ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट का मास्टरमाइंड 5 दिन की रिमांड पर, मोबाइल से IAS-IPS अधिकारियों के नंबर और चैट्स मिलने का दावा

दस्तक 7मीडिया / पटना 

बिहार में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये के खेल का खुलासा होने के बाद इस मामले का मुख्य आरोपी राजन जायसवाल अब बिहार एसटीएफ और साइबर थाना पुलिस की पांच दिनों की रिमांड पर है। एसटीएफ ने उसे हाल ही में गुप्त सूचना के आधार पर मोकामा रेलवे स्टेशन के पास वंदे भारत एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया था। अब जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।

जांच के अनुसार, मोतिहारी सदर के एसडीएम अरुण कुमार पांडे से उनकी मनचाही पोस्टिंग बरकरार रखने के नाम पर 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। आरोप है कि राजन जायसवाल व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए रुपये की मांग कर रहा था तथा रकम नहीं देने पर ट्रांसफर या पदस्थापन रद्द कराने की धमकी दे रहा था। इसके बाद एसडीएम की शिकायत पर मोतिहारी साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पूछताछ और मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के मोबाइल से करीब 10 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े चैट रिकॉर्ड मिले हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी पहले किन-किन अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामलों में सक्रिय रहा और उसके संपर्क किन लोगों से थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली साबित करने के लिए कई वर्तमान और पूर्व मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं तथा नौकरशाहों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल करता था। इन्हीं तस्वीरों के जरिए वह अधिकारियों पर प्रभाव डालने और अपना रसूख दिखाने की कोशिश करता था। इसके अलावा वह लाल-पीली बत्ती लगी गाड़ियों और कथित बॉडीगार्ड के काफिले के साथ चलकर भी अपना दबदबा बनाने का प्रयास करता था।

सूत्रों के मुताबिक, बिहार पुलिस मुख्यालय और डीजीपी कार्यालय के स्तर पर पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां इस कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट से जुड़े अन्य दलालों, सफेदपोशों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ के आधार पर मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।