12 साल से जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के दो आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत,

अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हवाला; ट्रायल में देरी को बताया जमानत का प्रमुख आधार

दस्तक 7मीडिया /नई दिल्ली।

उच्चतम न्यायालय ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े मामले में 12 वर्षों से जेल में बंद दो आरोपियों मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर को जमानत देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले की सुनवाई अत्यंत धीमी गति से चल रही है। जनवरी 2025 से अब तक केवल दो गवाहों की ही गवाही दर्ज हो सकी है और निकट भविष्य में मुकदमे के पूरा होने की संभावना भी नहीं दिख रही है। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में आरोपियों को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों आरोपियों के खिलाफ एक जैसे आरोपों को लेकर तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। राजस्थान में दर्ज मामलों में उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी थी। इसी आधार पर सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा दर्ज मामले में भी उन्हें जमानत देने का निर्णय लिया।

दोनों आरोपियों को वर्ष 2014 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था और तब से वे लगातार न्यायिक हिरासत में थे। यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया, जिसमें अप्रैल 2026 में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों की रिहाई की शर्तें संबंधित ट्रायल कोर्ट तय करेगा। साथ ही कहा कि यदि आरोपी जांच में सहयोग नहीं करते हैं या मुकदमे की कार्यवाही में बाधा डालने अथवा देरी करने का प्रयास करते हैं, तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।