जनहित के नाम पर कानून हाथ में लेना अब पड़ेगा महंगा,प्रदर्शनकारियों पर FIR,बन सकता है राजनीति मुद्दा

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

क्या अपनी समस्याओं को लेकर सड़क जाम करना या उग्र प्रदर्शन करना अब आपको जेल की सलाखों के पीछे भेज सकता है? बिरौल पुलिस द्वारा हाल ही में की गई एक सख्त कार्रवाई ने प्रशासन के रुख को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। अब जन-समस्याओं को उठाने का तरीका बदलना होगा, वरना ‘आंदोलन’ सीधा ‘एफआईआर’ में बदल सकता है।
हाल ही में बिरौल और बड़गांव थाना क्षेत्र की सीमा पर एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई थी। इस घटना के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने घटनास्थल पर पहुंचकर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। प्रशासन का कहना है कि यह प्रदर्शन न केवल यातायात व्यवस्था के लिए बाधा बना, बल्कि यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन था। इस घटना को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए, बिरौल पुलिस के पीएस आई शैलेश कुमार के लिखित आवेदन पर सड़क जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। जिसमें माहे सिंधिया के राजा सिंह,बिरौल हनुमान नगर के गौतम सिंह, परमजीत सिंह,बड़गांव थाना क्षेत्र के भुसकौल निवासी मनोज सिंह, अनील सिंह, प्रशांत कुमार सिंह एवं 100-150 से अधिक अज्ञात लोगों अभियुक्त बनाया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में एक सख्त संदेश दिया है। पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जनता को अपनी समस्याओं को रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसका तरीका संवैधानिक होना चाहिए।
समस्या होने पर संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखना ही कानूनी और उचित रास्ता है।
सड़क जाम करने या उपद्रव करने से आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है, जिसे प्रशासन अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह एफआईआर एक चेतावनी है कि भविष्य में यदि कोई भी समूह कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश करेगा, तो पुलिस प्रशासन बिना किसी रियायत के उन पर कानूनी कार्रवाई करेगा। बिरौल पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो समस्याओं के समाधान के लिए सबसे पहले ‘सड़क जाम’ को अपना हथियार बनाते हैं। याद रखें, आपकी समस्या का समाधान प्रशासन की फाइलों और संवाद की मेजों पर है, न कि सड़कों पर जाम लगाकर यातायात ठप करने में। बतादे कि ऐसे ही पूर्व के तीन मामले में
पुलिस ने दर्जनों लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की कार्रवाई कर चुकी है।