50 हजार भक्तों ने किया बाबा कुशेश्वरनाथ का जलाभिषेक, लेकिन VIP पूजा को लेकर उठे सवाल,
आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक, मंत्री के गर्भगृह में पूजा करने के व्यवस्था पर उठ रहा सवाल।

प्रशांत कुमार, दस्तक 7 मीडिया, कुशेश्वरस्थान।

उत्तर बिहार के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बाबा कुशेश्वर धाम में सावन की पहली सोमवारी पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार करीब 50 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा कुशेश्वरनाथ का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा कुशेश्वरस्थान भक्तिमय बना रहा।

भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर इस बार प्रशासन एवं मंदिर न्यास समिति ने आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश कर सीधे जलाभिषेक करने पर रोक लगा दी। भक्तों के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत बाहर से ही जलाभिषेक और दर्शन की व्यवस्था की गई।
लेकिन इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने मंदिर की व्यवस्था और कथित VIP प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम भक्तों के लिए नियम, मंत्री के लिए अलग व्यवस्था?

आरोप है कि जिस दिन हजारों आम शिवभक्तों को सुरक्षा का हवाला देते हुए गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया गया, उसी दिन भाजपा के मंत्री रामचन्द्र प्रसाद और कई अधिकारी एवं तथाकथित यूट्यूबर को गर्भगृह के अंदर प्रवेश कराया गया और वहां पूजा-अर्चना कराई गई।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षा का नियम आम श्रद्धालुओं के लिए था या सभी के लिए?
एक तरफ हजारों श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे और उन्हें गर्भगृह में जाकर जल चढ़ाने की अनुमति नहीं मिली। दूसरी तरफ एक राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति और पदाधिकारी को उसी दिन गर्भगृह में प्रवेश देकर पूजा कराने की अनुमति कैसे मिली—यह सवाल अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे कई सवाल

मंदिर प्रशासन और न्यास समिति की ओर से यदि गर्भगृह में प्रवेश पर रोक सुरक्षा कारणों से लगाई गई थी, तो फिर VIP या जनप्रतिनिधि के लिए अलग व्यवस्था क्यों?
क्या मंदिर में सुरक्षा के नियम सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होते हैं? क्या किसी मंत्री या जनप्रतिनिधि के लिए आम भक्तों से अलग प्रोटोकॉल निर्धारित है? और यदि VIP पूजा के लिए कोई आधिकारिक प्रावधान है, तो क्या उसकी जानकारी आम श्रद्धालुओं को भी दी गई थी?
इन सवालों का जवाब मंदिर न्यास समिति और प्रशासन की ओर से दिया जाना जरूरी है।

आस्था के सामने VIP संस्कृति का सवाल
कुशेश्वर धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि उत्तर बिहार और मिथिला की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां दूर-दराज से आने वाले हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच यह भावना पैदा होना कि भगवान के दरबार में भी आम और खास के लिए अलग-अलग नियम हैं, मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।