11 दिन की भूख हड़ताल रंग लाई, अब हर साल राजकीय समारोह में याद किए जाएंगे शहीद रामफल मंडल
11 दिन की भूख हड़ताल रंग लाई, अब हर साल राजकीय समारोह में याद किए जाएंगे शहीद रामफल मंडल
11 दिन की भूख हड़ताल रंग लाई, अब हर साल राजकीय समारोह में याद किए जाएंगे शहीद रामफल मंडल
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
अमर शहीद रामफल मंडल के बलिदान को आखिरकार बिहार सरकार ने राजकीय सम्मान देने की घोषणा कर दी है। शहीद के सम्मान में पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे जुगनू मंडल के आंदोलन का असर हुआ। आंदोलन में दरभंगा जिले के घनश्यामपुर के अलावा आदित्य मंडल, राजेश मंडल, मुरारी मंडल और समाजसेवी प्रियंका झा भी शामिल थीं। आंदोलनकारियों की मांग के आगे सरकार को झुकना पड़ा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्वीट कर घोषणा की कि अमर शहीद रामफल मंडल के बलिदान को नमन करते हुए प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को बिहार सरकार की ओर से राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी वीरता और राष्ट्रभक्ति की गाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
सीतामढ़ी जिले के रहने वाले रामफल मंडल ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में अदम्य साहस का परिचय दिया था। महज 19 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दे दी थी। इतनी कम उम्र में ही उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
मिथिला की धरती आज भी उनके बलिदान को गर्व और सम्मान के साथ याद करती है। स्वतंत्रता आंदोलन में रामफल मंडल जैसे स्थानीय वीरों की भूमिका को लंबे समय तक वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसके वे हकदार थे। आंदोलनकारियों का कहना था कि शहीद रामफल मंडल को सरकारी स्तर पर उचित सम्मान मिलना चाहिए और उनकी शहादत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।
राजकीय समारोह की घोषणा के बाद उनके समर्थकों और आंदोलनकारियों में खुशी है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक शहीद का सम्मान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में अपने प्राण न्योछावर करने वाले उन तमाम गुमनाम वीरों के प्रति सम्मान है, जिनके बलिदान से देश को आजादी मिली।
शहीद रामफल मंडल का जीवन साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की मिसाल रहा है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।