दस्तक 7 मीडिया की खबर का असर, सोनकी थाना से हटाए गए होमगार्ड जवान सुशील यादव,

खबर प्रकाशित होने के एक घंटे के भीतर एसएसपी ने दी कार्रवाई की जानकारी, स्थानीय लोगों ने जताई खुशी; वर्षों से एक ही क्षेत्र में प्रतिनियुक्ति को लेकर उठ रहे थे सवाल

दस्तक 7 मीडिया /संजय कुमार राय 

सोनकी थाना में तैनात होमगार्ड जवान सुशील यादव को थाना से हटा दिया गया है। दस्तक 7 मीडिया ने होमगार्ड जवान की लंबे समय से एक ही थाना क्षेत्र में तैनाती और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के करीब एक घंटे के भीतर वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी की ओर से जानकारी दी गई कि होमगार्ड जवान को थाना से वापस कर दिया गया है।

कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने एसएसपी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से उठ रहे सवालों पर त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई किया जाना सकारात्मक कदम है।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद अब सवाल होमगार्ड विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिर किस आधार पर एक होमगार्ड जवान की प्रतिनियुक्ति एक ही थाना या उसके आसपास के क्षेत्र में एक दशक से अधिक समय तक बनी रही। ग्रामीणों ने इस बात की भी जांच की मांग की है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर प्रतिनियुक्ति के पीछे विभागीय स्तर पर कोई विशेष कारण था या नहीं।

स्थानीय लोगों की ओर से होमगार्ड जवान पर अवैध शराब, गांजा कारोबारियों से कथित सांठगांठ और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों से कथित तौर पर मासिक वसूली की जाती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि होमगार्ड जवान की प्रतिनियुक्ति अक्सर मंदिर की सुरक्षा के नाम पर की जाती रही, लेकिन वह लगातार थाना में ड्यूटी करते नजर आते थे। कुछ लोगों ने थाना से जुड़े मामलों में कथित रूप से बिचौलिये की भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों की भी जांच की आवश्यकता है।

इसी क्रम में ग्रामीणों ने जवान की कथित संपत्ति और लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती की भी जांच की मांग उठाई है। लोगों का सवाल है कि यदि किसी जवान की लगातार एक ही थाना क्षेत्र में तैनाती नियमों के अनुरूप है तो इसके स्पष्ट आधार क्या हैं और यदि नहीं है तो इतने वर्षों तक यह व्यवस्था कैसे चलती रही?

थानाध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

सोनकी थानाध्यक्ष से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के आरोपों की कोई जानकारी नहीं है। थानाध्यक्ष के अनुसार, फिलहाल होमगार्ड जवान सुशील यादव की प्रतिनियुक्ति विधि-व्यवस्था और श्रावणी मेला को लेकर थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक होमगार्ड जवान की सोनकी थाना अथवा आसपास के क्षेत्र में एक दशक से अधिक समय तक लगातार प्रतिनियुक्ति किस नियम और प्रक्रिया के तहत होती रही। यदि प्रतिनियुक्ति नियमसम्मत थी तो इसके दस्तावेज और आदेश सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं आए और यदि नियमों से इतर थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

कुछ ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस संबंध में पहले भी जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों को सूचना दी गई थी, लेकिन मामले पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

फिलहाल एसएसपी के स्तर से होमगार्ड जवान को सोनकी थाना से हटाए जाने के बाद मामला एक नए सवाल के साथ खड़ा है क्या लंबे समय तक एक ही स्थान पर प्रतिनियुक्ति की पूरी व्यवस्था की विभागीय जांच होगी और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल जवान को हटाना ही पर्याप्त नहीं है। वर्षों से चली आ रही प्रतिनियुक्ति की पूरी प्रक्रिया, संबंधित आदेश और उसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी जवान की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर सवाल न उठे।