूटी करने की अनुमति दी गई है ??

हाजत में बंद कैदियों की सुरक्षा कितनी जरूरी?

उत्पाद विभाग की हाजत में शराबबंदी कानून के तहत पकड़े गए आरोपितों को रखा जाता है। ऐसे स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को सतर्क रहना चाहिए और हाजत में बंद लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। यदि सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी रहती है,तो इससे परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हाजत में तैनात कर्मी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएं और विभाग की ओर से तय नियमों का पालन करें। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाजत में ड्यूटी करने वाले कर्मियों की निगरानी कौन करता है और उनकी ड्यूटी की जांच कितनी नियमित रूप से होती है। यदि वरीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं,तो बिना वर्दी में बैठे गार्ड उन्हें दिखाई पड़ते हें अथवा नहीं ?

परिजनों के मिलने और सामान देने पर भी सवाल

हाजत में बंद कैदियों से मिलने आने वाले परिजनों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहें हैं। आरोप है कि परिजन बिना रोक-टोक के हाजत में बंद लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें सामान भी दे रहे हैं। इस दौरान सामान की जांच ठीक से होती है या नहीं ??अगर जांच नहीं होती हें तो कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती हें और फिर इसकी जवाबदेही पूरे विभाग पर फुट सकती हें।

हाजत में बंद लोगों से मुलाकात और उन्हें सामान देने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से यह जरूरी है कि अंदर ले जाए जाने वाले सामान की जांच की जाए और मुलाकात के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मी सतर्क रहें। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है,तो विभाग को उसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी,बल्कि लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब भी मिल सकेगा।

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

हाजत की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल ड्यूटी पर तैनात जवान की नहीं होती,बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी होती है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी कर्मी निर्धारित नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं अथवा नहीं।

इसके साथ ही हाजत में बंद कैदियों की निगरानी,परिजनों की मुलाकात और सामान की जांच की प्रक्रिया का भी निरीक्षण किया जाना चाहिए। लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब तभी मिल सकता है,जब विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर अपनी व्यवस्था के बारे में स्पष्ट जानकारी दे।

क्या विभाग करेगा मामले की जांच?

दरभंगा उत्पाद विभाग की हाजत में सामने आए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नूर मोहम्मद के सिविल कपड़ों में ड्यूटी करने के साथ ही हाजत में बंद लोगों से मुलाकात और सामान देने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देने की जरूरत है। अब सवाल यह है कि क्या विभाग के  अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे?

सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की आशंका को दूर करना जरूरी

हाजत जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जिम्मेदारी,वर्दी से जुड़े नियम,हथियार रखने की व्यवस्था और बंदियों से मुलाकात की प्रक्रिया की स्पष्ट स्पष्ट होना चाहिये , यदि व्यवस्था में कोई कमी है,तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।