डीएमसीएच में माइकोबैक्टेरियम लेप्री पर सेमिनार, कुष्ठ रोग के लक्षण और उपचार की दी गई जानकारीलंबे समय तक अनुपचारित मरीज के संपर्क में रहने से फैल सकता है संक्रमण, हाथ मिलाने या साथ बैठने से नहीं होता कुष्ठ रोग

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शनिवार को माइकोबैक्टेरियम लेप्री विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें पीजी छात्र डॉ. हिमल ने प्रस्तुति के माध्यम से कुष्ठ रोग के कारण, लक्षण, बचाव, उपचार और रोकथाम के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

सेमिनार में बताया गया कि माइकोबैक्टेरियम लेप्री एक बैक्टीरिया है, जो कुष्ठ रोग का कारण बनता है। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। आमतौर पर संक्रमण का खतरा तब होता है, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अनुपचारित कुष्ठ रोगी के निकट संपर्क में रहता है। हाथ मिलाने, साथ बैठने या सामान्य सामाजिक संपर्क से यह बीमारी नहीं फैलती है।

डॉ. हिमल ने बताया कि यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं (पेरिफेरल नर्वस सिस्टम) और त्वचा को प्रभावित करता है। इसके कारण त्वचा पर हल्के या रंगहीन धब्बे उभर सकते हैं, जिनमें दर्द, गर्मी या स्पर्श का एहसास कम अथवा समाप्त हो जाता है। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार नहीं होने पर हाथ-पैरों में सुन्नपन, मांसपेशियों में कमजोरी और गंभीर शारीरिक विकृति हो सकती है।

जांच और उपचार की दी गई जानकारी

सेमिनार में कुष्ठ रोग की पहचान के लिए चिकित्सकीय परीक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई। त्वचा पर सुन्न धब्बों की जांच के साथ आवश्यकतानुसार स्किन स्मियर टेस्ट और बायोप्सी जैसी जांच की जा सकती है। स्किन स्मियर में विशेष स्टेनिंग तकनीक से बैक्टीरिया की उपस्थिति का पता लगाया जाता है, जबकि बायोप्सी में प्रभावित त्वचा या अन्य संबंधित ऊतकों की जांच की जाती है।

उपचार के संबंध में बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित मल्टी-ड्रग थेरेपी (एमडीटी) से कुष्ठ रोग का इलाज किया जाता है। बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर पूरा उपचार कराने से संक्रमण को नियंत्रित करने तथा स्थायी शारीरिक क्षति से बचने में मदद मिलती है। लोगों को त्वचा पर सुन्न धब्बे या संवेदनशीलता में कमी जैसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. कन्हैया झा, डॉ. पीएन झा, डॉ. राम नरेश शर्मा, डॉ. जीवछ प्रसाद, डॉ. सनी कुमार, डॉ. निहारिका कुमारी, डॉ. नेहा, डॉ. सुनील कुमार चौधरी, डॉ. अनूप, डॉ. सृष्टि सोनम और अकील अहमद सहित विभाग के सभी चिकित्सक उपस्थित थे।