प्रशासनिक उपेक्षा के बीच मानवता की मिसाल, बिरौल नगर पंचायत में सफाई संकट और मुख्य पार्षद की पहल,दिखा दस्तक 7 मिडिया का असर

दस्तक 7 मिडिया,उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

दरभंगा जिले का नगर पंचायत बिरौल इन दिनों एक अजीब और गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां सरकार की ओर से साफ-सफाई के नाम पर पिछले कई महीनों से एक भी पैसा आवंटित नहीं किया गया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता की समस्याओं ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
इस गंभीर मुद्दे को सबसे पहले ‘दस्तक 7 मीडिया’ ने प्रमुखता से उठाया था। खबर छपने के बाद इसका असर साफ तौर पर देखने को मिला, जब नगर के मुख्य पार्षद विनोद सहनी (विनोद बंपर) ने स्थानीय जनता की इस विकट समस्या को मानवता के दृष्टिकोण से लेते हुए खुद मोर्चा संभाला।
जनता के दर्द को समझते हुए मुख्य पार्षद ने पिछले चार दिनों बंद साफ सफाई को विशेष अभियान के तहत चलाया है। सड़कों और लोगों के घरों के बाहर चार दिनों से जमा कचरे को युद्ध स्तर पर हटवाया गया। दुर्गंध और गंदगी से भरे सार्वजनिक स्थानों पर चूने का छिड़काव कराया गया ताकि किसी भी बीमारी फैलने का खतरा न रहे।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान जब मुख्य पार्षद श्री बंपर ने सड़कों पर पसरी गंदगी को देखा, तो उनका दिल पसीज गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा
सरकार भले ही आवंटन भेजने में देरी कर रही है, लेकिन क्षेत्र भ्रमण के दौरान जब मैंने सड़कों पर कचरे का अंबार देखा, तो मेरी अंतरात्मा ने गवाही नहीं दी कि हमारे नगर की जनता इस तरह गंदगी और नारकीय जीवन जीने को मजबूर रहे। इस स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने तुरंत सफाई कर्मचारियों से चर्चा की और शहर को कचरा-मुक्त बनाने और दुर्गन्ध वाले क्षेत्र में चुने का छिड़काव कराने का निर्देश दिए।

अब सबसे बड़ा सवाल– भले ही मुख्य पार्षद विनोद बंपर ने व्यक्तिगत संवेदनशीलता और मानवता का परिचय देकर नगर की जनता का दिल जीत लिया हो, लेकिन यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। दुसरा पहलू तो सरकारी आवंटन के अभाव में पिछले कई महीनों से 82 सफाई कर्मचारियों और सुपरवाइजरों को मानदेय (वेतन) नहीं मिला है। इन कर्मचारियों के सामने आज अपने परिवार का भरण-पोषण करने की विकट स्थिति और भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। मुख्य पार्षद का यह तात्कालिक प्रयास सराहनीय है, लेकिन इन मेहनतकश सफाई कर्मियों के वेतन और पेट की आग बुझाने की समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।


बिरौल नगर पंचायत की यह घटना शासन-प्रशासन के लचर रवैया को उजागर करती है, जहां विकास और सफाई के लिए फंड महीनों तक रुका रहता है। यदि समय रहते सरकार ने आवंटन जारी नहीं किया, तो कुछ दिनों की यह राहत फिर से बड़े संकट में बदल सकती है।