बिहार में डीजीपी की रेस तेज ,कई दिग्गज वरिष्ठ आईपीएस का नाम चर्चा में ,दिसंबर में पूरा होगा डीजीपी विनय कुमार का दो वर्षीय कार्यकाल, चयन प्रक्रिया में यूपीएससी की भी अहम भूमिका

दस्तक 7मीडिया / संजय कुमार राय 

बिहार पुलिस के अगले मुखिया को लेकर पुलिस मुख्यालय से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। मौजूदा डीजीपी विनय कुमार का निर्धारित दो वर्षीय कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होने वाला है। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर विभागीय स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। हालांकि नए डीजीपी के नाम पर अंतिम फैसला अभी दूर है, लेकिन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के बीच संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी पद की दौड़ में प्रीता वर्मा, बी. श्रीनिवासन, जितेंद्र सिंह गंगवार, जितेंद्र कुमार और कुंदन कृष्णन समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। इनमें अलग-अलग बैच के अधिकारी शामिल हैं और सभी के पास महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का लंबा अनुभव है। बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र आईपीएस अधिकारियों की सूची केंद्र को भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत नामों पर विचार कर पैनल तैयार किया जाएगा।

वरिष्ठता से लेकर सेवा रिकॉर्ड तक पर नजर

नए डीजीपी के चयन में केवल वरिष्ठता ही निर्णायक नहीं होगी। संबंधित अधिकारियों की सेवा अवधि, प्रशासनिक अनुभव, महत्वपूर्ण पदों पर कार्य, सेवा रिकॉर्ड और उपलब्धता जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा। प्रक्रिया के तहत यूपीएससी की ओर से संभावित नामों में से पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजे जाने की व्यवस्था है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होना है।

प्रीता वर्मा सबसे वरिष्ठ दावेदारों में

1991 बैच की प्रीता वर्मा वरिष्ठता के लिहाज से मजबूत दावेदारों में हैं। वह बिहार में डीजी स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। सरकारी आईपीएस सूची में भी उनका बैच और वर्तमान डीजी स्तर दर्ज है।

वहीं बी. श्रीनिवासन 1992 बैच के अधिकारी हैं। उनका भी लंबा प्रशासनिक अनुभव है और वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

गंगवार और जितेंद्र कुमार भी मजबूत दावेदार

1993 बैच के जितेंद्र सिंह गंगवार और जितेंद्र कुमार भी इस दौड़ में महत्वपूर्ण नाम माने जा रहे हैं।श्री गंगवार वर्तमान में निगरानी में डीजी जैसे जिम्मेदार पद संभाल रहे हैं, जबकि जितेंद्र कुमार केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के डीजी स्तर की जिम्मेदारी में हैं। दोनों अधिकारियों के पास लंबे प्रशासनिक एवं पुलिसिंग अनुभव का रिकॉर्ड है।

कुंदन कृष्णन पर भी निगाहें

1994 बैच के कुंदन कृष्णन का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आ रहा है। वह वर्तमान में डीजी ऑपरेशन और एसटीएफ से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पुलिसिंग और ऑपरेशनल मामलों में लंबे अनुभव के कारण उनकी दावेदारी को भी गंभीर माना जा रहा है। हालिया रिपोर्टों में कुंदन कृष्णन के साथ जितेंद्र कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में रहे हैं।

अंतिम फैसला सरकार के हाथ में

डीजीपी की कुर्सी के लिए नामों की चर्चा भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन फिलहाल इसे लेकर किसी एक नाम को तय मानना जल्दबाजी होगी। यूपीएससी की प्रक्रिया पूरी होने और संभावित नामों का पैनल राज्य सरकार को मिलने के बाद तस्वीर ज्यादा साफ होगी। अंततः बिहार पुलिस की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, यह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।