पॉलिटेक्निक छात्रों के छात्रावास की मांग पर आंदोलन, समाजसेवी प्रियंका झा ने प्रशासन पर उठाए सवाल

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र छात्रावास आवंटन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों के आग्रह पर समाजसेवी प्रियंका झा आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और उनकी मांगों का समर्थन किया। प्रियंका ने प्रशासन से छात्रावास को खाली कराकर वास्तविक हकदार पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों को आवंटित करने की मांग की।

आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि पॉलिटेक्निक कॉलेज का छात्रावास विद्यार्थियों के लिए बनाया गया है, लेकिन वर्तमान में इसमें प्रशासनिक कर्मियों और एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े लोगों को आवंटन कर दिया गया है ,जो नियमाकुल नहीं हे । छात्रों ने छात्रावास खाली कराकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की मांग की।

आंदोलन स्थल पर सदर एसडीओ के साथ सदर डीएसपी के प्रभार में कार्यरत कमतौल डीएसपी एसके सुमन भी पहुंचे। इस दौरान प्रियंका झा ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्या को समझने और समाधान की पहल करने के बजाय आंदोलनकारियों और समाजसेवियों के प्रति दबावपूर्ण रवैया अपनाया गया।

प्रियंका झा के अनुसार, जब उनसे पूछा गया कि वह आंदोलन में कैसे पहुंचीं और क्या छात्रों ने उन्हें आमंत्रण पत्र भेजा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि छात्रों ने फोन और वीडियो के माध्यम से अपनी समस्या बताकर सहयोग के लिए बुलाया था। इसी आग्रह पर वह आंदोलन स्थल पर पहुंचीं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार है। प्रशासन को उनकी बात सुनकर समस्या के समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अच्छे कार्यों में सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग रहेगा, लेकिन किसी अधिकारी द्वारा छात्रों, आंदोलनकारियों या सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ दबावपूर्ण व्यवहार किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध किया जाएगा।

प्रियंका झा ने वरीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से कमतौल डीएसपी एसके सुमन की कार्यशैली एवं प्रशासनिक कुशलता की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की। उन्होंने कहा कि छात्रावास की समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए और विद्यार्थियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।

समाजसेवी प्रियंका ने कहा कि “यह लोकतंत्र है, पुलिसिया तंत्र नहीं। जनता और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। प्रशासन जनता की सेवा के लिए है, जनता को डराने के लिए नहीं।”