बिरौल में सरकारी जमीन की बंदरबांट पर बड़ा खुलासा, पूर्व सीओ व राजस्व कर्मचारी पर फर्जी जमाबंदी का आरोप, डेढ़ दर्जन से अधिक दाखिल खारिज रद्द करने की सिफारिश

दस्तक 7 मिडिया, दरभंगा।

अनुमंडल मुख्यालय बिरौल में सरकारी भूमि को निजी घोषित कर फर्जी तरीके से दाखिल खारिज कराने का एक गंभीर मामला उजागर हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान सीओ कुमारी सरीता रानी ने डेढ़ दर्जन से अधिक संदेहास्पद दाखिल खारिज को रद्द करने के लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता, बिरौल को रिपोर्ट भेजी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंचल अधिकारी द्वारा जारी पत्र में खुलासा हुआ है कि मौजा अकबरपुर बैंक (थाना सं. 296) के अंतर्गत गैरमजरुआ खास किस्म (लोक हित की भूमि) की जमीन पर पूर्व सीओ एवं राजस्व कर्मचारी की मिलीभगत से गलत तरीके से दाखिल खारिज और जमाबंदी कायम कर दी गई थी।
पूर्व सीओ और राजस्व कर्मचारी ने आरएस (नया) खतियान के आधार पर दाखिल खारिज वादों का निष्पादन कर दिया, जबकि पुराना खतियान (खाता 175, खेसरा 135) रकबा 5 एकड़ 91 डिसमल गैरमजरुआ खास दर्ज है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि एक मामले में पूर्व सीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में जमीन को सरकारी बताकर एडीएम दरभंगा को प्रतिवेदन भेजा था। लेकिन बाद में उसी जमीन को रैयती बताकर दाखिल खारिज मंजूर कर दिए और जमाबंदी कायम कर दी।
अनुमंडल मुख्यालय में सड़क, नदी और नाले एवं वासगित पर्चा की भूमि पर हो रहे बेखौफ अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। जानकार बताते हैं कि अंचल कार्यालय पर पूर्व से भूमि ब्रोकर अपना घोंसला बना रखा है। जिसके प्रभाव से अंचल प्रशासन द्वारा निजी स्वार्थ को लेकर गलत तरीके से दाखिल खारिज कर दिया गया है। जिसकी जांच हो इसके लिए प्रशासन से लेकर सरकार तक आवेदन दिया गया है। बताया जाता है कि राज्य खुफिया एजेंसी ने भी बिरौल में हो रहे
भूमि विवाद के पिछे कारणों का जांच कर इसकी सूचना सरकार को भेजा है। मामला जो भी वर्तमान में भूमि विवाद के तह तक जाने पर प्रशासन के समक्ष हकिकत स्वत: सामने आ जाएगा।