पंचायत में करोड़ों रुपये के गबन का आरोप, वार्ड सदस्यों ने उप विकास आयुक्त को सौंपा जांच आवेदन।

प्रशांत कुमार, दस्तक 7 मीडिया कुशेश्वरस्थान।

कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड अंतर्गत भिंडुआ पंचायत में मनरेगा, 15वीं वित्त, पंचम वित्त तथा अन्य विकास योजनाओं में करोड़ों रुपये के कथित गबन और अनियमितता का मामला सामने आया है। पंचायत के कई निर्वाचित वार्ड सदस्यों ने संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन देकर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) दरभंगा से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन में पंचायत की मुखिया, पंचायत सचिव (तत्कालीन), रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, कनीय अभियंता तथा प्रखंड स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वार्ड सदस्यों का दावा है कि वर्ष 2022 से अब तक विभिन्न योजनाओं में लगभग एक से दो करोड़ रुपये तक की राशि का गबन किया गया है।

ग्राम सभा और कार्यकारिणी बैठक नहीं होने का आरोप

वार्ड सदस्यों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 के बाद पंचायत में नियमित रूप से ग्राम सभा आयोजित नहीं की गई। बिना ग्राम सभा और कार्यकारिणी समिति की स्वीकृति के योजनाओं का चयन, क्रियान्वयन और भुगतान किया गया। आवेदन में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में वार्ड सदस्यों के हस्ताक्षर और निशान की फर्जी तरीके से नकल कर बैठक की खानापूर्ति कर ली गई।

छठ घाट निर्माण में अनियमितता।

आवेदन में आरोप है कि 15वीं वित्त योजना से छठ घाट निर्माण के नाम पर लगभग 20 लाख रुपये की राशि खर्च दिखाई गई, जबकि संबंधित स्थल का उपयोग आज भी आम लोगों द्वारा श्मशान घाट के रूप में किया जाता है और वहां छठ घाट का उपयोग नहीं हो रहा है। वार्ड सदस्यों ने इसे सरकारी धन की हेराफेरी बताया है।

सोलर लाइट योजना में गड़बड़ी।

पंचायत में स्थापित सोलर लाइटों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अधिकांश सोलर लाइटें BREDA के मानकों के अनुरूप नहीं लगाई गईं और कई स्थानों पर बंद पड़ी हैं। इसमें घटिया सामग्री के उपयोग और कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए 15 से 20 लाख रुपये के गबन की बात कही गई है।

पीसीसी सड़क और चहारदीवारी निर्माण पर सवाल।

आवेदन के अनुसार, पीसीसी सड़क और चहारदीवारी निर्माण में निम्न गुणवत्ता की ईंट, बालू और सीमेंट का उपयोग किया गया। साथ ही, गलत मापी कर अधिक राशि का भुगतान कराने का भी आरोप लगाया गया है। वार्ड सदस्यों ने निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

मनरेगा योजनाओं में फर्जीवाड़े का आरोप।
मनरेगा के तहत कई योजनाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन में कहा गया है कि कुछ मिट्टीकरण कार्य केवल कागजों पर दिखाए गए, जबकि धरातल पर काम नहीं हुआ। कई योजनाओं में एक ही कार्य को अलग-अलग नाम देकर राशि निकासी करने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में कुछ योजनाओं के नंबर भी अंकित किए गए हैं, जिनकी जांच की मांग की गई है।

सामग्री आपूर्ति और बिलिंग पर सवाल।

वार्ड सदस्यों ने आरोप लगाया है कि पंचायत की विभिन्न योजनाओं में एक ही व्यक्ति या फर्म द्वारा सामग्री आपूर्ति दिखाई गई और फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान कराया गया। जीएसटी कटौती और सरकारी राजस्व जमा करने की भी जांच की मांग की गई है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग।

आवेदन के अंत में वार्ड सदस्यों ने उप विकास आयुक्त से आग्रह किया है कि 15वीं वित्त, पंचम वित्त, मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत हुए सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक वर्तमान योजनाओं के भुगतान पर रोक लगाने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।