दुर्गापूजा में पुलिसकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज, अनुपस्थित मजिस्ट्रेटों पर कार्रवाई कब?

थानों से उठ रहे सवाल शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस की थी या प्रशासनिक अधिकारियों की भी? प्रतिनियुक्ति स्थलों पर मजिस्ट्रेटों की मौजूदगी की जांच की उठी मांग

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

दुर्गापूजा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने में लापरवाही बरतने के आरोप में दो प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने के बाद अब प्रशासनिक महकमे की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में अनुपस्थिति पर त्वरित कार्रवाई हुई, लेकिन विभिन्न प्रखंडों और अनुमंडलों में दुर्गापूजा के दौरान जिलाधिकारी की ओर से प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेटों की कथित अनुपस्थिति को लेकर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह सवाल पुलिस महकमे से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न इलाकों में दुर्गापूजा मेले के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिनियुक्त ज्यादातर मजिस्ट्रेटों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर प्रतिनियुक्त अधिकारियों की मौजूदगी अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखी, ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

पुलिस की ड्यूटी पर सख्ती, प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

दुर्गापूजा के दौरान जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों की विभिन्न स्थानों पर तैनाती की गई थी। पुलिस के वरीय पदाधिकारी लगातार अलग-अलग थाना क्षेत्रों, पूजा पंडालों और संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करते रहे। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और उनकी तैनाती को लेकर निगरानी भी की गई।

इसी क्रम में ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए दो प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया कि त्योहार के दौरान निर्धारित ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन दोनों की थी, तो जवाबदेही तय करने में एक समान सख्ती क्यों नहीं दिखाई दे रही है?

थानाध्यक्षों में नाराजगी, प्रशासनिक सहयोग पर उठ रहे सवाल

सूत्रों का दावा है कि दुर्गापूजा के दौरान  थाना क्षेत्रों में प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेटों की अनुपस्थिति को लेकर थानाध्यक्षों के बीच नाराजगी देखी गई। पुलिसकर्मियों को दिन-रात ड्यूटी करते हुए मेले की भीड़ नियंत्रित करने, सुरक्षा व्यवस्था संभालने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार रहना पड़ा। वहीं ज्यादातर  स्थानों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित मौजूदगी को लेकर सवाल उठने की बात सामने आ रही है।

कुछ थानाध्यक्षों के हवाले से यह भी चर्चा है कि प्रतिनियुक्त कर्मियों की अनुपस्थिति के संबंध में पूर्व में जिलाधिकारी को पत्राचार किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह केवल ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का मामला नहीं होगा, बल्कि आपात स्थिति में पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय तथा संयुक्त जवाबदेही का भी गंभीर प्रश्न होगा।

मोबाइल टावर लोकेशन से हो सकती है जांच, सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

मामले को लेकर जानकारों का कहना है कि प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेटों की उपस्थिति की जांच तैनाती संबंधी अभिलेखों, ड्यूटी रजिस्टर, निरीक्षण रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार उपलब्ध कराए गये मोबाईल या निजी मोबाइल लोकेशन की भी जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित अधिकारी निर्धारित समय में अपने प्रतिनियुक्ति स्थल पर मौजूद थे या नहीं।

डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

दुर्गापूजा जैसे बड़े त्योहार के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखना किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस बल सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था संभालता है, जबकि प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट प्रशासनिक समन्वय, आवश्यक निर्णय और मौके पर व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों विभागों की सक्रियता ही किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में मदद करती है।

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने दुर्गापूजा के दौरान विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों और चुनाव संबंधी तैयारियों की निगरानी की थी। ऐसे में अब उनसे अपेक्षा की जा रही है कि प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेटों की कथित अनुपस्थिति से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में लापरवाही प्रमाणित होने पर संबंधित कर्मियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

बड़ा सवाल: क्या जवाबदेही सिर्फ पुलिस की है?

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा सकता है, तो प्रशासनिक प्रतिनियुक्ति में लापरवाही की शिकायतों की जांच कर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या विधि-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की है, या प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भी उतनी ही जवाबदेही है?यह भेदभाव होता हे तो पूरे विभाग के लिये यह चिंताजनक हे।

अब देखना यह है कि इन शिकायतों पर प्रशासन संज्ञान लेता है या नहीं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो न केवल वास्तविक स्थिति सामने आएगी, बल्कि भविष्य में त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर ड्यूटी में लापरवाही रोकने के लिए भी स्पष्ट संदेश जाएगा।