40 हजार रुपये लेने के आरोप पर गया जी के आइजी विकास वैभव ने लिया संज्ञान, एसएसपी को जांच का निर्देश, साइबर थाने के रीडर पर केस रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, घुस लेने के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी।
40 हजार रुपये लेने के आरोप पर गया जी के आइजी विकास वैभव ने लिया संज्ञान, एसएसपी को जांच का निर्देश, साइबर थाने के रीडर पर केस रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, घुस लेने के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी।
40 हजार रुपये लेने के आरोप पर गया जी के आइजी विकास वैभव ने लिया संज्ञान, एसएसपी को जांच का निर्देश,
साइबर थाने के रीडर पर केस रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप, घुस लेने के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
गया जी के आईजी विकास वैभव अपने बेहतर पुलिसिंग के लिये हर जिला में चर्चित रहें हें ,इनकी कार्यशैली कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार रही हें ,ऐसे में किसी का क्या मजाल जो भ्रष्ट और गलत कार्यों को अंजाम देकर बच जाए ,अगर जांचोपरांत मामला सही पाया गया तों साईबर थाना के रीडर पर कारवाई तय हें ?
साइबर थाने के रीडर पर 40 हजार रुपये लेकर साइबर ठगी का मामला रफा-दफा करने के आरोप को गया क्षेत्र के आइजी विकास वैभव ने गंभीरता से लिया है। दस्तक 7 मीडिया की खबर पर संज्ञान लेते हुए आइजी ने एसएसपी को पूरे मामले की जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई का निर्देश दिया है। आइजी ने कहा है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
आइजी विकास वैभव के अनुसार, मामला संभवतः अप्रैल माह का है। ऐसे में अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि साइबर थाने के रीडर धनंजय द्वारा कथित रूप से 40 हजार रुपये लिए गए थे या नहीं। मामले को रफा-दफा करने के नाम पर लेन-देन की पुष्टि होती है तों कारवाई निश्चित ?
केस नहीं करने के नाम पर 40 हजार मांगने का आरोप
मामला जहानाबाद साइबर थाने से जुड़ा है। आरोप है कि मखदुमपुर थाना क्षेत्र के लड़ौआ निवासी अनिकेत कुमार शर्मा के बैंक खाते में अचानक करीब एक लाख 67 हजार रुपये आ गए। अनिकेत विद्यार्थी होने के साथ ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि खाते में यह राशि कब और कहां से आई, इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी।
पुलिस को जांच के दौरान उक्त खाते से साइबर ठगी की रकम के लेन-देन का संदेह हुआ। इसके बाद साइबर थाने की पुलिस अनिकेत को उसके घर से थाने लेकर आई। आरोप है कि उसे एक दिन हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया और अगले दिन फिर थाने बुलाकर पूरे दिन रखा गया।
इसी दौरान अनिकेत के भाई ने काको सर्किल के होमगार्ड के एक चालक से संपर्क किया। चालक के माध्यम से साइबर थाना के रीडर धनंजय से बातचीत होने की बात सामने आई। आरोप है कि रीडर ने 40 हजार रुपये देने पर मामला दर्ज नहीं करने की बात कही।
आरोप के अनुसार, अनिकेत के भाई ने चालक के माध्यम से 40 हजार रुपये रीडर तक पहुंचाए। लेकिन इसके अगले ही दिन अनिकेत के विरुद्ध साइबर फ्रॉड की प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद अनिकेत ने कथित तौर पर चालक से फोन पर सवाल किया कि जब मामला रफा-दफा करने के नाम पर रुपये लिए गए थे तो उसके विरुद्ध प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई।
कथित ऑडियो भी जांच के घेरे में
इस मामले में रीडर के भाई और चालक के बीच कथित बातचीत का ऑडियो सामने आने की बात कही जा रही है। दावा है कि बातचीत में रुपये के लेन-देन और मामले को रफा-दफा करने से संबंधित बातें हैं।
हालांकि, इस ऑडियो की सत्यता और उसमें मौजूद आवाज की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी प्रमाणिकता की जांच भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगी। दस्तक 7 मीडिया किसी भी अपुष्ट ऑडियो की सत्यता का समर्थन नहीं करता है।
दूसरी ओर, साइबर थाना जहानाबाद में अनिकेत कुमार शर्मा के बैंक खाते से संदिग्ध लेन-देन को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में बताया गया है कि साइबर क्राइम स्पेशल यूनिट (सीसीएसयू), बिहार से उपलब्ध संदिग्ध बैंक खातों की सूची की जांच के दौरान इंडसइंड बैंक के खाते से साइबर धोखाधड़ी की रकम के लेन-देन का पता चला।
पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी इस खाते से जुड़ी कई शिकायतें मिली थीं , आरोप है कि खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
सीसीटीवी और मोबाइल जांच से खुलेगा राज
आइजी के निर्देश के बाद अब जांच में कई बिंदु अहम होंगे। यदि अनिकेत को दो दिनों तक थाने में रखा गया था तो साइबर थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज से इसकी पुष्टि हो सकती है। इसके अलावा संबंधित लोगों के मोबाइल कॉल विवरण, बातचीत, रुपये के कथित लेन-देन और ऑडियो की तकनीकी जांच भी आरोपों की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
आइजी के संज्ञान के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस महकमे में भी इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि जांच में 40 हजार रुपये लेने का आरोप प्रमाणित होता है तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
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