दरभंगा एमएलसी चुनाव, सभी दल कर रहे जीत का दावा, लेकिन अंदरखाने ‘जबरदस्त खेल’ के संकेत।

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

बिहार के राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरभंगा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी एमएलसी चुनाव को लेकर बिछौना बिछ चुका है। हालांकि मैदान में उतरे तमाम दलों और उनके समर्थित उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के दावों के साथ ताल ठोक रहे हैं, लेकिन जमीनी रुझानों और अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खुफिया जानकारियों ने इस चुनाव को बेहद रोमांचक बना सकता है। इस बार के एमएलसी चुनाव में किसी बड़े उलटफेर या ‘जबरदस्त खेल’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का स्नातक और शिक्षक चुनाव सिर्फ पारंपरिक समीकरणों पर नहीं टिकेगा। केंद्र सरकार से जुड़े कुछ ऐसे नीतिगत और ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन्होंने पढ़े-लिखे वर्ग यानी शिक्षकों और स्नातकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है। मतदाता इस बार केवल दलीय निष्ठा के बजाय जमीनी हकीकत और अपनी पेशेवर चिंताओं को सर्वोपरि रख रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या बेहद अप्रत्याशित हो सकता है। चुनाव मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सभी प्रमुख दल पूरी ताकत झोंक चुके है। भाजपा, आरजेडी, जदयू और कांग्रेस के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने उम्मीदवारों की नैया पार लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का केंद्र बनी जनसुराज समर्थित खेमा भी अपनी पैठ बनाने के लिए पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है। सभी दलों के कार्यकर्ता मतदाताओं के संपर्क में जाकर केवल वोट मांगने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतदान को लेकर विशेष गणित समझा रहे हैं। वरीयता क्रम का यह गणित ही इस चुनाव के असली परिणाम तय करेगा। विशेषज्ञों की राय से स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव हमेशा से आम चुनावों से अलग होते हैं। यहां का मतदाता जागरूक होता है। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का सीधा असर इस वर्ग पर पड़ता है। ऐसे में अंतिम समय में पलटी मारने वाले समीकरण इस बार परिणामों को पूरी तरह बदल सकते हैं। नतीजे किसके पक्ष में जाएंगे, यह तो मतगणना के बाद ही साफ होगा, लेकिन जिस तरह से अंदरखाने सरगर्मी बढ़ी है, उससे यह तय है कि दरभंगा का यह एमएलसी चुनाव बिहार की राजनीति में एक नया संदेश देने वाला है।