कुशेश्वरस्थान मंदिर में दान पेटी की चोरी को लेकर कब दर्ज होगी प्राथमिकी ?मंदिर हें या फिर कौरवों का क्रीड़ा मैदान ?प्रशासनिक पदाधिकारियों का कार्यकलाप संदिग्ध।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय

कुशेश्वरस्थान मंदिर में दान पेटी की कथित चोरी को लेकर पुलिस ने भले ही अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की हे ,लेकिन इस कथित चोरी के बाद चर्चा में आयें मंदिरों में तैनात पंडा को लेकर उनके परत दर परत खुलने लगी हे,अगर पुलिस इन सभी बातों को जांच कर प्राथमिकी दर्ज करती हे तो मंदिर का भविष्य आने वाले दिनों में और बेहतर हो जाएगी और हमेशा के लिये कौरवों द्वारा जारी युद्ध पर विराम लग जाएगा ?
अब इसमें कौरव कौन हे ,इसे जानने के पुलिस को कागजों का अवलोकन कर कारवाई की दिशा में वरीय अधिकारियों को आगे आना पड़ेगा ताकि मंदिर से अराजकता खत्म हो।
अब हम फिर उसी दान पेटी का चर्चा करते हे जिसकी चोरी हुई ?स्थानीय प्रशासन इस मामले की लीपापोती के लिये अपनी पूरी ताकत झोंक दी हे ताकि मामला रफा दफा हो ?लेकिन मामला कैसे रफा दफा हो सकता हे।सीओ का जांच प्रतिवेदन कहता हे कि मंदिर परिसर में गर्व गृह में रखे दान पेटी
को हटाकर मंदिर परिसर में ही दान पेटी में रखे रुपयों की गिनती की गई हे ,यही सवाल हे अगर इन रुपयों की गिनती मंदिर परिसर में हुई हे तो उसका वीडियो मंदिर परिसर में लगे सीसी टीवी में भी कैद होंगा ?अगर वीडियो नहीं हे और मंदिर परिसर से दान पेटी बाहर निकाला गया हे तो वह निश्चित रूप से चोरी हे।
अगर इस सच्चाई से भी अगर पर्दा उठाया जाय तो सूत्र बताते हे कि उस दान पेटी में तीन ताले को जड़ा गया था ,कहा जाता हे कि इन तीन तालों में एक एसडीओ के तरफ से ताला लगा हुआ था ,दूसरा और तीसरा ताला वहां के दोनों ग्रुप के पंडा ने लगाया था ,सूत्र बताते हें कि तीनों छोटे छोटे ताले को तोड़ा गया और उसके बाद रुपये की गिनती हुई ,अगर मंदिर परिसर से दान पेटी  बाहर निकला गया वह चोरी ही कहलायेगा ?वहीं एसडीओ की ओर से ताला अगर उस दान पेटी में लगा था तो यह अपने आप में बड़ा प्रश्न हें ?दरअसल उस मंदिर में पंडा के दो ग्रुप हें और इसके कारण मंदिर में भारी कुव्यवस्था हें।
इसमें एक ग्रुप के लोग अंग्रेज समय के हाई कोर्ट का हवाला देते हुये कहते हें कि तीन वंशजों का अधिकार गर्व गृह में रखे इस दान पेटी पर  हें ?यहां भी सवाल हें कि क्या तीन वशंज के असली उतराधिकारी के रूप में सभी पंडा हें ?इसका भी खुलासा दस्तक 7मीडिया करेगा ?पुलिस और प्रशासन के आंख में धूल झोंककर कुछ पंडा अपना दावा ठोंक रहें हें ,जिन्हें नियमतः अधिकार ही नहीं हें,मजेदार बात यह हें कि अधिकार के नहीं रहते हुये भी उनका प्रबल दावा हें और इसी दावे की आड़ में न्यास समिति के जमीन को बेच दिया गया फिर भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई ?यह तो सो आश्चर्य में एक हें।
यहां बता दें कि मंदिर परिसर में कई दान पेटी हें लेकिन गर्भ गृह में रखे दान पेटी को लेकर अभी चर्चा गर्म हें ?
न्यास समिति के पदेन सदस्य अध्यक्ष बिरौल एसडीओ और उपाध्यक्ष एसडीपीओ हें ,लेकिन न्यास समिति के करता-धरता सचिव होते हें ,सचिव ने ही थाने में दान पेटी की चोरी को लेकर आवेदन थाना को दिया हें फिर प्राथमिकी अब तक दर्ज नहीं होना सवाल खड़ा करता हें ,यही नहीं सचिव गोपाल नारायण चौधरी स्पष्ट कहते हें कि एसडीओ के मौखिक आदेश के बाद ही उन्होंने प्राथमिकी के लिये आवेदन दिया।
अब  गर्भ गृह के दान पेटी पर यदि मान ले कि पंडा का अधिकार हें उस पेटी को पंडा खोल सकते हें और पैसा लेकर बांट सकते हें तो एसडीओ के पत्र को क्या समझा जाय ,उनका पत्र तो स्पष्ट हें, गर्भ गृह में रखे दान पेटी को जब भी खोला जाता हें तो उसमें एक मजिस्ट्रेट के अलावे अन्य की मौजूदगी रहती हें ?फिर दान पेटी को जब उठाकर मंदिर परिसर से बाहर ले जाकर ताला को तोड़ा गया और कोई भी मजिस्ट्रेट की तैनाती नहीं थीं तो उसे चोरी नहीं तो और क्या कहेंगे ?इसे लेकर घटना के बाद उस पेटी पर दावा रखने वाले पंडा ने उसके असली हिस्सेदार को भी उसका हिस्सा नहीं दिया,इसे लेकर मनोज झा ने एसडीपीओ से शिकायत भी की थीं ?दरअसल गर्भ गृह में रखे दान पेटी पर  वास्तव में पंडा का अधिकार हें अंग्रेज जमाने के कोर्ट के अनुसार ,लेकिन उस दान पेटी में दान में मिले पैसों में मंदिर मद में हो रहें रख रखाव के पैसो को निकालकर बचे पैसों में पंडा को आपस के हिस्सेदारों में बांटना हें और इसीलिये वहां मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति की जाती हें ,नहीं तो मंदिर के रख रखाव या अन्य मदों में खर्च की जाने वाली इन पैसों को भी पंडा बांट लेंगे और मंदिर के नाम पर ठन ठन गोपाल हो जाएगा ?जो परंपरा इस दान पेटी की चोरी में नहीं निभाई गई।
ऐसे में प्राथमिकी दर्ज अब तक नहीं होना अपने आप में बड़ा प्रश्न हें। इसके बाद मंदिर में घंटी की चोरी हुई और प्रशासनिक पदाधिकारी इस घंटी की चोरी को लेकर एक व्यक्ति खोजते रहे कि प्राथमिकी दर्ज हो लेकिन कोई व्यक्ति प्राथमिकी के लिये तैयार नहीं हुआ ,सचिव गोपाल ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया उन्होंने कहा कि दान पेटी की चोरी को लेकर आवेदन दिया तो प्राथमिकी दर्ज क्यूँ नहीं हुई ,घंटी चोरी का आवेदन हम अब नहीं देंगे ?
ऐसा कहा जा सकता हें कि न्यास समिति के पदेन सदस्य और कुछ पंडों की तालमेल ने बाबा कुशेश्वरनाथ के मंदिर को अखाड़ा बना दिया हें जो काफी चिंताजनक हें ?
मंदिर के पूरे कहानी का दस्तक 7राज खोलेगा और मंदिर की कुव्यवस्था को दूर करने का प्रयास करेगा ताकि मंदिर अखाड़ा नहीं बन सके।न्यास समिति के अध्यक्ष का पत्र पढ़िये ,इसमें हर एक सवाल का जवाब हें लेकिन कारवाई में लीपा पोती की जा रही हें