जयनगर डीएसपी के विरुद्ध लगे आरोपों की जांच कर रहें हैं मुख्यालय डीएसपी ,सवाल यही कि निष्पक्षता से होगी जांच ?
जयनगर डीएसपी के विरुद्ध लगे आरोपों की जांच कर रहें हैं मुख्यालय डीएसपी ,सवाल यही कि निष्पक्षता से होगी जांच ?
दरभंगा से संजय राय की रिपोर्ट
एक तरफ बिहार मे शराब बंदी को लेकर सरकार अपना पीठ थप थपा रही हैं वहीं दूसरी तरफ बिहार मे शराब के मामले मे बिहार पुलिस के कर्मी
शतरंज की चाल के तरह खेल खेल रहें हैं। कोई दलाल रखकर तो कोई पुलिसकर्मी रखकर इस खेल मे अवैद्य उगाही कर रहें हैं।
इसका ताजा उदाहरण हाजीपुर जिले मे कुछ दिन पहले एक थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों का शराब मामले मे पकड़े जाना हैं। शराब या अन्य बड़े मामलों मे डीएसपी स्तर के पदाधिकारी भी अपने पर्यवेक्षण टिप्पणी मे बड़ा खेल खेलते हैं।पर्दे के पीछे या पर्यवेक्षण टिप्पणी मे कैसे माफियाओं से खेल खेलकर उगाही करते हैं यह भी अब करीब करीब बिहार के सभी जिलों मे जगजाहिर हैं। ऐसे पर्यवेक्षण टिप्पणी मे किये गये गलतियों का पर्दाफाश तब होगा जब इन कांडों की समीक्षा होगी और यह समीक्षा कौन करेगा ?जाहिर सी बात हैं कि जिला के एसपी करेंगे या फिर और आपत्ति हुई तो आई जी करेंगे। लेकिन कई बड़े बड़े कांडों मे भारी भरकम की जब लेनदेन हो जाती हो तो सभी के सुर एक हो जाते हैं,अगर सुर एक नहीं हुये फिर एक दूसरे के पर्यवेक्षण रिपोर्ट मे विरोधाभास होता हैं। पूर्व मे पुलिस मुख्यालय के बड़े बड़े अधिकारियों की भी समीक्षा होती थी। एडीजी या डीजी स्तर के पदाधिकारियों का समय तय होता था और अलग अलग समय मे जिलों मे उनके द्वारा कांडो की समीक्षा की जाती थी लेकिन अब हाल के दिनों से यह व्यवस्था देखने को नहीं मिलती। मजेदार बात हैं कि अब जिले के पुलिसकर्मी भी कोई गलत काम मे सबूत के साथ धरे जाते हैं तो कारवाई करना दूर जांच कराने मे भी वरीय पदाधिकारी कोताही बरतते हैं। अगर जांच होती भी हैं तो मकसद सिर्फ ऐसे पुलिसकर्मी को बचाने तक सीमित हैं। वजह से भी अब लोग अवगत हैं।
मधुबनी जिला के जयनगर अनुमंडल मे एसडीपीओ के एक बॉडीगार्ड का विडिओ वाईरल हैं जिसमें शराब माफियाओं से बात करते हुये स्पष्ट सुना जा सकता हैं। यह विडिओ तब सामने आया जब जयनगर के स्थायी निवासी भूषण प्रसाद द्वारा जयनगर एसडीपीओ पर कई आरोप लगाते हुये जिला समेत राज्य के तमाम अधिकारियों को आवेदन दिया। इसी आवेदन के आलोक मे बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मधुबनी के मुख्यालय डीएसपी आरोपों की जांच कर रहें हैं। इस जांच के दौरान ही मुख्यालय डीएसपी को सबूत के तोर पर ऑडियो दिया गया हैं जो विडिओ के रूप मे भी वाईरल हैं।
अब उस वायरल विडिओ के बारे मे पता करने का प्रयास किया तो पता चला कि जयनगर के एसडीपीओ के बॉडीगार्ड पंचम कुमार की आवाज हैं। इस बाबत आरोप कर्ता भूषण प्रसाद ने बताया कि यह एसडीपीओ का बॉडीगार्ड पंचम कुमार की आवाज हैं उन्होंने कहा कि पंचम पूर्व मे भी जयनगर मे ही था लेकिन एसपी ने यहां से हटा दिया था। उन्होंने कहा कि एसडीपीओ की पहल पर इसे फिर से जयनगर मे पोस्टिंग हुई और शराब माफियाओं से जुगत बेठाकर डीएसपी के तालमेल से बड़ा खेल खेला जा रहा था।
भूषण ने कहा कि जयनगर एसडीपीओ द्वारा शराब के मामले मे कैसे शराब माफियाओं को प्राथमिकी मे अभियुक्त बनाकर फिर उसे कैसे निर्दोष बताया गया हैं ,इस खेल का भी सबूत मुख्यालय डीएसपी प्रभाकर तिवारी को दिया गया हैं।
अब सवाल उठता हैं कि क्या एक डीएसपी दूसरे डीएसपी के विरुद्ध लगाये गये आरोपों की निष्पक्षता से जांच करेंगे ?या फिर पंचम कुमार के वायरल हुये विडिओ को लेकर सच्चाई से मुख्यालय डीएसपी अवगत होने का प्रयास करेंगे?अगर ऑडियो की सच्चाई बाहर आती हैं तो उसपर कारवाई के लिये सरकार को क्या पत्र लिखेंगे ?कई ऐसे पहलू हैं जिसमें मुख्यालय डीएसपी को बारीकी से जांच कर सरकार को प्रतिवेदन देना होगा ताकि पुलिस पर लोंगों का भरोसा बना रहें।हालांकि इस ऑडियो की हम पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन इस वायरल विडिओ को लेकर जांच करना आवश्यक हैं ताकि सच्चाई से पर्दा उठ सके।