कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कोसी-कमला का तांडव, कई घर और प्राथमिक विद्यालय नदी में विलीन, विधायक ने उपमुख्यमंत्री को पत्र लिख मांगी तुरंत मदद

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

बिहार के दरभंगा जिले के अंतर्गत आने वाले कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में कोसी, कमला, करेह और बलान नदियों का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। चारों नदियों के बढ़े जलस्तर और भीषण कटाव से कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विधायक अतिरेक कुमार (78-कुशेश्वरस्थान) ने राज्य के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को पत्र लिखकर अविलम्ब राहत और सुरक्षात्मक कार्य कराने की गुहार लगाई है। विधायक अतिरेक कुमार ने अपने पत्र (पत्रांक 121, दिनांक 01/10/2026, में क्षेत्र भ्रमण के बाद जमीनी हालात का ब्यौरा प्रस्तुत किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, नदियों के कटाव से कई पंचायतों में तबाही मची है।उजुआ सिमरटोका पंचायत- प्राथमिक विद्यालय कुंजभवन नदी के भीषण कटाव की चपेट में आकर पूरी तरह विलीन हो चुका है। कटाव अब सीधे गांव तक पहुंच चुका है।बुढ़िया सुखरासी,गांव के लगभग 10 से 15 घर कटाव के कारण नदी में समा चुके है।सिमराही व गईजोड़ी, सिमराही गांव में कई घर बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं और जीवन अस्त-व्यस्त है।ईटहर पंचायत के विशुनियां, चौकिया एवं ईटहर,इन गांवों में कटाव के कारण कई घर नदी में समा चुके हैं। तिलकपुर- वार्ड संख्या 14 और 15 पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिर चुके है। तिलकेश्वर पंचायत के ग्राम बहवा, गांव का मोहल्ला नदी के भीषण कटाव से मात्र 5 फीट की दूरी पर टिका हुआ है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।ग्राम सेवका: संपूर्ण मोहल्ला बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है।सुघरायन पंचायत के ग्राम भरैन पूरा गांव बाढ़ से घिरा है और आवासीय मकानों के समीप तेजी से कटाव जारी है। विधायक अतिरेक कुमार ने उप मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि बाढ़ और कटाव के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है। सेवका गांव की संपर्क सड़क बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुकी है। मिलकपुर,विशुनियां,चौकियां,ईटहर, सिमराही, बुढ़िया सुखरासी, कुंजभवन, गईजोड़ी और भरैन गांवों में आवागमन के सभी रास्ते ठप हो चुके हैं। इन क्षेत्रों में ग्रामीणों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बची है। क्षेत्र की गंभीर स्थिति को रेखांकित करते हुए विधायक अतिरेक कुमार ने जल संसाधन मंत्री से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत स्थलीय निरीक्षण करवाया जाए और कटाव को रोकने के लिए बिना किसी देरी के आवश्यक सुरक्षात्मक (एंटी-इरोजन) कार्य शुरू कराए जाएं, ताकि ग्रामीणों के जीवन और बची हुई संपत्ति की रक्षा की जा सके।