न्यायालय का समन या कुर्की का आदेश? कुशेश्वरस्थान पुलिस की बड़ी लापरवाही, बिना आदेश ग्रामीण के घर की कुर्की, मामला उजागर होने पर वापस लौटाया सामान

दस्तक 7 मिडिया, दरभंगा।

कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के बहेड़ा गांव से पुलिस की एक बेहद गंभीर, अजीबो-गरीब और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली लापरवाही सामने आई है। यहां पुलिस टीम ने अदालत के किसी भी आदेश के बिना ही एक ग्रामीण के घर पहुंचकर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई को अंजाम दे डाला और घर का सारा सामान ट्रैक्टर में लादकर थाने ले आई। मामले की सच्चाई उजागर होने के बाद फजीहत से बचने के लिए पुलिस को आनन-फानन में पूरा सामान वापस पीड़ित के घर पहुंचाना पड़ा।

 

बिना सूचना घर में घुसी पुलिस, सामान ट्रैक्टर पर लादा

जानकारी के अनुसार, बीते सोमवार की सुबह करीब 11 बजे एसआई मानव कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम और आधा दर्जन चौकीदार बहेड़ा गांव निवासी मो. अब्दुल हफीज के घर पहुंचे। उस समय घर पर मो. हफीज की बहन हजरा खातून अकेली मौजूद थीं। हजरा खातून का आरोप है कि पुलिस ने इस कार्रवाई को लेकर पूर्व में कोई सूचना या नोटिस नहीं दिया था। पुलिसकर्मियों ने घर में जबरन प्रवेश कर पेटी, बक्सा, चौकी, अन्न रखने वाली कोठी समेत तमाम घरेलू सामान बाहर निकाला, ट्रैक्टर पर लादा और सीधे थाने ले गए।

जांच में खुली पोल, कोर्ट का नहीं था कोई कुर्की आदेश

अचानक हुई इस कार्रवाई से स्तब्ध हजरा खातून तुरंत कुशेश्वरस्थान थाने पहुंचीं और थानाध्यक्ष के समक्ष पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर जब मामले की जांच की गई, तो सामने आई सच्चाई ने पुलिस महकमे के होश उड़ा दिए। न्यायालय द्वारा मो. अब्दुल हफीज के खिलाफ कुर्की-जब्ती का कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया था; पुलिस केवल एक सामान्य समन/नोटिस को कुर्की का आदेश समझ बैठी थी।

गलती का अहसास होते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। थानाध्यक्ष के आनन-फानन में दिए गए निर्देश के बाद पुलिस टीम ने जब्त किया गया सारा सामान वापस ट्रैक्टर पर लादकर पीड़ित के घर पहुंचाया।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने स्थानीय पुलिस की सूझबूझ, कानूनी जानकारी और कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जल्दबाजी या अध्ययन की कमी?

आखिर ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि पुलिस अधिकारियों ने न्यायालय द्वारा जारी साधारण समन (नोटिस) को कुर्की का वारंट समझ लिया और बिना पढ़े या समझे कार्रवाई कर दी?
कार्रवाई से पहले जांच क्यों नहीं? जिस कागजी प्रक्रिया और आदेश की जांच सामान उठाने के बाद की गई, वह जांच इतनी बड़ी कार्रवाई करने से पहले क्यों नहीं की गई?

प्रशासनिक दक्षता पर प्रश्नचिह्न

क्या पुलिस अधिकारियों में न्यायालय के दस्तावेजों को समझने की बुनियादी योग्यता या शिक्षा की कमी है?
कुर्की के दौरान पीड़िता का हुए आर्थिक क्षति का भरपाई क्या थानाध्यक्ष निजी कोष से करेंगे या फिर सरकारी कोष से किया जाएगा।
किसी आम नागरिक के घर में बिना किसी कानूनी अधिकार के घुसना और उसकी संपत्ति उठा ले जाना न केवल पुलिस की घोर लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि नागरिक अधिकारों का भी गंभीर हनन है। यह घटना सोचनीय और अत्यंत दुखद है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर जवाबदेही तय होना बेहद आवश्यक है।