गंभीर लापरवाही, बिना साक्षर आरक्षी के भरोसे चल रहा बिरौल थाना, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
गंभीर लापरवाही, बिना साक्षर आरक्षी के भरोसे चल रहा बिरौल थाना, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
गंभीर लापरवाही, बिना साक्षर आरक्षी के भरोसे चल रहा बिरौल थाना, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाती है, बल्कि थाना परिसर की सुरक्षा और रिकॉर्ड की गोपनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिरौल थाना लंबे समय से बिना किसी साक्षर आरक्षी के भरोसे चल रहा है। अत्यंत चिंताजनक स्थिति यह है कि थाने के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य, जैसे कि सरिस्ता का रखरखाव और पुलिस पंजियों का संधारण, आरक्षियों के बजाय ग्रामीण पुलिस (चौकीदार) द्वारा किया जा रहा है। एक पुलिस थाने में जहां गंभीर और संवेदनशील कानूनी दस्तावेज रखे जाते हैं, वहां गैर-पेशेवर हाथों से काम होना कानून व्यवस्था की प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है।
बिरौल थाना अंतर्गत कुल 40 ग्रामीण पुलिस (चौकीदार) पदस्थापित हैं, जिनकी भूमिका की आड़ में थाने की पूरी कार्यप्रणाली संचालित हो रही है।
इनमें से दो चौकीदार थाने की सरिस्ता का कार्य संभाल रहे हैं। चार लोग अपने पिता के स्थान पर कार्य कर रहे हैं, जो विभागीय नियमों की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शेष 34 चौकीदार अपने आवंटित कार्य क्षेत्रों में तैनात हैं।
नियमानुसार, थाने के अभिलेखों और पंजियों को संभालने का कार्य प्रशिक्षित और साक्षर आरक्षियों का होता है, ताकि सूचनाओं की गोपनीयता और कानूनी शुद्धता बनी रहे। चौकीदारों से यह कार्य करवाना न केवल उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है, बल्कि यह थाना संचालन की नियमावली का भी सीधा उल्लंघन है।
बिरौल थाना का नया भवन जनवरी 2026 से विधिवत संचालन हो रहा है। लेकिन सुरक्षा के प्रति उदासीनता का आलम यह है कि आज तक पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस नहीं किया गया है। एक ऐसे थाने में, जहां आए दिन फरियादियों और संदिग्धों का आना-जाना लगा रहता है, वहां सीसीटीवी का न होना किसी बड़ी सुरक्षा चूक को न्योता देने जैसा है। थाना जैसे अतिसंवेदनशील स्थान पर साक्षर आरक्षी की कमी और उसकी भरपाई चौकीदारों से कराया जाना उच्च अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। क्या विभाग को यह जानकारी नहीं है कि थाना परिसर की सुरक्षा और रिकॉर्ड का रखरखाव किन हाथों में है? बिना साक्षर आरक्षी के चल रहा यह थाना अब अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।