साक्षरता एक बुनियादी मानवाधिकार, साक्षर परिवार से ही साक्षर राष्ट्र का निर्माण संभव: जितेन्द्र
साक्षरता एक बुनियादी मानवाधिकार, साक्षर परिवार से ही साक्षर राष्ट्र का निर्माण संभव: जितेन्द्र
साक्षरता एक बुनियादी मानवाधिकार, साक्षर परिवार से ही साक्षर राष्ट्र का निर्माण संभव: जितेन्द्र
विधि संवाददाता/दरभंगा
हनुमाननगर प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रधानाध्यापक जितेन्द्र कुमार ने कहा कि साक्षरता एक बुनियादी मानवाधिकार है जो समाज में समानता, स्वतंत्रता एवं विकास का रास्ता खोलती है। इस दिवस को मनाने का उद्वेश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक रूप से साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालना है जिससे विश्व के सभी लोग शिक्षित हो सकें।
इस असवर पर विद्यालय में नवाचारी पहल करते हुए प्रधानाध्यापक ने सभी बच्चों से अपील किया कि साक्षरता की शुरुआत अपने घर से करें। सबसे पहले अपने घर में जो लोग निरक्षर हैं उनको साक्षर करें फिर अपने टोले और मुहल्ले में अभियान चलाएं। तभी जाकर साक्षर परिवार, साक्षर समाज और साक्षर राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। मौके पर सभी बच्चों ने दस लोगों को साक्षर बनाने का संकल्प लिया।
शिक्षक गौतम जौहरी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में केरल के अलावा मिजोरम, हिमाचल प्रदेश,गोवा, त्रिपुरा, सिक्किम और उत्तराखंड राज्य पूर्ण साक्षर राज्य बन चुका है। साक्षरता का सकारात्मक प्रभाव व्यक्तियों के संपूर्ण जीवन पर पड़ता है। अभी के समय में साक्षरता का दायरा सामान्य अक्षरबोध से निकलकर डिजिटल साक्षरता बढ़ चुका है।
शिक्षिका डॉ अन्नू कुमारी ने कहा कि अभी के दौर में महिला साक्षरता दर में वृद्धि देखने को मिल रहा है जो कि शुभ संकेत है। समाज में अच्छे नागरिक का पालन मां की गोद से ही होता है। एक साक्षर माता पूरे परिवार को शिक्षित कर सकती है। हमलोग अज्ञानता के कारण बहुत सारी ऐसी बातों में उलझ जाते हैं जिसका कोई जीवन में महत्व ही नहीं है। इसलिए सबों को पढ़ना जरूरी है ताकि सही और गलत का भेद समझ सकें।
मौके पर सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ शिक्षक गौतम जौहरी, डॉ अन्नू कुमारी, बबीता, आमिर खान, देवेंद्र प्रताप सिंह,अंशु प्रभा, चंद्रप्रभा, प्रियंका आदि मौजूद थे।