जीवनभर शिक्षा और समाज कल्याण की अलख जगाने वाली अनामिका देवी का निधन, मरणोपरांत नेत्रदान कर फैला गईं रोशनी 

दस्तक 7 मीडिया (विशेष रिपोर्ट), घनश्यामपुर/बिरौल।

समाज में शिक्षा, चेतना और सेवा की मिसाल पेश करने वाली घनश्यामपुर प्रखंड के रसियारी गांव निवासी स्वर्गीया अनामिका देवी के निधन के साथ ही एक प्रेरक अध्याय का अंत हो गया। शनिवार देर रात उनके निधन के बाद परिजनों ने उनके महान संकल्प को साकार करते हुए दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की मेडिकल टीम को सूचित किया। डॉक्टरों की टीम ने स्वर्णिम समयावधि के भीतर पहुँचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनके निधन की खबर से संपूर्ण क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं उनके इस निर्णय की ग्रामीण और प्रबुद्ध जन भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं। प्रो. शंभू प्रसाद मिश्र ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी पत्नी अनामिका देवी के साथ मृत्यु के पश्चात नेत्रदान करने का सामूहिक संकल्प लिया था। उनका पूरा परिवार कई दशकों से रामाश्रम सत्संग, मथुरा से जुड़ा हुआ है।भारतीय अध्यात्म और प्राणी मात्र की सेवा के संकल्प से प्रेरित होकर दोनों दंपत्ति ने अपने मरणोपरांत अंगों का उपयोग समाज कल्याण में करने का निर्णय लिया था। परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए उनके निधन के तुरंत बाद मेडिकल टीम से संपर्क कर इस संकल्प को पूरा किया, जिससे अब किसी जरूरतमंद के जीवन में पुन: उजाला फैल सकेगा।अनामिका देवी केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा की धनी महिला थीं। विज्ञान विषय से स्नातक (B.Sc.) और स्नातकोत्तर (M.Sc.) की डिग्री हासिल करने वाली अनामिका देवी पूर्व जनप्रतिनिधि भी रह चुकी थीं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता के अंधकार को मिटाने के लिए स्वयं साक्षरता अभियान चलाया और 100 से अधिक महिलाओं को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाया।

“आज हम जो भी शिक्षित और जागरूक हैं, उसमें अनामिका देवी जी का अतुलनीय योगदान है। वे हमारे लिए केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि पथ-प्रदर्शक थीं।

” श्यामा देवी एवं अनुराधा देवी” (अनामिका देवी द्वारा शिक्षित ग्रामीण महिलाएं)

घनश्यामपुर और आसपास का विस्तृत क्षेत्र प्रतिवर्ष कोशी, कमला, बलान, गेहुआं और भूतही जैसी नदियों की भीषण बाढ़ से त्रस्त रहता है। अनामिका देवी ने इस आपदा को केवल नियति मानकर नहीं छोड़ा, बल्कि इसके स्थायी समाधान और जन-समस्याओं को अर्श तक पहुँचाने के लिए माननीय पटना उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में कई ऐतिहासिक जनहित याचिकाएं दायर कीं। उनकी इन याचिकाओं की सराहना शासन और प्रशासन के विभिन्न विभागों में हुई, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में सुरक्षात्मक व विकासात्मक कार्यों की नींव रखी जा सकी। अनामिका देवी एक संवेदनशील कवयित्री और हिंदी एवं मैथिली भाषा की प्रखर साहित्य साधिका थीं। उनका पूरा परिवार शिक्षा और समाज सेवा के प्रति समर्पित रहा है। इनके पति प्रो. शंभू प्रसाद मिश्र वित्तरहित कॉलेज रामजानकी राधा कृष्ण शारदा इंटर महाविद्यालय, इंदिरा नगर, गोई मिश्र लगमा में कार्यरत ,पुत्र: डॉ. पारस मणि शिक्षक, +2 गांधी कोशी प्रावेशिका उच्च विद्यालय, रसियारी,पुत्रवधु श्रीमती सपना कुमारी (अपनी सास के पदचिह्नों पर चलने वाली प्रखर समाजसेविका)। पुत्री श्रीमती अर्पणा कुमारी एवं श्रीमती अर्चना कुमारी (समाजसेविका), दामाद श्री वीरेंद्र झा। अनामिका देवी का संपूर्ण जीवन समाज को दिशा देने वाला रहा। जीवनकाल में जहाँ उन्होंने शिक्षा और न्याय की अलख जगाई, वहीं मरणोपरांत नेत्रदान के माध्यम से वे दुनिया से जाकर भी अमर हो गईं। ग्रामीणों एवं बुद्धिजीवियों ने उनके इस कदम को समाज के लिए एक महा-दान और अत्यंत प्रेरणादायी पहल बताया है।