सुप्रीम कोर्ट ने अदालती टिप्पणियों के दुरुपयोग पर केंद्र को भेजा नोटिस

दस्तक 7मीडिया ,नई दिल्ली /

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम में न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर व्यावसायिक और राजनीतिक इस्तेमाल किए जाने के मामले में केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता राजा चौधरी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान से जुड़ा मामला

याचिका के अनुसार, मई 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी के बाद विवाद शुरू हुआ था। उन्होंने फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने वालों को ‘कॉकरोच’ कहा था। बाद में इस टिप्पणी को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से अभियान शुरू किया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत में हुई सामान्य बातचीत और मौखिक टिप्पणियों को उनके मूल संदर्भ से अलग कर मीम, रील और अन्य सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके जरिये कमाई और राजनीतिक प्रचार भी किया जा रहा है।

न्यायपालिका की छवि प्रभावित होने की चिंता

याचिका में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यंग्य और न्यायपालिका की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अदालती कार्यवाही के अंशों को सनसनीखेज तरीके से पेश करने से न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।

फर्जी वकीलों की जांच की मांग

याचिका में फर्जी वकीलों और कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल की गई कानून की डिग्रियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। इसके लिए सीबीआई से जांच कराने का आग्रह किया गया है। याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उस कथित बयान का भी उल्लेख है, जिसमें बड़ी संख्या में फर्जी वकीलों के होने की बात कही गई थी।

सीजेआई ने दी थी सफाई

विवाद के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री के सहारे कानूनी पेशे में प्रवेश करने वाले धोखेबाजों के लिए थी। इसका उद्देश्य छात्रों, प्रदर्शनकारियों या युवा पीढ़ी को आहत करना नहीं था।

अब सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को डिजिटल और सोशल मीडिया पर अदालती टिप्पणियों तथा लाइव-स्ट्रीमिंग की क्लिप के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर आगे सुनवाई करेगा।